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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

खेल

शीर्षक: शूटिंग वर्ल्ड कप में भारत की सिफत कौर समरा ने रचा इतिहास, जीता गोल्ड मेडल

अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में चल रहे आईएसएसएफ वर्ल्ड कप (शूटिंग वर्ल्ड कप) में भारत की युवा शूटर सिफत कौर समरा ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया है। महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोज़ीशन स्पर्धा में उन्होंने फ़ाइनल राउंड में पिछड़ने के बावजूद जबरदस्त वापसी करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

सिफत की यह जीत न सिर्फ़ उनकी प्रतिभा का प्रमाण है, बल्कि भारतीय महिला शूटिंग की बढ़ती ताकत को भी दर्शाती है। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल का अद्भुत परिचय दिया।

इसके साथ ही, भारत की एक और महिला शूटर ईशा सिंह ने भी सराहनीय प्रदर्शन किया। उन्होंने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के फ़ाइनल में दूसरा स्थान प्राप्त कर सिल्वर मेडल जीता।

दोनों खिलाड़ियों की यह उपलब्धि भारत के लिए गर्व का विषय है और देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी। शूटिंग जैसे खेल में भारत की यह बढ़ती सफलता भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियों की ओर संकेत करती है।


माइकल बेवन: क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के हॉल ऑफ फेम में शामिल

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर माइकल बेवन को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है। बेवन को क्रिकेट इतिहास के सबसे बेहतरीन फिनिशर में से एक माना जाता है।

बेवन का क्रिकेट करियर

माइकल बेवन ऑस्ट्रेलिया की 1999 और 2003 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा थे। उन्होंने अपने वनडे करियर में कुल 232 मैच खेले और 6912 रन बनाए। उनकी औसत 53.58 रही, जो वनडे क्रिकेट में किसी भी शीर्ष बल्लेबाज के लिए बेहद प्रभावशाली मानी जाती है।

बेवन को खास तौर पर उनकी क्लासिक फिनिशिंग क्षमताओं के लिए जाना जाता है। जब भी टीम मुश्किल स्थिति में होती थी, बेवन जिम्मेदारी से बल्लेबाजी कर टीम को जीत दिलाते थे। उनकी रणनीतिक बल्लेबाजी और शांत स्वभाव उन्हें दूसरों से अलग बनाता था।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का सम्मान

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने X (ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बेवन को बधाई दी। हॉल ऑफ फेम में शामिल किए जाने के बाद, बेवन का नाम उन महान खिलाड़ियों की सूची में जुड़ गया है, जिन्होंने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

निष्कर्ष

माइकल बेवन का योगदान वनडे क्रिकेट में अमूल्य रहा है। उनकी बल्लेबाजी तकनीक और मैच फिनिश करने की कला ने कई युवा क्रिकेटरों को प्रेरित किया है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया द्वारा उन्हें हॉल ऑफ फेम में शामिल करना उनके शानदार करियर की एक उपयुक्त मान्यता है।


गोंगाड़ी तृषा: महिला अंडर-19 टी20 विश्व कप की 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट'

महिला क्रिकेट के इतिहास में भारत की युवा प्रतिभाएं लगातार अपना परचम लहरा रही हैं। इसी कड़ी में गोंगाड़ी तृषा का नाम उभरकर सामने आया है, जिन्होंने आईसीसी महिला अंडर-19 टी20 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' का खिताब जीता। तेलंगाना से ताल्लुक रखने वाली इस ऑलराउंडर ने अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया।

तृषा का शानदार प्रदर्शन

गोंगाड़ी तृषा ने इस टूर्नामेंट में कुल 309 रन बनाए और 7 विकेट हासिल किए। खासतौर पर फाइनल मुकाबले में उनके प्रदर्शन ने टीम को जीत की ओर अग्रसर किया। उनके निरंतर अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें 'मैन ऑफ द मैच' भी चुना गया। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता और गेंदबाजी में सटीकता देखने को मिली, जिससे भारतीय टीम को मजबूती मिली।

शुरुआती जीवन और क्रिकेट सफर

गोंगाड़ी तृषा का जन्म 2005 में हुआ और मात्र 9 साल की उम्र में उन्होंने हैदराबाद की अंडर-16 टीम में जगह बना ली। इस उम्र में क्रिकेट के प्रति उनकी रुचि और मेहनत दिखाती है कि वे बचपन से ही इस खेल के प्रति समर्पित थीं। उनकी मेहनत और संघर्ष ने उन्हें अंडर-19 विश्व कप का सितारा बना दिया।

भविष्य की संभावनाएं

तृषा का यह प्रदर्शन निश्चित रूप से भारतीय महिला क्रिकेट के भविष्य के लिए शुभ संकेत है। उनका शानदार खेल उन्हें आने वाले वर्षों में भारतीय सीनियर टीम में जगह दिला सकता है। यदि वे इसी तरह निरंतर अच्छा खेलती रहीं, तो भविष्य में वे भारतीय क्रिकेट की एक बड़ी स्टार बन सकती हैं।

गोंगाड़ी तृषा की यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता आने वाली युवा महिला क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा बनेगी।


