हांगकांग–चीन संबंध और जिमी लाई मामला
राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रेस स्वतंत्रता और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य का समग्र अकादमिक विश्लेषण
भूमिका
हांगकांग आज केवल एक वैश्विक वित्तीय केंद्र नहीं, बल्कि इतिहास, राजनीति, कानून और मानवाधिकारों के जटिल संगम का प्रतीक बन चुका है। इसकी वर्तमान स्थिति को समझने के लिए उसके औपनिवेशिक अतीत, “एक देश–दो प्रणाली” की अवधारणा और हाल के वर्षों में लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की भूमिका को समग्रता में देखना आवश्यक है। जिमी लाई का मामला इसी ऐतिहासिक और राजनीतिक परिवर्तन का जीवंत उदाहरण है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, न्यायिक प्रक्रिया और प्रेस स्वतंत्रता आमने-सामने खड़ी दिखाई देती हैं।
1. हांगकांग–चीन संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
(क) चीन का पारंपरिक हिस्सा
हांगकांग प्राचीन काल से चीनी साम्राज्यों का हिस्सा रहा। यह मुख्यतः मछली पकड़ने और स्थानीय व्यापार पर आधारित क्षेत्र था। मिंग और चिंग राजवंशों के समय इसे दक्षिण चीन का सामान्य तटीय इलाका माना जाता था।
(ख) अफीम युद्ध और ब्रिटिश उपनिवेश
19वीं सदी में अफीम युद्धों ने हांगकांग के भाग्य को बदल दिया।
- 1842 की नानजिंग संधि के तहत हांगकांग द्वीप ब्रिटेन को सौंपा गया।
- 1860 की बीजिंग संधि से कोलून का दक्षिणी भाग ब्रिटेन के पास गया।
- 1898 में न्यू टेरिटरीज़ को 99 वर्षों के लिए पट्टे पर दिया गया।
इस प्रकार हांगकांग तीन हिस्सों में ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया।
(ग) ब्रिटिश शासन के दौरान विकास
ब्रिटिश शासन में हांगकांग:
- मुक्त बाजार आधारित अर्थव्यवस्था,
- स्वतंत्र न्यायपालिका,
- प्रेस की स्वतंत्रता और
- वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में विकसित हुआ।
1949 में चीन में साम्यवादी क्रांति के बाद मुख्य भूमि समाजवादी बन गई, लेकिन हांगकांग पूंजीवादी ही रहा। यहीं से “दो प्रणालियों” की वास्तविक दूरी बनी।
2. 1997 और “एक देश–दो प्रणाली”
न्यू टेरिटरीज़ का पट्टा 1997 में समाप्त होना था। इसके कारण ब्रिटेन और चीन के बीच बातचीत हुई और 1984 में चीन–ब्रिटेन संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर हुए।
इसके तहत:
- 1 जुलाई 1997 को हांगकांग चीन को सौंपा गया।
- “एक देश–दो प्रणाली” लागू हुई।
- हांगकांग को 50 वर्षों (2047 तक) तक उच्च स्वायत्तता, अलग कानूनी व्यवस्था और नागरिक स्वतंत्रताओं की गारंटी दी गई।
- रक्षा और विदेश नीति चीन के पास रही।
शुरुआती वर्षों में यह व्यवस्था अपेक्षाकृत संतुलित दिखी और हांगकांग एशिया का प्रमुख वित्तीय केंद्र बना रहा।
3. लोकतांत्रिक आकांक्षाएं और बढ़ता तनाव
समय के साथ हांगकांग में लोकतांत्रिक मांगें तेज होती गईं।
- 2014 का “अम्ब्रेला आंदोलन” – सार्वभौमिक मताधिकार की मांग।
- 2019 का प्रत्यर्पण कानून विरोध – बड़े पैमाने पर जन आंदोलन।
इन आंदोलनों ने बीजिंग को यह संकेत दिया कि हांगकांग में राजनीतिक असंतोष बढ़ रहा है।
4. राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और नया युग
2020 में चीन ने हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSL) लागू किया। इसके अंतर्गत:
- देशद्रोह, अलगाववाद, आतंकवाद और विदेशी हस्तक्षेप जैसे अपराधों को कठोर दंड के दायरे में लाया गया।
- विशेष न्यायाधीशों और जूरी रहित सुनवाई का प्रावधान किया गया।
