भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
US Senate Moves to Restrain Trump’s Venezuela Military Action: War Powers, Constitution and Global Implications
वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और संवैधानिक संतुलन की परीक्षा (The Hindu शैली में UPSC उन्मुख विश्लेषणात्मक लेख) भूमिका जनवरी 2026 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी हेतु अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चलाया गया आकस्मिक सैन्य अभियान केवल एक विदेश नीति निर्णय नहीं था, बल्कि यह अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर कार्यपालिका–विधायिका शक्ति संतुलन की एक गंभीर परीक्षा भी बन गया। इस पृष्ठभूमि में अमेरिकी सीनेट द्वारा War Powers Resolution को आगे बढ़ाना उस संस्थागत चिंता को रेखांकित करता है, जो एकतरफा सैन्य निर्णयों के बढ़ते चलन को लेकर लंबे समय से व्यक्त की जाती रही है। यह घटनाक्रम केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है; इसके निहितार्थ अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता, लैटिन अमेरिकी भू-राजनीति और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व जैसे व्यापक विषयों से जुड़े हैं—जो UPSC के GS Paper-2 और GS Paper-4 दोनों के लिए प्रासंगिक हैं। ऐतिहासिक एवं संवैधानिक पृष्ठभूमि अमेरिकी संविधान में युद्ध से संबंधित शक्तियों का स्पष्ट विभाजन है। अनुच्छेद-1 के तहत युद्ध की घोषणा और सैन्य...