भारत ने लगातार दूसरी बार जीता महिला अंडर-19 T20 विश्व कप का खिताब

भारतीय महिला अंडर-19 क्रिकेट टीम ने एक बार फिर अपना जलवा दिखाते हुए अंडर-19 T20 विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया। रविवार को मलेशिया के क्वालालंपुर में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 9 विकेट से हराकर यह उपलब्धि हासिल की।

मैच का संक्षिप्त विवरण

फाइनल में पहले बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम 20 ओवर में सिर्फ 82 रन पर ऑल-आउट हो गई। भारतीय गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विपक्षी टीम को बड़ा स्कोर बनाने का मौका नहीं दिया। लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने महज 11.2 ओवर में जीत हासिल कर ली।

भारतीय टीम का शानदार प्रदर्शन

इस टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल दिखाया। गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। खासकर गेंदबाजों ने पूरे टूर्नामेंट में विपक्षी टीमों पर दबाव बनाए रखा।

लगातार दूसरी बार बनी चैंपियन

यह भारत का लगातार दूसरा अंडर-19 महिला T20 विश्व कप खिताब है, जिससे यह साबित होता है कि भारतीय महिला क्रिकेट मजबूत हो रहा है। यह जीत युवा खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को और बढ़ाएगी और भारतीय महिला क्रिकेट के भविष्य को और उज्जवल बनाएगी।

निष्कर्ष

भारत की यह जीत महिला क्रिकेट के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस शानदार प्रदर्शन से भारतीय महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयां मिलेंगी और आने वाले वर्षों में भारतीय टीम और भी बेहतर प्रदर्शन करेगी।


बीसीसीआई वार्षिक पुरस्कार 2023-24: विजेताओं की सूची और विश्लेषण

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के वार्षिक पुरस्कारों में 2023-24 के विजेताओं की घोषणा कर दी गई है। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह में उन क्रिकेटरों को सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

पुरुष वर्ग में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर – जसप्रीत बुमराह

भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को "पॉली उमरीगर अवॉर्ड" से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार हर साल पुरुष वर्ग के सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर को दिया जाता है। बुमराह ने 2023-24 में बेहतरीन गेंदबाजी का प्रदर्शन किया और भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सटीक यॉर्कर और घातक गेंदबाजी उन्हें इस पुरस्कार का हकदार बनाती है।

महिला वर्ग में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर – स्मृति मंधाना

महिला क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाली स्मृति मंधाना को इस साल की सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेटर के रूप में सम्मानित किया गया है। स्मृति ने अपने बेहतरीन बल्लेबाजी प्रदर्शन से भारत को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाई हैं। उनकी निरंतरता और आक्रामक बल्लेबाजी शैली ने उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दिलाया।

सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय डेब्यू – सरफराज खान और आशा सोभना

इस वर्ष के सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय डेब्यू अवॉर्ड के लिए सरफराज खान और आशा सोभना को चुना गया है। सरफराज खान ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया और भारतीय टेस्ट टीम में चयन के बाद भी अपने दमदार खेल से सबको प्रभावित किया। वहीं, महिला क्रिकेट में आशा सोभना ने अपने पदार्पण वर्ष में ही बेहतरीन प्रदर्शन कर यह पुरस्कार हासिल किया।

सर्वश्रेष्ठ घरेलू क्रिकेटर – तनुश कोटियन

मुंबई के हरफनमौला खिलाड़ी तनुश कोटियन को घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया है। रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू टूर्नामेंटों में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है।

निष्कर्ष

बीसीसीआई के वार्षिक पुरस्कार क्रिकेट जगत में खिलाड़ियों के योगदान को पहचानने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। जसप्रीत बुमराह, स्मृति मंधाना, सरफराज खान, आशा सोभना और तनुश कोटियन जैसे क्रिकेटरों को सम्मानित करके बीसीसीआई ने उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को सराहा है। यह पुरस्कार ना केवल खिलाड़ियों की मेहनत को मान्यता देते हैं बल्कि भविष्य के क्रिकेटरों को भी प्रेरित करते हैं।


न्यूजीलैंड की अमेलिया केर: 2024 की आईसीसी विमेंस टी20I क्रिकेटर ऑफ द ईयर

न्यूजीलैंड की ऑलराउंडर अमेलिया केर को 2024 का आईसीसी विमेंस टी20I क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया है। यह सम्मान उनके असाधारण प्रदर्शन और टीम को शानदार उपलब्धियों तक पहुंचाने में उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए दिया गया।

अमेलिया केर का प्रदर्शन

अमेलिया ने 2024 में कुल 18 टी20I मुकाबलों में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने 387 रन बनाए और 29 विकेट लिए। उनकी हरफनमौला प्रतिभा ने न्यूजीलैंड टीम को मजबूती प्रदान की।

विशेष रूप से, 2024 के विमेंस टी20 वर्ल्ड कप में उनका प्रदर्शन अभूतपूर्व रहा। उन्होंने टूर्नामेंट में 15 विकेट चटकाए और अपनी टीम को पहली बार यह प्रतिष्ठित खिताब जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों ने उन्हें आईसीसी द्वारा यह पुरस्कार दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

