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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

Taiwan President Lai Ching-te & China’s Military Strategy: 2026 Indo-Pacific Security Outlook

ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते और चीन की सैन्य मंशा: 2026 की दहलीज पर शक्ति-संतुलन का नया परीक्षण प्रस्तावना नए वर्ष 2026 की शुरुआत ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और सामरिक अनिश्चितता के बीच हुई। ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते ने अपने नववर्षीय संबोधन में जिस दृढ़ स्वर में राष्ट्रीय सार्वभौमिकता की रक्षा और रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता दोहराई, वह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि बदलती एशियाई भू-राजनीति का संकेतक भी है। यह वक्तव्य ऐसे समय आया है जब चीन ने ताइवान के चारों ओर व्यापक सैन्य अभ्यास कर अपनी सैन्य शक्ति-प्रदर्शन रणनीति को एक बार फिर रेखांकित किया है। चीन का सैन्य अभ्यास: शक्ति-संदेश या दबाव-रणनीति? दिसंबर 2025 के अंत में आयोजित “जस्टिस मिशन 2025” केवल एक नियमित सैन्य अभ्यास नहीं था। यह अभ्यास— नौसेना, वायुसेना, रॉकेट फोर्स और कोस्ट गार्ड तटरेखा के अत्यंत निकट लाइव-फायर ड्रिल बहु-डोमेन समन्वित ऑपरेशन —जैसे तत्वों के कारण विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। चीन ने इसे “ताइवान स्वतंत्रता समर्थक ताकतों और बाहरी हस्तक्षेप को चेतावनी” करार दिया, वहीं त...

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Civil–Military Relations in India: Security, Democracy and the Naravane Memoir Debate

जनरल एम.एम. नरवणे की आत्मकथा विवाद: सिविल–मिलिट्री संबंधों और भारतीय लोकतंत्र की कसौटी फरवरी 2026 में भारत की संसद से शुरू हुआ पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा “Four Stars of Destiny” से जुड़ा विवाद जल्द ही एक साधारण राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर सिविल–मिलिट्री संबंधों, राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे गहरे संवैधानिक प्रश्नों का प्रतीक बन गया। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि जब सेना, राजनीति और सार्वजनिक विमर्श एक-दूसरे से टकराते हैं, तो लोकतंत्र की संस्थागत परिपक्वता की वास्तविक परीक्षा होती है। विवाद की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम जनरल नरवणे (सेना प्रमुख: 2019–2022) की यह आत्मकथा उनके सैन्य जीवन के अनुभवों पर आधारित बताई जाती है, जिसमें 2020 का गलवान घाटी संघर्ष, चीन के साथ सीमा तनाव, अग्निपथ योजना जैसी सैन्य सुधार नीतियाँ और संकटकाल में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका का उल्लेख कथित रूप से किया गया है। चूँकि भारत में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों पर भी Official Secrets Act, 1923 और रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देश लागू ...

Pariksha Pe Charcha 2026: PM Modi’s Motivational Message for Students on Exams, Skills, Balance & Success

परीक्षा पे चर्चा 2026: परीक्षा से आगे जीवन की तैयारी का राष्ट्रीय संवाद परीक्षा का समय आते ही देश के करोड़ों छात्रों के मन में एक ही सवाल गूंजने लगता है— क्या मैं सफल हो पाऊँगा? इसी प्रश्न, इसी तनाव और इसी अनिश्चितता को संवाद और आत्मविश्वास में बदलने का मंच है ‘परीक्षा पे चर्चा’ । 6 फरवरी 2026 को आयोजित परीक्षा पे चर्चा के 9वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधी बातचीत की। सुबह 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में दिल्ली, गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर और असम के गुवाहाटी से जुड़े छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण दूरदर्शन, पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किया गया। इस बार 4.5 करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन होना यह दर्शाता है कि आज का छात्र केवल परीक्षा टिप्स नहीं, बल्कि जीवन मार्गदर्शन चाहता है। 🌱 सपने देखें, लेकिन एक्शन के साथ प्रधानमंत्री मोदी का संदेश बेहद स्पष्ट और प्रेरक था— “सपने न देखना जुर्म है, लेकिन सिर्फ सपनों की गुनगुनाहट से काम नहीं चलता।” उन्हों...

