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कुआलालंपुर समझौता: अमेरिकी कूटनीति और 2025 थाई-कंबोडिया सीमा संकट का समाधान परिचय दक्षिण-पूर्व एशिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य सदियों से सीमाई अस्पष्टताओं और औपनिवेशिक विरासतों के कारण जटिल रहा है। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच प्रीह विहार मंदिर परिसर को लेकर चला आ रहा विवाद इसी विरासत का परिणाम है। 2025 में यह पुराना तनाव एक गंभीर सीमा संघर्ष में बदल गया, जिसने न केवल दोनों देशों को बल्कि समूचे आसियान (ASEAN) क्षेत्र को अस्थिर कर दिया। अंततः अक्टूबर 2025 में मलेशिया की राजधानी में हुए “कुआलालंपुर समझौते” ने इस संकट का शांतिपूर्ण समाधान प्रस्तुत किया। इस समझौते में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की निर्णायक भूमिका रही, जिन्होंने न केवल मध्यस्थता की बल्कि अपने पारंपरिक ‘आर्थिक दबाव कूटनीति’ का उपयोग कर दोनों पक्षों को युद्धविराम के लिए प्रेरित किया। संकट की पृष्ठभूमि: औपनिवेशिक मानचित्रों की अस्पष्टता थाई-कंबोडिया सीमा विवाद की जड़ें 1907 की फ्रांको-सियामी संधि तक जाती हैं, जब फ्रांसीसी उपनिवेश शासन के दौरान सीमाओं को निर्धारित तो किया गया, परंतु प्राचीन खमेर मंदिरों — विशेष रूप...