टीम के लिए योगदान

अमेलिया की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे न्यूजीलैंड महिला क्रिकेट को भी प्रेरणा मिली है। उनकी सफलता अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए आदर्श बनेगी और उन्हें बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रेरित करेगी।

निष्कर्ष

आईसीसी विमेंस टी20I क्रिकेटर ऑफ द ईयर के रूप में चुने जाने के बाद अमेलिया केर ने साबित किया है कि समर्पण और मेहनत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। यह उपलब्धि उनके शानदार करियर में एक और मील का पत्थर है। उनके प्रदर्शन से न्यूजीलैंड क्रिकेट को नई ऊंचाइयां छूने की उम्मीद है।


आईसीसी मेंस T20I टीम ऑफ द ईयर 2024

आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) ने 2024 की मेंस T20I टीम ऑफ द ईयर की घोषणा कर दी है। इस टीम में रोहित शर्मा को कप्तान बनाया गया है। भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह बड़ी खुशखबरी है क्योंकि टीम में भारत के कई खिलाड़ी शामिल हैं, जैसे हार्दिक पंड्या, जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह।

रोहित शर्मा की कप्तानी:

रोहित शर्मा ने टी20 क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है, जिसके कारण उन्हें इस प्रतिष्ठित टीम का नेतृत्व करने का मौका दिया गया है। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने कई यादगार जीत दर्ज की हैं, और उनकी रणनीतिक सोच ने उन्हें एक बेहतरीन कप्तान के रूप में स्थापित किया है।

टीम के अन्य प्रमुख खिलाड़ी:

टीम में ट्रैविस हेड को रोहित शर्मा के साथ ओपनर के रूप में चुना गया है। इसके अलावा, पाकिस्तान के बाबर आज़म को भी इस टीम में शामिल किया गया है, जो उनके विश्वस्तरीय बल्लेबाजी कौशल को दर्शाता है।

भारतीय खिलाड़ियों की भूमिका:

हार्दिक पंड्या अपने ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह टीम की गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती देंगे। यह चयन भारतीय क्रिकेट की ताकत को भी प्रदर्शित करता है।

निष्कर्ष:

आईसीसी मेंस T20I टीम ऑफ द ईयर में भारतीय खिलाड़ियों की मजबूत उपस्थिति और रोहित शर्मा की कप्तानी यह साबित करती है कि भारतीय क्रिकेट का दबदबा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बरकरार है। यह उपलब्धि न केवल खिलाड़ियों के लिए, बल्कि भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए भी गर्व का विषय है।



अर्शदीप सिंह बने ICC मेन्स T20I क्रिकेटर ऑफ द ईयर

भारतीय तेज़ गेंदबाज अर्शदीप सिंह को 2024 में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए ICC मेन्स T20I क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया। यह सम्मान उनकी लगातार प्रभावी गेंदबाजी का प्रमाण है, जिसने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

अर्शदीप का प्रदर्शन

2024 में अर्शदीप ने 18 मैचों में 36 विकेट झटके। उनके इस प्रदर्शन ने न केवल भारत को कई मैच जिताए, बल्कि उन्हें टी20 क्रिकेट में सबसे घातक गेंदबाजों में से एक बना दिया। खास बात यह है कि वह लगातार दूसरे साल भारत के सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बने।

दूसरे भारतीय क्रिकेटर

सूर्यकुमार यादव के बाद अर्शदीप सिंह यह पुरस्कार जीतने वाले दूसरे भारतीय क्रिकेटर हैं। उनका यह सम्मान भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए गर्व का क्षण है।

निष्कर्ष

अर्शदीप सिंह का यह सम्मान भारतीय क्रिकेट में तेज गेंदबाजों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। उनकी सफलता ने युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का काम किया है और आने वाले समय में उनके प्रदर्शन से और उम्मीदें बढ़ गई हैं।


आईसीसी मेन्स वनडे टीम ऑफ द इयर 2024: भारतीय खिलाड़ियों को जगह नहीं मिली

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 2024 की मेन्स वनडे टीम ऑफ द इयर का ऐलान कर दिया है। हालांकि, इस बार की सूची में भारतीय प्रशंसकों के लिए निराशाजनक खबर है क्योंकि टीम में किसी भी भारतीय खिलाड़ी को शामिल नहीं किया गया है। चयन समिति ने इस टीम में वेस्टइंडीज़, श्रीलंका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के खिलाड़ियों को प्रमुखता दी है।

टीम की संरचना

आईसीसी की इस प्रतिष्ठित सूची में श्रीलंका के खिलाड़ियों का दबदबा रहा, क्योंकि टीम में चार श्रीलंकाई खिलाड़ियों को जगह दी गई है। वहीं, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के तीन-तीन खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं, और वेस्टइंडीज से एक खिलाड़ी को शामिल किया गया है।

टीम के कप्तान

श्रीलंका के मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज चरिथ असालंका को इस टीम का कप्तान बनाया गया है। उनकी नेतृत्व क्षमता और लगातार अच्छा प्रदर्शन इस चयन का आधार रहे।

ओपनिंग जोड़ी

अफगानिस्तान के रहमानुल्लाह गुरबाज़ और पाकिस्तान के सैम अयूब को टीम का ओपनर चुना गया है। दोनों खिलाड़ियों ने सालभर में बेहतरीन पारियां खेलकर टीम को मजबूत शुरुआत दी।

