अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति और नोबेल शांति पुरस्कार की शिकायत अंतरराष्ट्रीय संबंधों में व्यक्तिगत आक्रोश का एक नया उदाहरण भूमिका विदेश नीति सामान्यतः राष्ट्रीय हित, सामरिक गणनाओं और दीर्घकालिक रणनीतियों से संचालित होती है। लेकिन जब किसी राष्ट्राध्यक्ष की निजी महत्वाकांक्षाएँ, असंतोष और भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ इन निर्णयों को प्रभावित करने लगें, तब कूटनीति का स्वरूप ही बदल जाता है। जनवरी 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे को भेजा गया एक संदेश इसी प्रवृत्ति का प्रतीक बन गया। इसमें ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की अमेरिकी मांग को सीधे-सीधे नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने की अपनी व्यक्तिगत शिकायत से जोड़ दिया। यह घटना न केवल एक कूटनीतिक असहजता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि व्यक्तिगत आक्रोश किस तरह अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अस्थिर कर सकता है। घटना का परिप्रेक्ष्य ग्रीनलैंड लंबे समय से सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता रहा है। आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियाँ, खनिज संसाधनों की संभावना और सैन्य दृष्टि से इसकी उपयोगित...