अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
भारत का दुग्ध क्षेत्र: विकास, चुनौतियां और भविष्य की दिशा भारत आज दूध उत्पादन में विश्व का अग्रणी देश है। जो देश कभी दूध की कमी से जूझता था, वही अब वैश्विक दुग्ध उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत योगदान देता है। यह उपलब्धि केवल उत्पादन की नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की कहानी भी है। दुग्ध क्षेत्र ने करोड़ों किसानों—विशेषकर महिलाओं—को आर्थिक आत्मनिर्भरता और पोषण सुरक्षा से जोड़ा है। 1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास का सफर भारत की दुग्ध क्रांति की नींव “ऑपरेशन फ्लड” (1970) से पड़ी, जिसे ‘सफेद क्रांति’ के नाम से जाना जाता है। डॉ. वर्गीज कुरियन की अगुवाई में अमूल मॉडल पर आधारित इस अभियान ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया जीवन दिया। 2014-15 में भारत का दूध उत्पादन 146.3 मिलियन टन था, जो 2023-24 में बढ़कर 239.3 मिलियन टन हो गया — लगभग 63.5 प्रतिशत की वृद्धि। इस अवधि में वार्षिक औसत वृद्धि दर 5.69 प्रतिशत रही, जबकि विश्व औसत मात्र 2 प्रतिशत है। 2024-25 के लिए अनुमानित उत्पादन 254 मिलियन टन से अधिक है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता भी तेजी से बढ़ी है— 2014-15 के 319 ग्...