चयनित खिलाड़ी

टीम के खिलाड़ियों की सूची इस प्रकार है:


1. रहमानुल्लाह गुरबाज़ (अफगानिस्तान) - ओपनिंग बल्लेबाज

2. सैम अयूब (पाकिस्तान) - ओपनिंग बल्लेबाज

3. चरिथ असालंका (श्रीलंका) - कप्तान और मध्यक्रम बल्लेबाज

4. कुसल मेंडिस (श्रीलंका) - विकेटकीपर-बल्लेबाज

5. धनंजय डी सिल्वा (श्रीलंका) - ऑलराउंडर

6. राशिद खान (अफगानिस्तान) - ऑलराउंडर और स्पिन गेंदबाज

7. शादाब खान (पाकिस्तान) - ऑलराउंडर

8. मोहम्मद नवाज (पाकिस्तान) - ऑलराउंडर

9. महेदी हसन (श्रीलंका) - ऑलराउंडर

10. अकील होसैन (वेस्टइंडीज) - स्पिन गेंदबा

11. मुजीब उर रहमान (अफगानिस्तान) - स्पिन गेंदबाज

भारतीय खिलाड़ियों की अनुपस्थिति

भारत, जो क्रिकेट की दुनिया में एक प्रमुख शक्ति माना जाता है, इस सूची से पूरी तरह बाहर है। इसका मुख्य कारण यह हो सकता है कि भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस साल वनडे क्रिकेट में औसत रहा हो, या चयनकर्ताओं ने अन्य टीमों के खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी हो।

निष्कर्ष

आईसीसी मेन्स वनडे टीम ऑफ द इयर 2024 में भारतीय खिलाड़ियों की अनुपस्थिति ने क्रिकेट प्रशंसकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। लेकिन यह भी सच है कि चयन समिति ने इस टीम में ऐसे खिलाड़ियों को जगह दी है जिन्होंने इस साल असाधारण प्रदर्शन किया। भारतीय टीम को अगले साल बेहतर प्रदर्शन कर इस सूची में वापसी की कोशिश करनी होगी।



आईसीसी वीमेंस वनडे टीम ऑफ द ईयर 2024: भारतीय खिलाड़ियों ने फिर रचा इतिहास

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने 2024 की वीमेंस वनडे टीम ऑफ द ईयर की घोषणा कर दी है। इस प्रतिष्ठित सूची में भारत की दो शानदार खिलाड़ियों, स्मृति मंधाना और दीप्ति शर्मा, ने अपनी जगह बनाई है। उनके शानदार प्रदर्शन ने न केवल भारतीय क्रिकेट का कद ऊंचा किया है बल्कि महिला क्रिकेट में भारत के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाया है।

दक्षिण अफ्रीका की लौरा वोल्वार्ट को कप्तानी

इस टीम की कमान दक्षिण अफ्रीका की स्टार बल्लेबाज लौरा वोल्वार्ट को सौंपी गई है, जिन्होंने पूरे साल अपनी दमदार बल्लेबाजी और नेतृत्व क्षमता से सभी का ध्यान खींचा।

टीम में शामिल देशों का प्रतिनिधित्व

इस टीम में कुल 11 खिलाड़ियों को जगह दी गई है, जिनमें कई देशों की बेहतरीन खिलाड़ी शामिल हैं:

भारत: स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा

दक्षिण अफ्रीका: लौरा वोल्वार्ट (कप्तान) और एक अन्य खिलाड़ी

ऑस्ट्रेलिया: 2 खिलाड़ी

इंग्लैंड: 3 खिलाड़ी

श्रीलंका: 1 खिलाड़ी

वेस्टइंडीज़: 1 खिलाड़ी

स्मृति और दीप्ति का योगदान

स्मृति मंधाना ने पूरे साल अपनी शानदार बल्लेबाजी से विपक्षी टीमों को परेशान किया। उनकी तकनीक और आक्रामकता ने कई महत्वपूर्ण मैचों में भारत को जीत दिलाई।

दीप्ति शर्मा, एक ऑलराउंडर के रूप में, बल्ले और गेंद दोनों से टीम के लिए उपयोगी साबित हुईं। उन्होंने न केवल विकेट चटकाए बल्कि मुश्किल समय में टीम को संभालते हुए उपयोगी पारियां भी खेलीं।

महिला क्रिकेट का बढ़ता कद

आईसीसी द्वारा घोषित यह टीम महिला क्रिकेट में हो रहे अभूतपूर्व विकास और प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है। भारतीय खिलाड़ियों का इस सूची में शामिल होना यह दिखाता है कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम अब वैश्विक स्तर पर एक मजबूत दावेदार बन चुकी है।

निष्कर्ष

स्मृति मंधाना और दीप्ति शर्मा का नाम इस टीम में शामिल होना भारत के लिए गर्व की बात है। यह चयन न केवल उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा भी है। भारतीय महिला क्रिकेट के लिए यह उपलब्धि इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ती है।