Bangladesh Election 2026: Gen-Z Uprising, Fall of Hasina Era and BNP’s Return to Power

बांग्लादेश चुनाव 2026: जेन-जेड विद्रोह से लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन तक भूमिका 12 फरवरी 2026 को संपन्न बांग्लादेश का 13वाँ संसदीय आम चुनाव केवल एक नियमित लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं था, बल्कि यह दक्षिण एशिया के राजनीतिक इतिहास में एक युवा-प्रेरित सत्ता परिवर्तन का प्रतीक बन गया। 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जन-उभार के बाद यह पहला बड़ा चुनाव था, जिसने 15 वर्षों से सत्ता में रही शेख हसीना की अवामी लीग के राजनीतिक प्रभुत्व का औपचारिक अंत कर दिया। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार की देखरेख में हुए इस चुनाव ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को स्पष्ट जनादेश प्रदान किया और देश की राजनीति को एक नए युग में प्रवेश कराया। पृष्ठभूमि: 2024 का जन-उभार और सत्ता का पतन 2024 में बांग्लादेश ने अभूतपूर्व राजनीतिक उथल-पुथल देखी। विश्वविद्यालयों और शहरी केंद्रों से शुरू हुआ जेन-जेड (युवा पीढ़ी) का आंदोलन धीरे-धीरे एक व्यापक राष्ट्रीय विद्रोह में बदल गया। इस आंदोलन की मुख्य मांगें थीं— चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सत्तावादी शासन का अंत भ्रष्टाचार औ...

Bangladesh Election 2026: Gen Z Politics, Constitutional Referendum and the Future of Democracy

बांग्लादेश चुनाव 2026: लोकतंत्र की नई दिशा या पुरानी चुनौतियों का नया अध्याय? दक्षिण एशिया की राजनीति में बांग्लादेश एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव केवल 300-सदस्यीय जतीय संसद के गठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उस राजनीतिक प्रयोग की परीक्षा भी हैं, जिसे अंतरिम सरकार ‘दूसरे गणराज्य’ की संज्ञा दे रही है। जुलाई 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद यह पहला बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास है, जिसने 15 वर्षों से सत्ता में रही शेख हसीना की अवामी लीग सरकार का अंत कर दिया था। करीब 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं की भागीदारी वाला यह चुनाव इसलिए भी असाधारण है क्योंकि इसके साथ ही संवैधानिक जनमत संग्रह (रेफरेंडम) भी कराया जा रहा है, जो बांग्लादेश की शासन-व्यवस्था की संरचना को ही बदल सकता है। यह प्रश्न अब केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि यह तय करने का है कि क्या बांग्लादेश वास्तव में लोकतांत्रिक पुनर्जन्म की ओर बढ़ रहा है या फिर वह पुराने संघर्षों के नए संस्करण से रूबरू होने वाला है। विद्रोह के बाद की राजनीति: एक शून्य और कई दावेदार 2024 का छात्र आंदोलन केव...

