अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
2025 तंजानिया राष्ट्रपति चुनाव: भारी जीत, विवादित वैधता और तानाशाही सुदृढ़ीकरण का भूत सारांश 25 अक्टूबर 2025 को तंजानिया की राष्ट्रीय चुनाव आयोग (NEC) ने मौजूदा राष्ट्रपति सामिया सुलुहु हसन को सातवें बहुदलीय राष्ट्रपति चुनाव में 97.2% वैध मतों के साथ विजेता घोषित किया। मुख्य विपक्षी नेता तुंदु लिस्सू और फ्रीमन म्बोवे (चाडेमा) को मतदान से कुछ सप्ताह पहले प्रक्रियात्मक कारणों से अयोग्य ठहराया गया, जिससे चुनाव एकतरफा बन गया। यह परिणाम, जो पूर्व राष्ट्रपति जॉन मागुफुली के निधन (2021) के बाद अब तक का सबसे विवादास्पद माना जा रहा है, देशभर में विरोध प्रदर्शनों की लहर लेकर आया। यह लेख तंजानिया के चुनावी तंत्र, विपक्ष के बहिष्कार, न्यायपालिका की भूमिका, बढ़ते प्रदर्शनों और लोकतांत्रिक पतन के व्यापक निहितार्थों का विश्लेषण करता है। 1. चुनावी तंत्र और “97%” का रहस्य तंजानिया में राष्ट्रपति चुनाव First-Past-The-Post प्रणाली से होते हैं, यानी जो उम्मीदवार सबसे अधिक मत प्राप्त करता है, वही विजेता होता है। NEC के अनुसार मतदान प्रतिशत 67% रहा — जो 2020 के 71% से थोड़ा कम है, लेकिन क्ष...