आईसीसी ने 2024 की मेन्स टेस्ट टीम ऑफ द इयर का एलान किया

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने 2024 की मेन्स टेस्ट टीम ऑफ द इयर का एलान किया है, जिसमें 3 भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी शामिल हैं। इस टीम में भारतीय टीम के युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल, तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा का चयन हुआ है। इन खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन के जरिए टेस्ट क्रिकेट में शानदार योगदान दिया है।

टीम के कप्तान के तौर पर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी पैट कमिंस को चुना गया है। वे इस टीम में अकेले ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी हैं। पैट कमिंस ने अपनी कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और अपनी गेंदबाजी से भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

इसके अलावा, टीम में इंग्लैंड के 4 खिलाड़ी, न्यूज़ीलैंड के 2 खिलाड़ी और श्रीलंका के 1 खिलाड़ी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने अपनी टीमों के लिए अद्वितीय प्रदर्शन किया, जिससे उन्हें इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला।

2024 की टेस्ट टीम ऑफ द इयर इस बात का प्रमाण है कि क्रिकेट में केवल सामूहिक प्रयास से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है, और इस टीम के खिलाड़ियों ने अपनी उत्कृष्टता और समर्पण से टेस्ट क्रिकेट को नया मुकाम दिया है।

इस चयन ने भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमताओं को साबित करने के साथ-साथ विश्व क्रिकेट में भारत की बढ़ती ताकत को भी उजागर किया है।


भारत ने जीता पहला खो-खो वर्ल्ड कप, पुरुष और महिला दोनों वर्गों में चैंपियन

19 जनवरी 2025 को दिल्ली में आयोजित पहले खो-खो वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने अपराजित रहते हुए खिताब जीते। इस ऐतिहासिक आयोजन ने खो-खो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है, और भारतीय टीमों ने अपनी शानदार जीत से देश को गर्वित किया।

पुरुष वर्ग में भारत की जीत

भारतीय पुरुष खो-खो टीम ने फाइनल मुकाबले में नेपाल को 54-36 से हराकर खिताब जीता। इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी शानदार रणनीति और तेज़ी से खेलते हुए नेपाल को हराया। यह जीत भारतीय खो-खो के लिए एक ऐतिहासिक क्षण थी, क्योंकि इस वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने अपराजित रहते हुए अपना दबदबा साबित किया।

महिला वर्ग में भी भारत का दबदबा

महिला वर्ग में भी भारतीय टीम ने अपनी उत्कृष्ट प्रदर्शन से नेपाल को 78-40 से हराया और खिताब अपने नाम किया। भारतीय महिला टीम की जीत ने साबित किया कि खो-खो में महिलाओं का भी उतना ही प्रभावी खेल हो सकता है जितना पुरुषों का। यह जीत भारतीय महिला खिलाड़ियों के सामर्थ्य और समर्पण को दर्शाती है।

वर्ल्ड कप का आयोजन और महत्व

यह टूर्नामेंट भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के समर्थन से आयोजित किया गया था, और इसमें 20 पुरुष और 19 महिला टीमों ने भाग लिया। खो-खो का यह वर्ल्ड कप देशभर में खेल के प्रति बढ़ती रुचि और समर्थन का प्रतीक बन गया। भारतीय टीमों ने इस टूर्नामेंट में अपनी कड़ी मेहनत और लगन से इस खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

खो-खो के लिए नया अध्याय

इस टूर्नामेंट की सफलता के साथ भारत ने खो-खो के खेल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया। यह वर्ल्ड कप भारत में खो-खो को एक प्रमुख खेल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। भारत ने दोनों श्रेणियों में चैंपियन बनकर इस खेल के प्रति देश के समर्पण और समर्थन को दर्शाया।

निष्कर्ष

19 जनवरी 2025 का दिन भारतीय खो-खो के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। भारतीय पुरुष और महिला खो-खो टीमों ने अपनी शानदार जीत से साबित किया कि भारत खो-खो जैसे पारंपरिक खेलों में भी वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर रह सकता है। यह टूर्नामेंट न केवल भारतीय खो-खो के लिए बल्कि पूरे देश के खेल जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है।


कर्नाटक की ऐतिहासिक जीत: 5वीं बार बनी विजय हजारे ट्रॉफी की विजेता

कर्नाटक ने एक बार फिर भारतीय घरेलू क्रिकेट में अपना दबदबा साबित करते हुए विजय हजारे ट्रॉफी 2024-25 का खिताब जीत लिया। शनिवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में कर्नाटक ने विदर्भ को 36 रनों से हराकर रिकॉर्ड 5वीं बार यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी अपने नाम की।

फाइनल मैच में कर्नाटक ने पहले बल्लेबाजी करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने अपने बल्लेबाजों के दम पर 348 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। कर्नाटक के बल्लेबाजों ने विदर्भ के गेंदबाजों पर शुरू से ही दबाव बनाए रखा और हर मौके का भरपूर फायदा उठाया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी विदर्भ की टीम ने कड़ी मेहनत की, लेकिन 312 रनों पर ही सिमट गई।

