अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
कनाडा से भारतीयों का प्रत्यार्पण: इमिग्रेशन नीतियों और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण परिचय अक्टूबर 2025 में Times of India की एक रिपोर्ट ने एक चिंताजनक आंकड़ा सामने रखा — वर्ष 2024 में कनाडा ने लगभग 2,000 भारतीय नागरिकों को प्रत्यार्पित (deport) किया। इनमें से अधिकतर छात्र और वर्क वीजा धारक थे, जो अपने बेहतर भविष्य की तलाश में वहां पहुंचे थे। यह मात्र एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि वैश्विक माइग्रेशन की बदलती राजनीति, भारत-कनाडा के तनावपूर्ण संबंधों और प्रवासी भारतीय समुदाय की स्थिति का प्रतीक है। इस घटनाक्रम ने शिक्षा, रोज़गार और कूटनीति — तीनों क्षेत्रों में नई बहस को जन्म दिया है। कनाडा की बदलती इमिग्रेशन नीति कनाडा लंबे समय से प्रवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है, परंतु 2024 में उसने अपनी इमिग्रेशन नीति को उल्लेखनीय रूप से कड़ा कर दिया। Immigration, Refugees and Citizenship Canada (IRCC) के अनुसार, नई नीति का उद्देश्य था “अनियमित प्रवास पर नियंत्रण और घरेलू श्रम बाजार का संरक्षण” । परिणामस्वरूप, वीजा नवीनीकरण की शर्तें कठोर कर दी गईं, पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क ...