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जनरल एम.एम. नरवणे की आत्मकथा विवाद: सिविल–मिलिट्री संबंधों और भारतीय लोकतंत्र की कसौटी फरवरी 2026 में भारत की संसद से शुरू हुआ पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा “Four Stars of Destiny” से जुड़ा विवाद जल्द ही एक साधारण राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर सिविल–मिलिट्री संबंधों, राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे गहरे संवैधानिक प्रश्नों का प्रतीक बन गया। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि जब सेना, राजनीति और सार्वजनिक विमर्श एक-दूसरे से टकराते हैं, तो लोकतंत्र की संस्थागत परिपक्वता की वास्तविक परीक्षा होती है। विवाद की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम जनरल नरवणे (सेना प्रमुख: 2019–2022) की यह आत्मकथा उनके सैन्य जीवन के अनुभवों पर आधारित बताई जाती है, जिसमें 2020 का गलवान घाटी संघर्ष, चीन के साथ सीमा तनाव, अग्निपथ योजना जैसी सैन्य सुधार नीतियाँ और संकटकाल में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका का उल्लेख कथित रूप से किया गया है। चूँकि भारत में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों पर भी Official Secrets Act, 1923 और रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देश लागू ...