हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
तारिक रहमान: निर्वासन की आग से निकली आशा की ज्योति बांग्लादेश के नए राजनीतिक सूर्योदय की कहानी 20 नवंबर 1965 को ढाका में जन्मे आज बांग्लादेशी राजनीति के सबसे निर्णायक व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं। 2026 के आम चुनावों में (BNP) की ऐतिहासिक जीत के बाद वे प्रधानमंत्री-निर्दिष्ट बने—एक ऐसा क्षण जो केवल सत्ता-परिवर्तन नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष, निर्वासन और लोकतांत्रिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जनउभार के बाद बने शून्य को भरने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है—और राष्ट्र की निगाहें उन्हीं पर टिकी हैं। विरासत, बचपन और राष्ट्रनिर्माण की स्मृतियाँ तारिक रहमान की राजनीतिक चेतना किसी एक घटना की देन नहीं; यह इतिहास की आग में तपकर बनी है। वे —बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नायक—और पूर्व प्रधानमंत्री के ज्येष्ठ पुत्र हैं। 1971 के युद्धकालीन अनुभवों और परिवार पर पड़े दमन ने उन्हें कम उम्र में ही सत्ता, स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के अर्थ सिखाए। ढाका के BAF Shaheen College में अनुशासन और आत्मसंयम ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। विश्वविद्यालयी वर्षों में अंतरराष्ट्रीय...