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Cracking UPSC Mains Through Current Affairs Analysis

करंट अफेयर्स में छिपे UPSC मेन्स के संभावित प्रश्न प्रस्तावना UPSC सिविल सेवा परीक्षा केवल तथ्यों का संग्रह नहीं है, बल्कि सोचने, समझने और विश्लेषण करने की क्षमता की परीक्षा है। प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) तथ्यों और अवधारणाओं पर केंद्रित होती है, लेकिन मुख्य परीक्षा (Mains) विश्लेषणात्मक क्षमता, उत्तर लेखन कौशल और समसामयिक घटनाओं की समझ को परखती है। यही कारण है कि  करंट अफेयर्स UPSC मेन्स की आत्मा माने जाते हैं। अक्सर देखा गया है कि UPSC सीधे समाचारों से प्रश्न नहीं पूछता, बल्कि घटनाओं के पीछे छिपे गहरे मुद्दों, नीतिगत पहलुओं और नैतिक दुविधाओं को प्रश्न में बदल देता है। उदाहरण के लिए, अगर अंतरराष्ट्रीय मंच पर जलवायु परिवर्तन की चर्चा हो रही है, तो UPSC प्रश्न पूछ सकता है —  “भारत की जलवायु नीति घरेलू प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करती है?” यानी, हर करंट इवेंट UPSC मेन्स के लिए एक संभावित प्रश्न छुपाए बैठा है। इस लेख में हम देखेंगे कि हाल के करंट अफेयर्स किन-किन तरीकों से UPSC मेन्स के प्रश्न बन सकते हैं, और विद्यार्थी इन्हें कैसे अपनी तै...

Iran’s Dual Reality: Social Liberalization and Political Repression

ईरान में सामाजिक प्रतिबंधों की ढील और राजनीतिक दमन की बढ़ती सख्ती: एक द्वंद्वात्मक विश्लेषण परिचय ईरान इन दिनों एक गहरे राजनीतिक और सामाजिक द्वंद्व से गुजर रहा है। एक ओर सरकार ने सार्वजनिक रूप से सामाजिक प्रतिबंधों, विशेष रूप से हिजाब कानून के प्रवर्तन में ढील देकर सुधारों का आभास कराया है; वहीं दूसरी ओर, राजनीतिक असहमति और नागरिक स्वतंत्रता पर नियंत्रण को पहले से अधिक सख्त बना दिया गया है। यह परिघटना न केवल ईरान की आंतरिक सत्ता-संरचना को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस प्रकार एक अधिनायकवादी शासन "नियंत्रित उदारीकरण" के माध्यम से असंतोष को शांत करने की कोशिश करता है, जबकि असहमति की जड़ों को व्यवस्थित रूप से कुचलता जाता है। रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट (2025) के अनुसार, ईरान में कार्यरत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुष्टि की है कि "धार्मिक शासन भय और निगरानी की नीति के ज़रिए किसी भी संभावित विद्रोह को समय से पहले निष्प्रभावी बनाने में जुटा है।" यह नीति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि सामाजिक ढील का उद्देश्य जनतांत्रिक उदारीकरण नहीं, बल्कि शासन की वैधता और स्था...

US Grants India a Six-Month Sanctions Waiver on Iran’s Chabahar Port: Strategic and Geopolitical Implications

भारत को ईरान के चाबाहार बंदरगाह पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की छूट: भू-राजनीतिक और रणनीतिक निहितार्थ परिचय भारत की विदेश नीति में चाबाहार बंदरगाह हमेशा से एक ऐसा प्रतीक रहा है जो उसकी रणनीतिक स्वायत्तता, क्षेत्रीय दृष्टि और पश्चिम एशिया के साथ गहराते संबंधों को दर्शाता है। 30 अक्टूबर 2025 को भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा यह घोषणा कि अमेरिका ने चाबाहार बंदरगाह परियोजना से जुड़े कार्यों पर लगाए गए प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट प्रदान की है , वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। यह छूट ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में ईरान-इजराइल तनाव , अफगानिस्तान में तालिबान शासन , तथा भारत-चीन प्रतिस्पर्धा क्षेत्रीय समीकरणों को जटिल बना रहे हैं। इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि वाशिंगटन भारत को न केवल एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में बल्कि एक विश्वसनीय स्थिरता प्रदाता के रूप में भी देख रहा है। इस विश्लेषण में हम इस छूट की पृष्ठभूमि, इसके भू-राजनीतिक महत्व, रणनीतिक लाभ, और संभावित चुनौतियों का अध्ययन करेंगे। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि चाबाहार बंदरगाह ईरान के सिस्त...

