अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
रेपो रेट में कटौती: नए RBI गवर्नर की नीतिगत पहल और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में एक बड़ा निर्णय लिया, जिसमें रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती करके इसे 6.25% कर दिया गया। यह पिछले 5 वर्षों में पहली बार हुआ है जब रेपो रेट में कमी की गई है। इस फैसले से बाजार, बैंकिंग सेक्टर और आम जनता पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है। इस संपादकीय में हम रेपो रेट के इस बदलाव के पीछे के कारणों, इसके संभावित प्रभावों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का विस्तृत विश्लेषण करेंगे। रेपो रेट क्या है और इसका अर्थव्यवस्था पर प्रभाव? रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण प्रदान करता है। जब किसी देश की अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति बढ़ने लगती है, तो RBI रेपो रेट बढ़ाकर मुद्रा प्रवाह को नियंत्रित करता है। इसके विपरीत, जब आर्थिक गतिविधियाँ धीमी पड़ने लगती हैं, तो रेपो रेट में कटौती की जाती है ताकि सस्ते कर्ज के जरिए उपभोग और निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।...