अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
भारत की आर्थिक वृद्धि का परिदृश्य: आईएमएफ की अक्टूबर 2025 रिपोर्ट से उदित आख्यान प्रस्तावना हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट केवल आंकड़ों की घोषणा नहीं करती, बल्कि वह विश्व अर्थव्यवस्था की नब्ज़ टटोलती है। अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट भी इसी परंपरा का हिस्सा है — लेकिन इस बार इसमें भारत की कहानी कुछ अलग ढंग से उभरती है। वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी टैरिफ नीति की धमकियों और यूरोपीय मंदी की पृष्ठभूमि में, भारत का 6.6% की अनुमानित वृद्धि दर हासिल करना आशा की किरण जैसा है। यह अनुमान अप्रैल 2025 की तुलना में 0.2 प्रतिशत अंक की वृद्धि दिखाता है, जबकि 2026 के लिए इसे मामूली रूप से घटाकर 6.2% किया गया है — मानो रिपोर्ट कह रही हो कि भारत की रफ़्तार मजबूत है, पर मंज़िल तक का रास्ता अब भी चुनौतीपूर्ण है। दुनिया भर में जहां 2025 की वैश्विक वृद्धि दर 3.2% और 2026 में 3.1% रहने की संभावना है, वहीं भारत का यह दोगुनी गति से बढ़ना केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि एक वैचारिक परिवर्तन का संकेत है — जहां विकास सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक, तकनीकी और ...