AI Impact Summit 2026: How India Is Shaping the Future of Global AI Leadership from the Global South
एआई इम्पैक्ट समिट 2026: भारत अब केवल भागीदार नहीं, वैश्विक शिल्पकार
दुनिया की सबसे बड़ी एआई नीति और नवाचार वार्ता पहली बार ग्लोबल साउथ के केंद्र में आयोजित हो रही है—और इस बार स्वर पूरी तरह बदला हुआ है। अब तक एआई समिट्स में चर्चा का केंद्र “विनाशकारी जोखिम”, “नियामक जाल” और “तकनीकी प्रभुत्व” रहा है। लेकिन एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भारत ने एजेंडा ही पलट दिया है।
इस बार थीम है—जन, ग्रह और प्रगति। संदेश साफ है: एआई सिर्फ नियंत्रण की वस्तु नहीं, समाधान का औज़ार है।
बातचीत से समाधान की ओर: भारत की वैचारिक शिफ्ट
समिट में नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग-नेताओं ने यह स्वीकार किया कि केवल जोखिम-केन्द्रित विमर्श से एआई का सामाजिक लाभ सीमित रह जाता है। भारत का दृष्टिकोण व्यावहारिक है—एआई को जमीनी जरूरतों से जोड़ना। सचिव एस. कृष्णन के शब्दों में, “एआई अब सिर्फ बहस का विषय नहीं, डिलीवरी मैकेनिज़्म है।”
यह शिफ्ट भारत की दोहरी महत्वाकांक्षा को उजागर करती है—
- स्वयं एआई महाशक्ति बनना, और
- ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज बनकर एआई के वैश्विक भविष्य को आकार देना।
लोकतंत्रीकरण बनाम केवल नियमन
समिट की सबसे सशक्त उपलब्धि है—एआई का लोकतंत्रीकरण।
डेटा, कम्प्यूट, मॉडल, एल्गोरिदम और एप्लिकेशन—ये संसाधन अब कुछ चुनिंदा टेक-हब्स तक सीमित नहीं रहने चाहिए। इसी लक्ष्य के लिए सात थीमेटिक वर्किंग ग्रुप्स बनाए गए हैं, जिनमें ग्लोबल नॉर्थ और साउथ के प्रतिनिधि सह-अध्यक्ष हैं।
इन समूहों के प्रमुख कार्य:
- एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रहों को कम करना
- साझा कम्प्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना
- स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और आपदा-प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट समाधान तैयार करना
यह पहली बार है जब एआई पर वैश्विक चर्चा “कौन नियंत्रित करेगा” से आगे बढ़कर “कौन, कैसे और किसके लिए लाभ उठाएगा” पर केंद्रित हुई है।
अनदेखा तूफान: एआई-संचालित प्रेडिक्शन मार्केट्स
समिट का सबसे गहन और चिंताजनक विमर्श रहा—एआई-संचालित प्रेडिक्शन मार्केट्स।
जो कभी “ऑनलाइन जुआ” समझे जाते थे, वे आज रीयल-टाइम भविष्यवाणी के सबसे शक्तिशाली प्लेटफॉर्म बन चुके हैं।
इन बाजारों में यूक्रेन संघर्ष, अमेरिकी चुनाव, ताइवान संकट या भारत–पाकिस्तान तनाव जैसी घटनाओं पर करोड़ों डॉलर दांव पर लगे हैं। कीमतें अब सिर्फ बाजार संकेत नहीं, बल्कि सामूहिक विश्वास का बैरोमीटर हैं।
एआई ने इन बाजारों को अभूतपूर्व गति दी है। आधुनिक एआई सिस्टम एक साथ विश्लेषण कर सकते हैं—
- विधायी ड्राफ्ट्स
- नेताओं के भाषणों का टोन
- उपग्रह और शिपिंग डेटा
- सोशल मीडिया सेंटिमेंट
- यहां तक कि क्रिप्टो-फ्लो
परिणामस्वरूप, कई घटनाओं की संभावना घटित होने से पहले 70–80% सटीकता से अनुमानित की जा रही है। रणनीतिक विश्लेषक सी. राजा मोहन के अनुसार, ये बाजार अब घटनाओं का पूर्वानुमान ही नहीं, उनका निर्माण भी करने लगे हैं—एक खतरनाक सेल्फ-फुलफिलिंग प्रॉफेसी।
नई कूटनीति: रैडिकल ओपननेस का युग
जहां पारंपरिक कूटनीति गोपनीयता पर टिकी थी, वहीं नई एआई-आधारित कूटनीति रैडिकल ओपननेस की ओर बढ़ रही है।
आज निजी फर्में नेताओं और राज्यों के डिजिटल ट्विन्स बनाकर हजारों सिमुलेशन चला रही हैं—ऐसी क्षमताएं जो पहले केवल खुफिया एजेंसियों तक सीमित थीं।
भारत के लिए यह दोधारी तलवार है।
एक ओर, बेहतर पूर्व-चेतावनी और संकट-निवारण संभव है; दूसरी ओर, आंतरिक नीतिगत संकेतों का वैश्विक बाजारों में ट्रेड होना नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। गोपनीयता की पारंपरिक परिभाषा अब बदल रही है।
भारत का रणनीतिक रास्ता
इस बदलते परिदृश्य में भारत को दो मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ना होगा:
- विश्वस्तरीय एआई-आधारित पूर्वानुमान प्रणाली—जो केवल खतरे बताए नहीं, बल्कि उन्हें टालने में सक्षम हो।
- समावेशी और सुलभ एआई—ताकि किसान फसल-रोग पहचान सके, छात्र व्यक्तिगत सीख पा सके और डॉक्टर दूरदराज़ के मरीज का इलाज कर सके।
निष्कर्ष: निर्माता भारत
एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत को वह मंच देता है जहां वह सिर्फ प्रतिभागी नहीं, नियम-निर्माता बन सकता है।
19 फरवरी को जब इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो का उद्घाटन करेंगे, तो वह केवल एक प्रदर्शनी नहीं होगी—बल्कि नई वैश्विक डिजिटल व्यवस्था की नींव होगी।
यह व्यवस्था ऐसी होगी जहां एआई केवल अमीर देशों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सात अरब लोगों का सशक्तिकरण उपकरण बनेगा।
भारत अब एआई की दौड़ में पीछे नहीं चल रहा—
वह दौड़ का रास्ता स्वयं गढ़ रहा है।
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