Iran’s Hijab Protests After Mahsa Amini: A Historic Turning Point in Social and Cultural Transformation

महसा अमीनी के बाद ईरान में अनिवार्य हिजाब के विरुद्ध खुला प्रतिरोध: सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन की दिशा में एक ऐतिहासिक विकास सारांश (Abstract) महसा अमीनी की मृत्यु के पश्चात् ईरान में उभरा “महिला, जीवन, स्वतंत्रता” आंदोलन अब केवल क्षणिक जनआक्रोश नहीं, बल्कि सामाजिक-राजनीतिक चेतना के दीर्घकालिक पुनर्गठन का प्रतीक बन चुका है। तीन वर्षों में यह प्रतिरोध राजधानी तेहरान से निकलकर छोटे नगरों और परंपरागत रूप से रूढ़िवादी क्षेत्रों तक फैल गया है। यह लेख स्थानीय समाचार, सोशल मीडिया सामग्री, साक्षात्कारों और उपलब्ध अकादमिक अध्ययनों के आधार पर यह विश्लेषण करता है कि अनिवार्य हिजाब-विरोध अब किस प्रकार एक व्यापक सामाजिक विमर्श में परिवर्तित हो गया है, जो न केवल लैंगिक समानता की मांग करता है बल्कि शासन की वैचारिक वैधता को भी चुनौती देता है। 1. परिचय (Introduction) सितंबर 2022 में महसा अमीनी, एक 22 वर्षीय कुर्द-ईरानी युवती, को ईरान की मोरैलिटी पुलिस ने कथित रूप से “अनुचित तरीके से हिजाब पहनने” के आरोप में हिरासत में लिया। कुछ ही घंटों बाद उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने न केवल घरेलू बल्कि वैश्वि...

Tensions in Iran-US Relations and the 1979 Islamic Revolution

  ईरान-अमेरिका संबंधों में तनाव और 1979 की इस्लामिक क्रांति 1979 में ईरान में हुई इस्लामिक क्रांति ने न केवल ईरान के राजनीतिक ढांचे को बदल दिया, बल्कि यह वैश्विक राजनीति पर भी गहरा असर डालने वाली घटना साबित हुई। इस क्रांति ने शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के शासन को समाप्त कर दिया, जो अमेरिका का करीबी सहयोगी था, और ईरान में एक इस्लामिक गणराज्य की स्थापना की। इस क्रांति के बाद, ईरान और अमेरिका के संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे, और यह तनाव आज भी जारी है, जैसा कि हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति द्वारा डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाए गए थे कि वे ईरान को "घुटनों पर लाने" की कोशिश कर रहे हैं। ईरान-अमेरिका संबंधों का ऐतिहासिक संदर्भ ईरान और अमेरिका के रिश्तों का इतिहास बहुत जटिल और उलझा हुआ है। 1950 के दशक में, अमेरिका ने ईरान में एक अहम भूमिका निभाई थी, खासकर शाह के शासन को मजबूत करने में। 1953 में, CIA ने एक ऑपरेशन के तहत ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्दिक को अपदस्थ कर दिया था, क्योंकि वे पश्चिमी तेल कंपनियों के हितों के खिलाफ जा रहे थे। इसके बाद शाह का शासन और मजबूत हुआ और उन्होंने पश्चिमी देशो...

FIFA World Cup 2026 Draw Analysis: Geopolitical Expansion, Key Groups, and Global Football Implications