इस ऐतिहासिक जीत के साथ, कर्नाटक ने घरेलू क्रिकेट में अपनी बादशाहत को और मजबूत कर लिया है। पांचवीं बार ट्रॉफी जीतने वाली यह टीम अब भारत की सबसे सफल घरेलू टीमों में से एक बन गई है। कर्नाटक के खिलाड़ियों ने न केवल फाइनल में बल्कि पूरे टूर्नामेंट में अनुशासन, प्रतिबद्धता और बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया।

यह जीत कर्नाटक के खेल प्रेमियों के लिए गर्व का क्षण है और टीम के प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि कड़ी मेहनत और टीम वर्क से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। कर्नाटक की यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।



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“इस्लामिक नाटो” की परिकल्पना: तुर्की के हथियार, सऊदी धन और पाकिस्तान की परमाणु क्षमता — एक उभरते रक्षा गठजोड़ का विश्लेषण प्रस्तावना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन स्थिर नहीं होते; वे समय, खतरे और हितों के अनुसार बदलते रहते हैं। हाल के वर्षों में मध्य एशिया, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिवेश में तेज़ी से परिवर्तन हुआ है। इसी संदर्भ में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच संभावित रक्षा-सहयोग को कुछ विश्लेषक “इस्लामिक नाटो” जैसी संज्ञा देने लगे हैं। यद्यपि यह कोई औपचारिक सैन्य संगठन नहीं है, फिर भी तीनों देशों के पूरक सामर्थ्य — तुर्की की रक्षा-तकनीक, सऊदी अरब की आर्थिक शक्ति और पाकिस्तान की परमाणु क्षमता — एक नए रणनीतिक त्रिकोण की संभावना को जन्म देते हैं। यह लेख इस संभावित रक्षा गठजोड़ की पृष्ठभूमि, इसके कारक, संभावित स्वरूप और वैश्विक राजनीति पर इसके प्रभावों का अकादमिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि शीत युद्ध के बाद की दुनिया में शक्ति संतुलन पश्चिमी देशों से धीरे-धीरे बहुध्रुवीय संरचना की ओर बढ़ा है। अमेरिका और यूरोप की प्रभुत्ववादी भूम...

Trump’s Greenland Ambition and Europe Tariff Crisis: A New Geopolitical Flashpoint in 2026

ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति और यूरोप पर टैरिफ का संकट: 21वीं सदी की नई भू-राजनीतिक परीक्षा 18 जनवरी 2026 को एक बार फिर वैश्विक राजनीति उस मोड़ पर खड़ी दिखाई दी, जहाँ शक्ति, संप्रभुता और आर्थिक दबाव आमने-सामने आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने या किसी रूप में अमेरिकी नियंत्रण में लाने की अपनी पुरानी इच्छा को आक्रामक ढंग से दोहराया। 2019 में यह विचार दुनिया को अजीब लगा था, लेकिन 2025 में सत्ता में वापसी के बाद ट्रंप ने इसे रणनीतिक एजेंडे में बदल दिया। अब यह केवल एक असामान्य प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, भौगोलिक रूप से आर्कटिक क्षेत्र के केंद्र में स्थित है। बर्फ से ढकी यह भूमि देखने में शांत लगती है, लेकिन इसके नीचे खनिज संसाधनों, दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और भविष्य के समुद्री मार्गों की अपार संभावनाएँ छिपी हैं। इसके साथ ही, यह अमेरिका, रूस और यूरोप के बीच रणनीतिक संतुलन का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन चुका है। ट्रंप का तर्क है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है, ...

Trump’s Gaza “Board of Peace”: Power, Peacebuilding and the Future of Post-War Reconstruction

ट्रंप द्वारा गाजा के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की घोषणा: शक्ति, शांति और पुनर्निर्माण के बीच एक जटिल प्रयोग प्रस्तावना 17 जनवरी 2026 को व्हाइट हाउस से की गई एक घोषणा ने मध्य पूर्व की राजनीति में नई बहस छेड़ दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संघर्ष समाप्ति योजना के दूसरे चरण के अंतर्गत एक नई संस्था— ‘बोर्ड ऑफ पीस’ —के संस्थापक कार्यकारी सदस्यों की घोषणा की। इस बोर्ड का घोषित उद्देश्य गाजा में युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण, स्थिरीकरण, प्रशासनिक क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक विकास की निगरानी करना है। स्वयं ट्रंप इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। यह पहल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 (2025) से जुड़ी बताई गई है, जिसने ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना को सैद्धांतिक समर्थन दिया था। यह घोषणा केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की मध्य पूर्व नीति, वैश्विक शासन संरचना और “शांति-निर्माण” की अवधारणा को लेकर कई बुनियादी प्रश्न खड़े करती है। पृष्ठभूमि: युद्ध से युद्धविराम तक अक्टूबर 2025 में हुए नाजुक युद्धविराम से पहले गाजा लगभग दो वर्षों तक भीषण युद्ध की चपेट में रहा। इस दौरा...

