अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
The Mysterious Death of Zubeen Garg: Tragedy of Assam’s Cultural Icon and Questions Over Administrative Negligence
जुबिन गर्ग: असम की आत्मा की आवाज़, जिसकी मौत ने कई सवाल छोड़े पूर्वोत्तर भारत के सांस्कृतिक हृदय में जब कोई सुर टूटता है, तो वह केवल एक आवाज़ नहीं जाती—वह एक युग की भावनाओं को भी मौन कर देता है। जुबिन गर्ग की अचानक मृत्यु ने असम ही नहीं, पूरे उत्तर-पूर्व को भीतर तक झकझोर दिया है। “या अली” की गूंज, “मोमोर चोखोटे” की मिठास और असमिया अस्मिता के प्रतीक उस स्वर के साथ जाने वाला यह अध्याय अब रहस्यमय सवालों से घिरा हुआ है। 🎵 संगीत से सामाजिक चेतना तक का सफर 1972 में मेघालय के तुरा में जन्मे जुबिन गर्ग ने बाल्यावस्था में ही संगीत को जीवन बना लिया था। असमिया संगीत में उन्होंने जो आत्मा फूंकी, वह केवल कला नहीं थी—वह असम की सांस्कृतिक चेतना थी। हिंदी, असमिया, बंगाली, नेपाली, तमिल—हर भाषा में उन्होंने अपनी रचनात्मक पहचान छोड़ी। लेकिन उन्हें असम का ‘जननायक’ उस समय कहा गया जब उन्होंने अपने गीतों और मंचों से सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अधिकारों की आवाज़ उठाई। 2019 के नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ असम में जब जनता सड़कों पर थी, तब जुबिन गर्ग ने भी अपने संगीत से विरोध को स्वर...