The FIFA World Cup 2026 Draw: Geopolitical Expansion, Competitive Dynamics, and the Future of Global Football Governance Introduction FIFA विश्व कप केवल एक खेल आयोजन नहीं है; यह वैश्विक राजनीति, सांस्कृतिक कूटनीति, आर्थिक निवेश और पहचान की अभिव्यक्ति का सबसे प्रभावशाली मंच है। वर्ष 2026 का संस्करण इस परंपरा में एक ऐतिहासिक मोड़ प्रस्तुत करता है — 48 टीमों तक विस्तार, 104 मैच, और एक अभूतपूर्व त्रि-देशीय मेजबानी मॉडल (कनाडा, मेक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका)। दिसंबर 2025 में वॉशिंगटन डी.सी. के केनेडी सेंटर में हुए ड्रॉ ने न केवल समूहों का निर्धारण किया, बल्कि FIFA के दीर्घकालिक भू-राजनीतिक लक्ष्यों को भी रेखांकित किया — विशेषकर एशिया, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका में फुटबॉल के बाज़ार विस्तार की रणनीति को। विस्तार को लेकर खेल गुणवत्ता, खिलाड़ी कल्याण, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय असमानताओं पर उठाई गई चिंताओं के बीच, ड्रॉ समारोह इस वैश्विक आयोजन की बदलती प्रकृति का दर्पण साबित हुआ। The Ceremonial and Structural Context: Symbolism, Politics, and FIFA’s Strategic Vision ड्रॉ का आयोजन केनेडी स...

Iran-US Nuclear Tension: A Threat to Global Peace or a Test of Diplomacy?

🌍 ईरान-अमेरिका परमाणु तनाव: विश्व शांति के लिए खतरा या कूटनीति की परीक्षा? ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु विवाद एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई बमबारी की धमकी ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। ट्रंप का यह बयान, "अगर ईरान समझौता नहीं करता है, तो उसे ऐसी बमबारी का सामना करना पड़ेगा, जो उसने पहले कभी नहीं देखी होगी", केवल बयानबाजी नहीं है, बल्कि पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंका को और बल देता है। यह विवाद केवल दो देशों का नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी प्रभाव वैश्विक शांति, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकते हैं। 🔥 परमाणु तनाव की पृष्ठभूमि: ईरान का परमाणु कार्यक्रम 1950 के दशक में अमेरिका के सहयोग से शुरू हुआ था। हालांकि, 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद दोनों देशों के संबंध बिगड़ गए। 2015 में ओबामा प्रशासन के दौरान अमेरिका, ईरान और अन्य पांच शक्तियों (P5+1) के बीच जॉइंट कम्प्रिहेन्सिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) हुआ। इसके तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई थी और बदले में उस पर लगे आर्थि...

Gaza and the American Plan: A Fault-line in West Asian Politics

गाज़ा पर अमेरिकी योजना: भारत और पश्चिम एशिया की राजनीति में निहितार्थ Context वॉशिंगटन पोस्ट की एक हालिया रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि ट्रंप प्रशासन एक ऐसी योजना पर विचार कर रहा है जिसके अंतर्गत गाज़ा की पूरी आबादी को कहीं और स्थानांतरित किया जाएगा और संयुक्त राज्य अमेरिका सीधे तौर पर इस क्षेत्र का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेगा। यदि यह योजना अमल में आती है, तो यह न केवल फिलिस्तीन के राष्ट्रवादी आंदोलन के लिए बल्कि पूरे पश्चिम एशिया के सामरिक परिदृश्य के लिए भी एक भूकंपीय बदलाव होगा। The Humanitarian Dimension गाज़ा लंबे समय से मानवीय संकट का केंद्र रहा है। इज़राइल और हमास के बीच लगातार संघर्ष, आर्थिक नाकेबंदी और असुरक्षा ने यहाँ की जनता को संकटग्रस्त बना दिया है। पूरी आबादी का विस्थापन एक तरह से “जनसांख्यिकीय इंजीनियरिंग” होगी, जिसे अंतर्राष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार मानकों के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा जाएगा। यह कदम न केवल शरणार्थी संकट को बढ़ाएगा बल्कि अरब समाज में गहरी असंतुष्टि भी पैदा करेगा। Strategic Calculations Israel’s Security Gains : इस योजना से इज़राइल को गाज...

