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भारत–संयुक्त अरब अमीरात (UAE) संबंध: आर्थिक, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी की नई ऊँचाइयाँ एक मौलिक और विश्लेषणात्मक अध्ययन भूमिका 21वीं सदी में भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख आधार “मल्टी-अलाइनमेंट” बन चुका है—अर्थात् किसी एक गुट पर निर्भर हुए बिना, सभी प्रभावशाली शक्तियों और क्षेत्रों के साथ व्यावहारिक और हित-आधारित संबंध। इसी नीति का सबसे सशक्त उदाहरण भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच तेजी से गहराता रिश्ता है। 20 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान (MbZ) की द्विपक्षीय बैठक केवल औपचारिक कूटनीतिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि यह संकेत थी कि भारत और UAE अब पारंपरिक तेल-व्यापार से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी के नए चरण में प्रवेश कर चुके हैं। यह बैठक ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया गाजा संकट, यमन संघर्ष, सऊदी-पाक रक्षा समीकरण और अमेरिका की अस्थिर नीतियों के कारण गहरी अनिश्चितता से गुजर रहा है। ऐसे माहौल में भारत-UAE समझौते स्थिरता और दीर्घकालिक साझेदारी का संकेत देते हैं। आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी: तेल से आगे की कहानी भारत और U...