भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
जिमी लाई: हॉन्ग कॉन्ग की प्रेस स्वतंत्रता और लोकतंत्र की लड़ाई का प्रतीक 9 फरवरी 2026 को हॉन्ग कॉन्ग के इतिहास में एक ऐसा निर्णय दर्ज हुआ, जिसने शहर की आत्मा, उसकी प्रेस स्वतंत्रता और “एक देश, दो प्रणाली” की अवधारणा पर गहरे प्रश्नचिह्न लगा दिए। हॉन्ग कॉन्ग हाई कोर्ट ने 78 वर्षीय मीडिया उद्यमी, लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता और बीजिंग के मुखर आलोचक जिमी लाई (लाई ची-यिंग) को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSL) के तहत 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह सजा न केवल NSL के तहत अब तक की सबसे लंबी सजा है, बल्कि लाई की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए इसे व्यापक रूप से व्यावहारिक आजीवन कारावास माना जा रहा है। यह फैसला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। यह हॉन्ग कॉन्ग के उस दौर के अंत का प्रतीक है, जहाँ स्वतंत्र पत्रकारिता, राजनीतिक असहमति और नागरिक स्वतंत्रताएँ शहर की पहचान हुआ करती थीं। एक शरणार्थी से मीडिया सम्राट तक: जिमी लाई की यात्रा जिमी लाई की कहानी स्वयं में संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। मुख्यभूमि चीन में जन्मे लाई किशोरावस्था में ही कम्युनिस्ट शासन से भागकर हॉन्ग कॉन्ग ...