अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
संयुक्त राष्ट्र महासचिव चुनाव 2026: प्रक्रिया, शक्ति-संतुलन और वैश्विक शासन की नई दिशाएँ (अकादमिक विश्लेषण, नवम्बर 2025) संयुक्त राष्ट्र अपने 79वें वर्ष में निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। नवम्बर 2025 में सुरक्षा परिषद और महासभा अध्यक्ष द्वारा जारी संयुक्त पत्र के साथ 2026 के महासचिव चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वर्तमान महासचिव एंतोनियो गुटेरेश 31 दिसम्बर 2026 को अपने दूसरे कार्यकाल के साथ पद छोड़ेंगे, और उनके उत्तराधिकारी का चयन केवल प्रशासनिक घटना नहीं होगा—यह वैश्विक शासन की प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के भविष्य की दिशा तय करेगा। 1. चयन प्रक्रिया: पारदर्शिता का उभरता मॉडल 2016 के सुधारों के बाद महासचिव चयन ने पहली बार व्यापक सार्वजनिकता और जवाबदेही हासिल की थी। 2026 की प्रक्रिया उन मानकों को और विस्तृत रूप में दोहराने वाली है। संकल्प 70/305 (2016) और 76/264 (2022) के तहत: सभी उम्मीदवारों को टाउन-हॉल शैली की सार्वजनिक सुनवाई में स्वयं को प्रस्तुत करना होगा। उनका विजन स्टेटमेंट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। सिविल सोसाइटी संगठनों व विशेषज्ञ समूहों ...