हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
PM Modi Receives Ethiopia’s Highest Civilian Honour: A New Milestone in India-Ethiopia Strategic Relations
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान: भारत की वैश्विक कूटनीति का अफ्रीकी अध्याय 16 दिसंबर 2025 को अदीस अबाबा में घटित एक ऐतिहासिक क्षण ने भारत-इथियोपिया संबंधों को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबीय अहमद अली द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ से सम्मानित किया जाना केवल एक औपचारिक राजकीय घटना नहीं थी, बल्कि यह 21वीं सदी की भारतीय कूटनीति के आत्मविश्वास, निरंतरता और वैश्विक स्वीकार्यता का सशक्त प्रतीक था। यह तथ्य कि प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक राष्ट्राध्यक्ष हैं, इस घटना को ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक—दोनों दृष्टियों से—अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। व्यक्तिगत सम्मान से राष्ट्रीय गौरव तक प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक मान्यता के रूप में स्वीकार किया। यह विनम्रता केवल राजनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि उस कूटनीतिक दर्शन की अभिव्यक्ति है जिसमें भारत स्वयं को ‘नेतृत्वकर्ता’ से अधिक ‘साझेदार’ के रूप...