धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट के फैसले, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और सामाजिक प्रभावों का गहन विश्लेषण धार की ऐतिहासिक भोजशाला पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का निर्णय केवल एक धार्मिक स्थल से जुड़ा कानूनी फैसला नहीं है, बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक चेतना, न्यायिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन की गंभीर परीक्षा भी है। सदियों से विवादों, दावों और भावनात्मक बहसों के केंद्र में रही भोजशाला अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां न्यायपालिका ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। इस फैसले ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम समाधान का मार्ग अदालतों और संविधान से होकर ही गुजरता है। भोजशाला का इतिहास केवल एक इमारत का इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जिसमें ज्ञान, शिक्षा और आस्था का गहरा समन्वय दिखाई देता है। माना जाता है कि परमार वंश के महान राजा भोज के काल में यह स्थान विद्या और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र था। समय के साथ राजनीतिक और ऐतिहासिक परिवर्तनों ने इसकी पहचान को विवादों में बदल...
Return of the G-2 Power Axis: How the U.S.–China Rapprochement Could Marginalize India Geopolitically
जी–2 द्वंद्वाधिकार की वापसी: अमेरिका–चीन निकटता भारत को भू–राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेल सकती है परिचय विश्व राजनीति में कभी–कभी इतिहास स्वयं को दोहराता है, बस परिस्थितियाँ और चेहरे बदल जाते हैं। अक्टूबर 2025 में दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित एशिया–प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अप्रत्याशित ‘सद्भावनापूर्ण’ बैठक ने उसी ऐतिहासिक पुनरावृत्ति का संकेत दिया। ट्रम्प द्वारा चीन को “कार्यात्मक समान” (Functional Equal) बताना केवल शब्दों का चयन नहीं था—यह वैश्विक शक्ति–संतुलन में एक संरचनात्मक मोड़ था। एक दशक तक चले शीत–संघर्ष जैसे अमेरिकी–चीनी तनावों के बाद, इस “जी–2” (G–2) अवधारणा की वापसी ने वैश्विक भू–राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। यह प्रश्न अब और अधिक प्रासंगिक हो गया है—क्या यह द्विपक्षीय निकटता विश्व में शक्ति–वितरण को पुनः दो ध्रुवों में बाँट देगी? और यदि ऐसा होता है, तो भारत जैसी ‘मध्यम शक्ति’ (Middle Power) के लिए इसका अर्थ क्या होगा? जी–2 की अवधारणा: एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि “जी–2” का विचार नया न...