अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते और चीन की सैन्य मंशा: 2026 की दहलीज पर शक्ति-संतुलन का नया परीक्षण प्रस्तावना नए वर्ष 2026 की शुरुआत ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और सामरिक अनिश्चितता के बीच हुई। ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते ने अपने नववर्षीय संबोधन में जिस दृढ़ स्वर में राष्ट्रीय सार्वभौमिकता की रक्षा और रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता दोहराई, वह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि बदलती एशियाई भू-राजनीति का संकेतक भी है। यह वक्तव्य ऐसे समय आया है जब चीन ने ताइवान के चारों ओर व्यापक सैन्य अभ्यास कर अपनी सैन्य शक्ति-प्रदर्शन रणनीति को एक बार फिर रेखांकित किया है। चीन का सैन्य अभ्यास: शक्ति-संदेश या दबाव-रणनीति? दिसंबर 2025 के अंत में आयोजित “जस्टिस मिशन 2025” केवल एक नियमित सैन्य अभ्यास नहीं था। यह अभ्यास— नौसेना, वायुसेना, रॉकेट फोर्स और कोस्ट गार्ड तटरेखा के अत्यंत निकट लाइव-फायर ड्रिल बहु-डोमेन समन्वित ऑपरेशन —जैसे तत्वों के कारण विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। चीन ने इसे “ताइवान स्वतंत्रता समर्थक ताकतों और बाहरी हस्तक्षेप को चेतावनी” करार दिया, वहीं त...