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बांग्लादेश चुनाव 2026: लोकतंत्र की नई दिशा या पुरानी चुनौतियों का नया अध्याय? दक्षिण एशिया की राजनीति में बांग्लादेश एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव केवल 300-सदस्यीय जतीय संसद के गठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उस राजनीतिक प्रयोग की परीक्षा भी हैं, जिसे अंतरिम सरकार ‘दूसरे गणराज्य’ की संज्ञा दे रही है। जुलाई 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद यह पहला बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास है, जिसने 15 वर्षों से सत्ता में रही शेख हसीना की अवामी लीग सरकार का अंत कर दिया था। करीब 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं की भागीदारी वाला यह चुनाव इसलिए भी असाधारण है क्योंकि इसके साथ ही संवैधानिक जनमत संग्रह (रेफरेंडम) भी कराया जा रहा है, जो बांग्लादेश की शासन-व्यवस्था की संरचना को ही बदल सकता है। यह प्रश्न अब केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि यह तय करने का है कि क्या बांग्लादेश वास्तव में लोकतांत्रिक पुनर्जन्म की ओर बढ़ रहा है या फिर वह पुराने संघर्षों के नए संस्करण से रूबरू होने वाला है। विद्रोह के बाद की राजनीति: एक शून्य और कई दावेदार 2024 का छात्र आंदोलन केव...