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Jammu and Kashmir PSA Revocation Debate: Owaisi vs Omar Abdullah on Constitutional and Security Implications
जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए), 1978: ऐतिहासिक, राजनीतिक और मानवाधिकार दृष्टिकोण से एक समग्र विश्लेषण परिचय जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए), 1978, भारतीय विधायी इतिहास में एक विवादास्पद कानून है। इसे निवारक निरोध (preventive detention) के उद्देश्य से लागू किया गया, ताकि राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जा सके। तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला ने इसे लागू किया, जो ब्रिटिश कालीन 'डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट, 1915' की परंपरा से प्रेरित था। यह औपनिवेशिक कानून राजनीतिक असंतोष को दबाने का साधन था और पीएसए भी समय के साथ इसी प्रवृत्ति का अनुकरण करता दिखाई दिया। विशेष रूप से 2019 में अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद, पीएसए का प्रयोग राजनीतिक नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के विरुद्ध बढ़ गया। आलोचक इसे ‘कानूनहीन कानून’ कहते हैं, और इसे समाप्त करने कि बात करते हैं। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का मानना है कि PSA का मूल उद्देश्य राज्य की सुरक्षा के लिए अस्थायी रूप से लागू किया जाना था, लेकिन बीते वर्षों में इसे राजनीतिक असहमति को...