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Germany’s Economic Slowdown vs India’s Rise: How Structural Shifts Are Redrawing Global Power Dynamics
जर्मनी की आर्थिक मंदी और भारत का उदय: संरचनात्मक परिवर्तनों का वैश्विक प्रभाव दुनिया की अर्थव्यवस्थाएँ आज जिस संक्रमणकाल से गुजर रही हैं, उसमें पारंपरिक औद्योगिक शक्तियाँ धीमी होती दिख रही हैं जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएँ अभूतपूर्व तेजी दर्ज कर रही हैं। यह परिदृश्य वैश्विक शक्ति-संतुलन को पुनर्परिभाषित कर रहा है। इसी व्यापक संदर्भ में जर्मनी की आर्थिक मंदी और भारत की उभरती आर्थिक शक्ति विशेष महत्व रखती है। जर्मनी, जो लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर की नाममात्र GDP के साथ विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित है, लगातार दो वर्षों की सुस्ती के बाद 2025 में महज़ 0.2% वृद्धि दर्ज करने की ओर बढ़ रहा है। यह स्थिति केवल एक अस्थायी गिरावट नहीं, बल्कि गहरे संरचनात्मक तनावों का संकेत है। वहीं, भारत लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ 7–7.5% की तेज वृद्धि दर बनाए हुए है और अगले पाँच वर्षों में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दहलीज पर पहुँच चुका है। जर्मनी की सुस्त अर्थव्यवस्था: गिरावट के पीछे गहरे कारण जर्मनी के आर्थिक संकट को समझने के लिए केवल वर्तमान आंकड़ों...