हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
जाति जनगणना: सामाजिक न्याय से डेटा न्याय की ओर प्रस्तावना भारतीय लोकतंत्र की जड़ों में यदि कोई तत्व सबसे गहराई तक व्याप्त है, तो वह है जाति । यह केवल सामाजिक पहचान का नहीं, बल्कि आर्थिक अवसरों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संसाधनों की पहुंच का निर्धारक रही है। स्वतंत्र भारत में सामाजिक न्याय की अवधारणा ने समानता और समावेशन का लक्ष्य रखा, परंतु यह लक्ष्य अब भी अधूरा है। मंडल आयोग (1980) की सिफारिशों के बाद आरक्षण नीति ने वंचित वर्गों को सशक्त किया, किंतु इसकी आधारशिला 1931 की जनगणना पर टिकी रही — यानी ऐसे डेटा पर जो आज की सामाजिक वास्तविकता से मेल नहीं खाता। इसी संदर्भ में प्रख्यात विचारक आनंद तेलतुंबड़े ने अपनी नवीनतम पुस्तक Caste con census में यह तर्क रखा कि अब समय आ गया है जब भारत को सामाजिक न्याय से आगे बढ़कर "डेटा न्याय" की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। द हिंदू के साथ बातचीत में उन्होंने कहा — “Caste census is not social justice, but data justice.” यह कथन मात्र वैचारिक नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के भविष्य की दिशा तय करने वाला बिंदु है। सामाजिक न्याय से डेटा न्या...