सरकार के अनुसार यह कानून स्थिरता और व्यवस्था बहाल करने के लिए आवश्यक था, लेकिन आलोचकों के अनुसार यह “एक देश–दो प्रणाली” की आत्मा के विपरीत था और इससे हांगकांग की स्वायत्तता कमजोर हुई।
5. जिमी लाई मामला: पृष्ठभूमि
जिमी लाई हांगकांग के प्रसिद्ध मीडिया उद्यमी और लोकतंत्र समर्थक नेता हैं। वे “एप्पल डेली” अखबार के संस्थापक रहे, जो 2019 के लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों की खुलकर रिपोर्टिंग करता था।
उन पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने:
- विदेशी सरकारों से चीन और हांगकांग पर प्रतिबंध लगाने की अपील की,
- अपने अखबार के माध्यम से “द्रोहपूर्ण सामग्री” प्रकाशित की।
दिसंबर 2025 में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दोषी ठहराया गया और जनवरी 2026 में उनकी दया याचना (मिटिगेशन प्लिया) की सुनवाई पूरी हुई।
6. दया याचना और न्यायिक बहस
मिटिगेशन सुनवाई का उद्देश्य दंड तय करते समय दोषी की व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखना होता है।
जिमी लाई के वकीलों ने तर्क दिए कि:
- वे 78 वर्ष के हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।
- वे लगभग 1,800 दिनों से एकांत कारावास में हैं, जो मानवाधिकार उल्लंघन जैसा है।
- उन्होंने पत्रकारिता और समाज में सकारात्मक योगदान दिया है।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि:
- राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अपराधों में व्यक्तिगत परिस्थितियों को सीमित महत्व दिया जाना चाहिए।
- दंड कठोर और निवारक होना चाहिए।
अब अदालत उनकी सजा तय करने की प्रक्रिया में है, जो दस वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक हो सकती है।
7. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और मानवाधिकार
जिमी लाई का मामला वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बना।
- अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने इसकी निंदा की।
- संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
चीन इसे आंतरिक मामला बताता है, जबकि पश्चिमी देश इसे 1984 की चीन–ब्रिटेन संयुक्त घोषणा के उल्लंघन के रूप में देखते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि कूटनीतिक भी है।
8. प्रेस स्वतंत्रता पर प्रभाव
2021 में “एप्पल डेली” का बंद होना और जिमी लाई का मुकदमा हांगकांग में प्रेस स्वतंत्रता के पतन का प्रतीक बन गया।
- अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में हांगकांग की रैंकिंग गिरी है।
- कई पत्रकारों ने स्व-सेंसरशिप अपनाई है।
इससे लोकतांत्रिक संवाद और आलोचनात्मक पत्रकारिता सीमित होती जा रही है।
निष्कर्ष
हांगकांग–चीन संबंधों की यात्रा तीन चरणों में देखी जा सकती है:
- चीनी क्षेत्र से ब्रिटिश उपनिवेश तक।
- उपनिवेश से “एक देश–दो प्रणाली” तक।
- स्वायत्तता से केंद्रीकरण की ओर।
जिमी लाई का मामला इस तीसरे चरण का प्रतीक है, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित किया जा रहा है। यह मामला यह प्रश्न उठाता है कि सुरक्षा और स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। हांगकांग का भविष्य इसी संतुलन की सफलता या विफलता पर निर्भर करेगा, और यह वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र, मानवाधिकार और संप्रभुता की बहस को भी दिशा देगा।
With Reuters Inputs
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