हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
बांग्लादेश में पुनः उबाल: भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है भूमिका दक्षिण एशिया की राजनीति में बांग्लादेश एक ऐसा देश रहा है, जिसकी आंतरिक स्थिरता का सीधा प्रभाव भारत की सुरक्षा, कूटनीति और क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ता है। दिसंबर 2025 में बांग्लादेश में उभरी नई राजनीतिक अशांति केवल एक छात्र नेता की हत्या तक सीमित घटना नहीं है, बल्कि यह उस गहरे संरचनात्मक संकट का प्रतीक है, जो 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से लगातार गहराता जा रहा है। छात्र आंदोलनों, हिंसक प्रदर्शनों, मीडिया संस्थानों पर हमलों और भारत-विरोधी नारों ने इस संकट को अंतरराष्ट्रीय ध्यान का विषय बना दिया है। फरवरी 2026 में प्रस्तावित चुनावों से ठीक पहले यह स्थिति भारत के लिए विशेष रूप से चिंता का कारण है। वर्तमान अशांति की पृष्ठभूमि बांग्लादेश में ताजा हिंसा का तत्काल कारण 32 वर्षीय छात्र नेता शरीफ ओसमान हादी की मृत्यु बनी। हादी 2024 के उस छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन का प्रमुख चेहरा था, जो आरक्षण (कोटा सुधार) की मांग से शुरू होकर व्यापक राजनीतिक विद्रोह में बदल गया था। 12 दिसंबर 2025 को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान उ...