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वैश्विक सहभागिता और राष्ट्रीय हित: भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक जिम्मेदारी का संतुलन परिचय दिसंबर 2025 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की जर्मनी यात्रा ने भारतीय राजनीति में एक नए विमर्श को जन्म दिया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने प्रोग्रेसिव अलायंस की बैठक में भाग लिया — एक ऐसा वैश्विक मंच जो प्रगतिशील, समाजवादी और सामाजिक-लोकतांत्रिक दलों को जोड़ता है। भाजपा ने इस भागीदारी की तीखी आलोचना करते हुए इसे “भारत-विरोधी वैश्विक नेटवर्क” से जुड़ाव के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि कांग्रेस का तर्क है कि यह लोकतांत्रिक संवाद और वैश्विक सहयोग की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है। यह विवाद केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि व्यापक प्रश्न खड़ा करता है — क्या विपक्ष की वैश्विक भागीदारी लोकतांत्रिक विमर्श को मजबूत करती है, या यह राष्ट्रीय हितों एवं राजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच टकराव को और गहरा करती है? अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विपक्ष की भूमिका: सहयोग या ध्रुवीकरण? अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मंच विपक्षी दलों को अपने दृष्टिकोण को विश्व समुदाय के सामने रखने का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे संवाद— वैश्विक अर्थव्...