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End of Hereditary Peers in the House of Lords: A Historic Reform in British Parliamentary Democracy

हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...

PM Narendra Modi’s Constitution Day Message: Duty-Oriented Citizenship and India’s Journey Toward Viksit Bharat

संविधान दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश: कर्तव्य-उन्मुख नागरिकता और विकसित भारत की दिशा सारांश (Abstract) भारतीय संविधान दिवस (26 नवम्बर) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया संदेश कर्तव्यों-उन्मुख नागरिकता (duty-based citizenship) पर गहरा बल देता है। यह लेख इस संदेश का विश्लेषण भारत में संवैधानिक राष्ट्रवाद, नागरिक दायित्व और शासन-संस्कृति के बदलते विमर्शों के संदर्भ में करता है। अध्ययन यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री का कर्तव्य-केन्द्रित आग्रह भारतीय राजनीतिक विचार, विशेष रूप से गांधी, अंबेडकर और आधुनिक विकास-राज्य की अवधारणा, से कैसे संवाद स्थापित करता है और “विकसित भारत” के व्यापक नैरेटिव में किस प्रकार समाहित होता है। 1. भूमिका (Introduction) संविधान दिवस 2025 पर प्रधानमंत्री का संदेश केवल एक औपचारिक वक्तव्य नहीं था, बल्कि समकालीन भारतीय शासन-दर्शन में कर्तव्यों की पुनर्परिभाषा का महत्वपूर्ण प्रयास भी था। जहाँ भारत का राजनीतिक विमर्श लंबे समय से अधिकार-केंद्रित रहा है, वहीं प्रधानमंत्री का आग्रह यह संकेत देता है कि अधिकार और कर्तव्य दोनों एक-दूसरे को पूरक करत...

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