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एससी/एसटी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा : सामाजिक न्याय की नई चुनौती (मौलिक, प्रवाहपूर्ण एवं विश्लेषणात्मक लेख) प्रस्तावना भारतीय संविधान सामाजिक और शैक्षिक रूप से वंचित समुदायों को समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण को एक सुधारात्मक उपाय (affirmative action) के रूप में मान्यता देता है। अनुच्छेद 15(4), 16(4) और 335 के तहत अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को शिक्षा, नौकरियों और पदोन्नति में आरक्षण प्रदान किया गया है। परंतु समय के साथ यह प्रश्न उभर कर सामने आया है कि क्या इन समुदायों के भीतर भी एक ऐसा आर्थिक-सामाजिक रूप से उन्नत वर्ग विकसित हो चुका है, जो आरक्षण के वास्तविक उद्देश्य से परे है और जिसके कारण अत्यंत वंचित उप-जातियाँ पीछे रह जा रही हैं? नवंबर 2025 में मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गावई—जो स्वयं एक अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं—ने खुलकर कहा कि एससी/एसटी आरक्षण में भी ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर करना चाहिए ताकि लाभ वास्तविक रूप से वंचित वर्गों तक पहुँच सके। यह टिप्पणी उस बड़े संवैधानिक विमर्श को नई दिशा देती है, जिसकी शुरुआत सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के उप-व...