Jimmy Lai Case: Hong Kong National Security Law, Press Freedom and Global Human Rights Debate

हांगकांग–चीन संबंध और जिमी लाई मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रेस स्वतंत्रता और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य का समग्र अकादमिक विश्लेषण भूमिका हांगकांग आज केवल एक वैश्विक वित्तीय केंद्र नहीं, बल्कि इतिहास, राजनीति, कानून और मानवाधिकारों के जटिल संगम का प्रतीक बन चुका है। इसकी वर्तमान स्थिति को समझने के लिए उसके औपनिवेशिक अतीत, “एक देश–दो प्रणाली” की अवधारणा और हाल के वर्षों में लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की भूमिका को समग्रता में देखना आवश्यक है। जिमी लाई का मामला इसी ऐतिहासिक और राजनीतिक परिवर्तन का जीवंत उदाहरण है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, न्यायिक प्रक्रिया और प्रेस स्वतंत्रता आमने-सामने खड़ी दिखाई देती हैं। 1. हांगकांग–चीन संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (क) चीन का पारंपरिक हिस्सा हांगकांग प्राचीन काल से चीनी साम्राज्यों का हिस्सा रहा। यह मुख्यतः मछली पकड़ने और स्थानीय व्यापार पर आधारित क्षेत्र था। मिंग और चिंग राजवंशों के समय इसे दक्षिण चीन का सामान्य तटीय इलाका माना जाता था। (ख) अफीम युद्ध और ब्रिटिश उपनिवेश 19वीं सदी में अफीम युद्धों ने हांगकांग के भाग्य को बदल दिया। 1842 की नानजि...

Why India Needs a Shadow Cabinet: Strengthening the Role of Opposition in a Modern Democracy

वर्तमान में भारत में विपक्ष की आवाज़ को सशक्त बनाने हेतु छाया मंत्रिमंडल की आवश्यकता एक समग्र अकादमिक विश्लेषण परिचय लोकतंत्र की आत्मा सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन में निहित होती है। जहां सत्तारूढ़ दल शासन, नीति-निर्माण और प्रशासन का दायित्व निभाता है, वहीं विपक्ष का कार्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों की समीक्षा, आलोचना और वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना होता है। एक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष ‘नकारात्मक शक्ति’ नहीं, बल्कि रचनात्मक नियंत्रक (Constructive Watchdog) की भूमिका निभाता है। भारत, जो स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र घोषित करता है, आज एक ऐसे राजनीतिक चरण से गुजर रहा है जहाँ विपक्ष की भूमिका कमजोर, बिखरी हुई और प्रतिक्रियात्मक दिखाई देती है। संसद के भीतर विमर्श का स्तर गिरा है और नीति-आलोचना प्रायः नारेबाज़ी या वॉकआउट तक सीमित रह जाती है। ऐसे परिदृश्य में छाया मंत्रिमंडल (Shadow Cabinet) की अवधारणा भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ को संस्थागत, संगठित और प्रभावी बनाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकती है। यह लेख भारत में छाया मंत्रिमंडल की आवश्यकता, उसके संभा...

Gig Workers in India: Pain, Challenges and 10-Minute Delivery Crisis in Quick Commerce Sector

भारत में गिग वर्कर्स की पीड़ा: क्विक कॉमर्स और 10 मिनट डिलीवरी संकट का विश्लेषण डिजिटल क्रांति ने जिस सबसे बड़े सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को जन्म दिया है, उसका एक प्रमुख रूप है—गिग इकोनॉमी। ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म्स ने काम को “ऑन-डिमांड” बना दिया है, जहाँ नौकरी स्थायी नहीं, बल्कि अस्थायी कार्यों की शृंखला है। उबर, ब्लिंकिट, ज़ेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और ज़ोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म्स इस मॉडल के प्रतीक हैं। पहली नज़र में यह व्यवस्था युवाओं को लचीलापन, तुरंत कमाई और तकनीक से जुड़ने का अवसर देती है, लेकिन इसी चमकदार परत के नीचे गिग वर्कर्स की पीड़ा, असुरक्षा और संघर्ष की एक लंबी कहानी छिपी है। भारत में यह समस्या विशेष रूप से क्विक कॉमर्स सेक्टर में दिखाई देती है, जहाँ “10 मिनट में डिलीवरी” जैसे वादों ने उपभोक्ताओं को तो सुविधा दी, लेकिन डिलीवरी पार्टनर्स के जीवन को जोखिम में डाल दिया। यह केवल तेज डिलीवरी का सवाल नहीं है, बल्कि यह उस आर्थिक मॉडल का सवाल है जो मुनाफे को श्रमिकों की सुरक्षा से ऊपर रखता है। गिग इकोनॉमी: अवसर और विरोधाभास गिग इकोनॉमी का मूल आकर्षण है—लचीलापन। कोई भी व्यक्ति अपनी सु...

