अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
पुतिन का भारत इंटरव्यू: विश्व राजनीति के बदलते समीकरणों में एक नया संकेत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इन दिनों भारत दौरे पर हैं। दिल्ली पहुंचते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाक़ात सिर्फ़ औपचारिकता नहीं, बल्कि दो पुराने साझेदारों के बीच बढ़ते विश्वास और नई वैश्विक राजनीति की पृष्ठभूमि में उभरते साझेदारी मॉडल का प्रतीक है। भारत पहुंचने से पहले पुतिन ने एक विस्तृत बातचीत में भारत–रूस संबंधों, वैश्विक परिस्थिति, ऊर्जा नीति, रक्षा सहयोग, अमेरिका और यूक्रेन संघर्ष जैसे बड़े विषयों पर खुलकर अपने विचार रखे। उनकी बातचीत आज की बदलती विश्व-व्यवस्था पर एक अवधारणात्मक दृष्टि प्रस्तुत करती है। भारत–रूस संबंध: इतिहास से आधुनिक रणनीति तक पुतिन के अनुसार भारत और रूस के रिश्ते केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि समय की कसौटी पर खरे उतरने वाले ऐतिहासिक संबंध हैं। भारत की आज़ादी से लेकर आज 77 वर्षों में हुए परिवर्तन का वे विशेष उल्लेख करते हैं। वे कहते हैं: भारत ने कम समय में असाधारण प्रगति की है। औसत जीवन-आयु दोगुनी से अधिक हो चुकी ह...