अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
राष्ट्रपति ट्रम्प और पुतिन की बुडापेस्ट में प्रस्तावित मुलाकात: यूक्रेन युद्ध समाप्ति की दिशा में संभावित मोड़ भूमिका फरवरी 2022 से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध ने विश्व राजनीति को गहराई तक प्रभावित किया है। इस संघर्ष ने न केवल यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था को पुनर्परिभाषित किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा, खाद्य और रक्षा संतुलन को भी अस्थिर कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बुडापेस्ट में मुलाकात की घोषणा को एक संभावित टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल उस समय आई है जब ट्रम्प, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से वाशिंगटन में मिलने वाले हैं — जो अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों की आपूर्ति की मांग कर रहे हैं। यह लेख इस प्रस्तावित कूटनीतिक प्रयास के संदर्भ, भू-राजनीतिक प्रभावों, और संभावित परिणामों की विश्लेषणात्मक समीक्षा करता है। 1. पृष्ठभूमि: युद्ध और वैश्विक अस्थिरता रूस द्वारा फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से यूरोप में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य संकट जारी है। लाखों नागरिक विस्थापित हुए, बुनियादी ...