India–US Pax Silica Declaration 2026: AI, Semiconductor Security and Global Tech Resilience Explained
India–US Pax Silica Declaration: एआई-आधारित आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक तकनीकी लचीलापन की नई दिशा
प्रस्तावना
21वीं सदी की वैश्विक राजनीति अब केवल सैन्य शक्ति या पारंपरिक कूटनीति तक सीमित नहीं रही है; यह तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, डेटा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं पर आधारित नई भू-राजनीति में रूपांतरित हो चुकी है। ऐसे समय में 20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित Global AI Impact Summit के दौरान भारत और अमेरिका के बीच संपन्न Pax Silica Declaration एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभरी है।
“Pax Silica” — जिसका आशय है ‘सिलिकॉन के माध्यम से शांति’ — केवल एक तकनीकी साझेदारी नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा, विश्वसनीय एआई प्रणाली और आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्गठन की व्यापक रणनीति है। यह घोषणा इस विचार पर आधारित है कि भविष्य की समृद्धि और सुरक्षा, भरोसेमंद तकनीकी साझेदारियों और विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर करेगी।
Pax Silica की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
1. उत्पत्ति और रणनीतिक संदर्भ
Pax Silica की अवधारणा अमेरिकी विदेश विभाग की उन पहलों से विकसित हुई है जिनका लक्ष्य असुरक्षित और एकाधिकारवादी आपूर्ति श्रृंखलाओं से निर्भरता कम करना है। कोविड-19 महामारी, अमेरिका–चीन तकनीकी तनाव और सेमीकंडक्टर संकट ने यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कुछ सीमित स्रोतों पर अत्यधिक निर्भर है।
सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम, दुर्लभ मृदा तत्व) में चीन का प्रभुत्व वैश्विक चिंता का विषय रहा है। Pax Silica इसी संदर्भ में “विश्वसनीय साझेदारी” के माध्यम से एक नए आर्थिक सुरक्षा ढांचे की स्थापना का प्रयास है।
2. प्रमुख उद्देश्य
(क) जबरन निर्भरता में कमी
घोषणा का मुख्य उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण कर आर्थिक दबाव की राजनीति को निष्प्रभावी बनाना है।
(ख) विश्वसनीय एआई का विकास
एआई को दीर्घकालिक समृद्धि का आधार मानते हुए नैतिक, पारदर्शी और सुरक्षित एआई प्रणालियों के विकास पर जोर दिया गया है।
(ग) तकनीकी सहयोग और नवाचार
साझेदार देश अनुसंधान, निवेश और उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे, जिससे प्रतिस्पर्धी लेकिन संतुलित तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सके।
सहभागी देश और वैश्विक आयाम
इस घोषणा में अमेरिका और भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, इज़राइल, सिंगापुर, यूएई, कतर और ग्रीस जैसे देश शामिल हैं। कनाडा, यूरोपीय संघ, OECD और ताइवान जैसे प्रतिभागियों की उपस्थिति इस पहल के व्यापक वैश्विक समर्थन को दर्शाती है।
यह समूह केवल आर्थिक हितों का गठबंधन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और मुक्त बाजार सिद्धांतों पर आधारित तकनीकी व्यवस्था को सुदृढ़ करने का प्रयास है।
भारत की भूमिका और रणनीतिक महत्व
भारत का Pax Silica में शामिल होना कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है:
1. सामरिक दृष्टि से
भारत पहले से ही Quadrilateral Security Dialogue (QUAD) और US-India Initiative on Critical and Emerging Technology जैसे मंचों के माध्यम से अमेरिका के साथ उन्नत तकनीकी सहयोग बढ़ा रहा है। Pax Silica इस सहयोग को औपचारिक और संस्थागत आधार देता है।
यह पहल भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तकनीकी संतुलन स्थापित करने की क्षमता प्रदान करती है, जिससे वह चीन के प्रभाव को संतुलित कर सके।
2. आर्थिक परिप्रेक्ष्य
भारत ने India Semiconductor Mission के माध्यम से घरेलू चिप निर्माण को प्रोत्साहन दिया है। Pax Silica के तहत निवेश, तकनीकी हस्तांतरण और अनुसंधान सहयोग से भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग 2030 तक उल्लेखनीय विस्तार कर सकता है।
एआई आधारित नवाचार—जैसे स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और रक्षा—भारत की GDP वृद्धि को गति दे सकते हैं और लाखों रोजगार सृजित कर सकते हैं।
3. एआई नैतिकता और समावेशन
भारत ने 19 फरवरी 2026 को “New Delhi Frontier AI Commitments” भी प्रस्तुत किए, जो समावेशी और बहुभाषीय एआई के विकास पर केंद्रित हैं। Pax Silica की विश्वसनीयता की अवधारणा के साथ यह पहल मिलकर “मानव-केंद्रित एआई” के वैश्विक मानकों को बढ़ावा दे सकती है।
डिजिटल डेटा संरक्षण कानूनों और पारदर्शी शासन ढांचे के माध्यम से भारत नैतिक एआई के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
संभावित चुनौतियाँ
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सीमाएँ – उन्नत चिप डिजाइन और रक्षा-संबंधी तकनीकों के हस्तांतरण में प्रतिबंध बाधा बन सकते हैं।
- बौद्धिक संपदा विवाद – बहुपक्षीय सहयोग में IP अधिकारों की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण होगी।
- ऊर्जा और अवसंरचना – एआई डेटा सेंटरों के लिए भारी ऊर्जा आवश्यकता भारत के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर सकती है।
- भूराजनीतिक संतुलन – चीन के साथ आर्थिक संबंधों को संतुलित रखते हुए इस पहल में सक्रिय रहना भारत के लिए कूटनीतिक परीक्षा होगी।
व्यापक वैश्विक प्रभाव
Pax Silica Declaration 21वीं सदी के “तकनीकी कूटनीति” के नए युग का संकेत है। यह पहल न केवल आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक एआई शासन के लिए एक बहुपक्षीय ढांचा भी तैयार करती है।
यदि इस पहल का विस्तार और अधिक देशों तक होता है, तो यह विश्व व्यवस्था में तकनीकी लोकतंत्र और आर्थिक संतुलन का नया मानक स्थापित कर सकती है।
निष्कर्ष
Pax Silica Declaration भारत और अमेरिका के बीच उभरती तकनीकी साझेदारी का प्रतीक है, जो एआई, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत के लिए यह अवसर है कि वह तकनीकी उपभोक्ता से तकनीकी सह-निर्माता बने और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को एआई शासन में प्रतिनिधित्व दिलाए।
एक बहुध्रुवीय विश्व में, जहां तकनीक शक्ति का नया आधार बन चुकी है, Pax Silica जैसी पहलें यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि एआई और डिजिटल नवाचार मानवता के साझा हितों की सेवा करें, न कि विभाजन और प्रभुत्व के साधन बनें।
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