Trump’s “Board of Peace”: From Gaza Plan to Global Conflict Resolution

ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’: गाजा से वैश्विक संघर्ष समाधान तक एक नया प्रयोग प्रस्तावना इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में वैश्विक राजनीति एक बार फिर संक्रमण के दौर से गुजर रही है। बहुपक्षीय संस्थाएं—विशेषकर संयुक्त राष्ट्र—लगातार यह आरोप झेल रही हैं कि वे तेज़ी से बदलते संघर्षों के समाधान में प्रभावी नहीं रह गई हैं। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में गाजा संकट के समाधान के लिए एक 20-सूत्रीय योजना पेश की और उसके दूसरे चरण में एक नई संस्था— ‘बोर्ड ऑफ पीस’ —की स्थापना की। जो पहल गाजा तक सीमित मानी जा रही थी, वह जनवरी 2026 में अचानक वैश्विक संघर्ष समाधान के मंच में बदलने लगी। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, बहुपक्षीयता और अमेरिका की भूमिका पर नए प्रश्न खड़े हो गए हैं। गाजा संकट और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की उत्पत्ति 2024–25 में इजरायल-हमास संघर्ष ने गाजा को मानवीय त्रासदी के केंद्र में ला खड़ा किया। लगातार युद्ध, विस्थापन, भुखमरी और बुनियादी ढांचे का विनाश अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चुनौती बन गया। इसी संदर्भ में सितंबर 2025 में ट्रंप ने ‘कॉम्प्रिहेंसिव प्लान टू एंड द गाजा क...

Frederick Merz’s India Visit and the “Indo-Europe” Idea: A New Strategic Geography

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज़ की भारत यात्रा और 'इंडो-यूरोप' की अवधारणा: एक रणनीतिक विश्लेषण प्रस्तावना वैश्विक भू-राजनीति में तेजी से बदलाव आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा नीतियां और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आक्रामक कूटनीति ने दुनिया को अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। ऐसे समय में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज़ की जनवरी 2026 में भारत की दो-दिवसीय आधिकारिक यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक नई रणनीतिक भूगोल की शुरुआत का संकेत देती है। प्रसिद्ध स्तंभकार सी. राजा मोहन ने इसे "इंडो-यूरोप" की संज्ञा दी है। यह अवधारणा भारत और यूरोप (विशेषकर जर्मनी) के बीच गहन सहयोग के माध्यम से अमेरिका और चीन के प्रभुत्व को संतुलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह यात्रा 25 वर्षों के भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी और 75 वर्षों के राजनयिक संबंधों के उपलक्ष्य में हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यात्रा के प्रमुख परिणाम और समझौते मेर्ज़ की यात्रा 12-13 जनवरी 2026 को हुई, जो उनकी चांसलर बनने के बाद प...

India's Israel-Palestine Policy: From Traditional Palestinian Support to Strategic Balance with Israel (2026 Update)

भारत की इज़राइल-फिलिस्तीन विदेश नीति: नेहरू से मोदी तक इज़राइल–फिलिस्तीन विवाद बीसवीं सदी के सबसे जटिल और दीर्घकालिक भू-राजनीतिक संघर्षों में से एक है, जो 1947-48 के विभाजन और इज़राइल की स्थापना से लेकर आज के गाजा संकट तक फैला हुआ है। यह मुद्दा न केवल मध्य पूर्व की राजनीति को आकार देता है, बल्कि वैश्विक दक्षिण-उत्तरी संबद्धताओं, धार्मिक पहचान राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विमर्श का केंद्र बिंदु भी रहा है। भारत का रुख इस संदर्भ में विशेष रूप से अध्ययन-योग्य है, क्योंकि यह पारंपरिक रूप से फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय के समर्थक के रूप में जाना जाता है, जबकि हाल के दशकों में इज़राइल के साथ रणनीतिक साझेदारी भी गहराती जा रही है। यह द्वंद्व भारत की विदेश नीति की बहुआयामी प्रकृति को उजागर करता है, जिसमें ऐतिहासिक विरासत, वैचारिक आधार, भू-रणनीतिक हित, आर्थिक कारक और घरेलू राजनीतिक संवेदनशीलताएं शामिल हैं। इस विश्लेषण में हम इन आयामों का संतुलित परीक्षण करेंगे, विशेष रूप से 2023 के बाद की घटनाओं के प्रकाश में, जो दर्शाती हैं कि भारत किस प्रकार वैश्विक दबावों के बीच संतुलन साध रहा है। भारत की विदे...

Trump’s Gaza Peace Board and India’s Role: Strategic, Political and Ethical Analysis

ट्रंप की ‘गाजा शांति बोर्ड’ में भारत की संभावित भागीदारी: एक संतुलित विश्लेषण भूमिका इजरायल–हमास युद्ध के बाद गाजा पट्टी के भविष्य को लेकर वैश्विक स्तर पर कई योजनाएँ सामने आई हैं। इन्हीं में से एक है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस फॉर गाजा’ । इसका उद्देश्य गाजा में युद्धोत्तर शासन, सुरक्षा व्यवस्था और पुनर्निर्माण को एक अंतरराष्ट्रीय ढाँचे के तहत संचालित करना है। इस बोर्ड में भारत को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है। यह निमंत्रण केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका की स्वीकृति भी है। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या भारत को इस पहल का हिस्सा बनना चाहिए? और यदि हाँ, तो किस स्तर तक? यह लेख इसी प्रश्न का ऐतिहासिक, रणनीतिक और नैतिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करता है और अंत में एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करता है। पृष्ठभूमि: गाजा और ट्रंप की शांति योजना गाजा लंबे समय से इजरायल–फिलिस्तीन संघर्ष का केंद्र रहा है। हमास के नियंत्रण, इजरायली सैन्य कार्रवाइयों और मानवीय संकट ने इस क्षेत्र को वैश्विक चिंता का विषय बना दिया है। ट्रंप ...