Sawalkot Hydropower Project: India’s Strategic Push After Indus Waters Treaty Suspension

सावलकोट हाइड्रो प्रोजेक्ट: जल-रणनीति, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय संकल्प का नया अध्याय भारत की जल-नीति और ऊर्जा रणनीति लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, कूटनीतिक आपत्तियों और सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन साधती रही है। किंतु सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद, मोदी सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अब विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता—तीनों पर कोई समझौता नहीं होगा। चिनाब नदी पर प्रस्तावित सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट इसी बदली हुई रणनीतिक सोच का सबसे सशक्त और ठोस प्रमाण बनकर उभरा है। सरकारी कंपनी एनएचपीसी (NHPC) द्वारा 5,129 करोड़ रुपये के प्रमुख सिविल वर्क पैकेज का टेंडर जारी होना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि दशकों से रुके एक राष्ट्रीय स्वप्न को गति देने का निर्णायक क्षण है। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के विकास, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति—तीनों को एक साथ प्रभावित करने की क्षमता रखती है। सिंधु जल संधि का निलंबन: सुरक्षा और संप्रभुता का संदेश 1960 में हुई सिंधु जल संधि को लंबे समय तक भारत-पाक संबंधों में स्थिरता का प्रतीक माना...

Bangladesh BNP Historic Victory 2026: Impact on India-Bangladesh Relations

बांग्लादेश में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत और भारत-बांग्लादेश संबंध: एक विस्तृत अकादमिक विश्लेषण प्रस्तावना 13 फरवरी 2026 को बांग्लादेश की राजनीति में एक निर्णायक परिवर्तन सामने आया, जब Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने संसदीय चुनाव में दो-तिहाई से अधिक बहुमत प्राप्त कर सत्ता में वापसी की। लगभग दो दशकों बाद यह परिवर्तन केवल सरकार बदलने की घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा, वैचारिक संतुलन और विदेश नीति की प्राथमिकताओं में संभावित पुनर्संरचना का संकेत है। संभावित प्रधानमंत्री के रूप में Tarique Rahman का उभार इस परिवर्तन को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। यह चुनाव 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद हुआ, जिसने Sheikh Hasina के नेतृत्व वाली Awami League सरकार का अंत किया। इस राजनीतिक संक्रमण ने दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है—विशेषकर भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: सहयोग और तनाव के आयाम भारत और बांग्लादेश के संबंध 1971 के मुक्ति संग्राम से गहराई से जुड़े हैं। स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक वर्षों में संबंध सहयोगपूर्ण रहे, क...

Pakistan–US Relations: “Used and Throw Like Toilet Paper” Remark, Historical Context, Strategic Mistakes and Future Policy

पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध: “टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया” – एक विश्लेषणात्मक लेख भूमिका अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन और शत्रुता प्रायः हितों पर आधारित होती हैं। पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध इसका स्पष्ट उदाहरण हैं। हाल के दिनों में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने अमेरिका के साथ संबंधों पर तीखी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को “used and threw us like toilet paper” यानी “टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया और फिर फेंक दिया।” यह बयान पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली या किसी सार्वजनिक मंच पर दिया गया, जहां उन्होंने अतीत के अनुभवों के आधार पर अमेरिका पर आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अमेरिका के लिए भारी कुर्बानियां दीं, लेकिन बदले में उसे धोखा और उपेक्षा ही मिली। यह बयान पाकिस्तान की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ की ओर संकेत करता है, जहां अब पाकिस्तान स्वयं को स्वतंत्र निर्णय लेने वाला देश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों की नींव 1950 के दशक में पड़ी, जब शीत युद्ध के दौर में पाकिस्तान ने अमे...

Pakistan’s New Regional Strategy: Bangladesh–China–Myanmar Axis and India’s Strategic Challenges

