हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
मोदी युग में लोकतंत्र: विकास, विरोध और सवालों का संतुलन – एक संपादकीय विश्लेषण प्रस्तावना: तीन दोस्तों की वर्तमान राजनीति पर चर्चा प्रयागराज शहर के चंद्रशेखर आजाद पार्क में हरी-भरी घास पर बैठ कर तीन दोस्त वर्तमान राजनीति पर बहस कर रहे हैं। पहला दोस्त उत्साह से बोलता है – “मोदी जी के कार्यकाल में योजनाओं की बरसात हो गई है, देश बदल रहा है।” दूसरा धीरे-से जोड़ता है – “सही कहा, लेकिन विरोध और बहस भी बढ़ी है।” तीसरा दोस्त मुस्कुराते हुए कहता है – “लोकतंत्र में विकास और सवाल दोनों अनिवार्य हैं।” यह संवाद महज़ बातचीत नहीं; यह 2014 से 2025 तक भारत की राजनीतिक कहानी का सार है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने तेज़ विकास की ओर कदम बढ़ाए हैं, पर आलोचना, विरोध और सवाल भी उसी गति से उभरे हैं। यह लेख इसी द्वंद्व – विकास बनाम सवाल – के संतुलन को समझने की कोशिश है। मोदी सरकार की योजनाएँ: विकास के नए प्रतिमान मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही “सबका साथ, सबका विकास” का नारा दिया। यह सिर्फ़ चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि अनेक नीतियों की आधारशिला बनी। स्वच्छ भारत अभियान (2014): लाखो...