पाकिस्तान का नया क्षेत्रीय दांव: बांग्लादेश–चीन–म्यांमार धुरी और भारत के लिए उभरती चुनौतियाँ भूमिका: बदलती भू-राजनीति का संकेत दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र इस समय गहन भू-राजनीतिक पुनर्संरचना के दौर से गुजर रहे हैं। 2020 के बाद वैश्विक शक्ति संतुलन में आए बदलाव—चीन का आक्रामक उदय, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, और क्षेत्रीय संगठनों की निष्क्रियता—ने छोटे और मध्यम देशों को नई रणनीतिक दिशाएँ तलाशने के लिए प्रेरित किया है। इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान द्वारा बांग्लादेश, चीन और म्यांमार के साथ एक नए क्षेत्रीय सहयोग तंत्र के निर्माण की कोशिश को देखा जाना चाहिए। यह पहल केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं है; इसके भीतर भारत को रणनीतिक रूप से सीमित करने, SAARC जैसी व्यवस्थाओं को अप्रासंगिक बनाने और चीन-केंद्रित क्षेत्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने का स्पष्ट संकेत निहित है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और क्षेत्रीय समीकरण 2024 में बांग्लादेश में छात्र-नेतृत्व वाले जनआंदोलन के बाद शेख हसीना सरकार का पतन और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन एक निर्णायक मोड़ साबि...

Bangladesh General Election 2026: Democratic Reset After the Gen-Z Revolution

बांग्लादेश के आम चुनाव 2026: राजनीतिक पुनर्जन्म और लोकतांत्रिक पुनर्संरचना की ऐतिहासिक घड़ी भूमिका: एक युग का अंत, एक नए अध्याय की शुरुआत 12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश ने न केवल अपना 13वां संसदीय आम चुनाव संपन्न किया, बल्कि एक साथ हुए संवैधानिक जनमत संग्रह के माध्यम से अपने राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने का प्रयास भी किया। यह चुनाव सामान्य सत्ता परिवर्तन भर नहीं था, बल्कि अगस्त 2024 की छात्र-नेतृत्व वाली ‘जुलाई क्रांति’ के बाद पहला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक परीक्षण था, जिसने देश की सत्ता संरचना को जड़ से हिला दिया। लगभग डेढ़ दशक तक सत्ता में रहीं शेख हसीना के पतन, अवामी लीग की चुनावी अनुपस्थिति और व्यापक संस्थागत सुधारों की पृष्ठभूमि में यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास में एक राजनीतिक पुनर्जन्म के रूप में दर्ज किया जा रहा है। पृष्ठभूमि: ‘जुलाई क्रांति’ और सत्ता संरचना का ध्वंस 2009 से 2024 तक शेख हसीना का शासन राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ बढ़ते अधिनायकवादी रुझानों के लिए भी जाना गया। विपक्ष का दमन, चुनावों की विश्वसनीयता पर प्रश्न, न्यायपालिका और मीडिया पर दबाव तथा अल्पसंख्यकों—विशेषकर ह...

Reforming Global Governance: Strategic Significance of the G4 Countries’ Munich Meeting 2026

बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार: G4 देशों की म्यूनिख बैठक का ऐतिहासिक महत्व भूमिका: बदलती विश्व-व्यवस्था और सुधार की अनिवार्यता 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति गहन संक्रमण के दौर से गुजर रही है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निर्मित बहुपक्षीय संस्थाएं—विशेषकर संयुक्त राष्ट्र—आज यूक्रेन युद्ध, गाज़ा–मध्य पूर्व संकट, इंडो-पैसिफिक तनाव, जलवायु आपातकाल, महामारी, और साइबर–स्पेस की चुनौतियों से जूझ रही हैं। यह स्पष्ट होता जा रहा है कि 1945 की संस्थागत संरचनाएँ 2026 की वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं रहीं। इसी पृष्ठभूमि में G4 देशों—भारत, जर्मनी, जापान और ब्राज़ील —द्वारा बहुपक्षीय व्यवस्था, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), में सुधार की मांग को नया बल मिला है। फरवरी 2026 में के दौरान आयोजित G4 विदेश मंत्रियों की बैठक इस दिशा में एक निर्णायक प्रतीक बनकर उभरी। G4 का उदय: प्रतिनिधित्व की कमी के विरुद्ध सामूहिक आवाज G4 समूह का औपचारिक उभार 2005 में हुआ, जब इन चार देशों ने UNSC सुधार के लिए संयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत किया। आज ये देश वैश्विक अर्थव्यवस्था और शासन में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं— ...