UPSC Current Affairs in Hindi : 14 April 2025

दैनिक समसामयिकी लेख संकलन: 14 अप्रैल 2025  1- भारत ने विकसित की अत्याधुनिक लेज़र-निर्देशित ऊर्जा हथियार प्रणाली: रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि परिचय: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और मील का पत्थर पार करते हुए अत्याधुनिक लेज़र-निर्देशित ऊर्जा हथियार प्रणाली (Laser-Directed Energy Weapon System) Mk-II(A) का सफल परीक्षण किया है। यह उपलब्धि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा रविवार को घोषित की गई। यह प्रणाली मिसाइलों, ड्रोन और अन्य छोटे प्रक्षेप्य को निष्क्रिय करने की अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है। तकनीकी विशेषताएं: DRDO द्वारा विकसित Mk-II(A) प्रणाली उच्च शक्ति की लेज़र ऊर्जा का प्रयोग कर लक्ष्यों को भौतिक रूप से नष्ट नहीं करती, बल्कि उन्हें अकार्यक्षम बनाकर निष्क्रिय कर देती है। इस प्रणाली के माध्यम से कम दूरी पर अत्यंत सटीकता के साथ उड़ती हुई वस्तुओं को रोका जा सकता है। इसमें लेज़र बीम को लक्षित वस्तु पर केंद्रित कर उसकी कार्यप्रणाली को प्रभावित किया जाता है। रणनीतिक महत्त्व: इस सफलता ने भारत को उन गिने-चुने देशों की श्रेणी में शामिल कर दिया है, जिनके पास उच्च-शक्त...

Iran’s Water Crisis: The Cost of Self-Sufficiency and the Road Ahead

ईरान का जल-संकट: आत्मनिर्भरता की कीमत और भविष्य की दिशा मध्य पूर्व की भू-राजनीति में ईरान हमेशा ऊर्जा, तेल और क्षेत्रीय प्रभाव के कारण सुर्खियों में रहा है। लेकिन आज देश एक ऐसे संकट से जूझ रहा है जो न तो जटिल कूटनीति से हल हो सकता है, न ही कठोर प्रतिबंधों से—यह है पानी की तेज़ी से घटती उपलब्धता। नवंबर 2025 तक स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि देश के कई बड़े बाँध लगभग सूख चुके हैं और 15 मिलियन आबादी वाला तेहरान अभूतपूर्व पेयजल संकट के द्वार पर खड़ा है। राष्ट्रपति द्वारा राजधानी को आंशिक रूप से खाली करने की संभावना तक पर विचार किया जाना इस त्रासदी की भयावहता को उजागर करता है। कहाँ चूका ईरान? ईरान का यह संकट अचानक नहीं आया; यह दशकों से तैयार हो रही वह आपदा है जो जलवायु परिवर्तन और नीतिगत भूलों के संगम से विस्फोटित हुई है। 1. सूखा—लेकिन केवल मौसम की गलती नहीं पिछले पाँच वर्षों में औसत वर्षा सदी के न्यूनतम स्तर पर पहुँच गई। कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य से आधी रह गई। लेकिन यदि ईरान का जल-तंत्र पहले से सुदृढ़ होता तो यह कमी इस कदर विनाशकारी साबित न होती। असली समस्या संरचनात्मक है—जिसे अ...

America's Grand Comeback or Political Complacency?

डोनाल्ड ट्रंप के "अमेरिका की ऐतिहासिक वापसी" के दावे का गहराई से विश्लेषण करता यह संपादकीय लेख उनकी "अमेरिका फर्स्ट" नीति, आर्थिक सुधार, वैश्विक कूटनीति और सामाजिक विभाजन पर पड़ने वाले प्रभावों की आलोचनात्मक समीक्षा करता है। क्या यह सच में अमेरिका की महान वापसी है, या केवल राजनीतिक आत्ममुग्धता? जानिए इस विस्तृत और संतुलित विश्लेषण में। अमेरिका की ऐतिहासिक वापसी या राजनीतिक आत्ममुग्धता? डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान कई विवादास्पद निर्णय लिए, लेकिन उनका एक बयान विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करता है—"अमेरिका अब ऐसी वापसी की कगार पर है, जैसी दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी होगी।" यह बयान न केवल उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है, बल्कि अमेरिका की राजनीतिक, आर्थिक, और सामाजिक स्थिति पर भी व्यापक बहस को जन्म देता है। क्या वास्तव में अमेरिका एक अभूतपूर्व वापसी कर रहा है, या यह केवल एक राजनीतिक दंभ है? इस लेख में हम इस दावे का गहराई से विश्लेषण करेंगे और इसकी वास्तविकता को समझने की कोशिश करेंगे। ट्रंप का राष्ट्रवाद और "अमेरिका फर्स्ट" नीति डोन...

Iran Protests 2025–2026: Economic Crisis, Currency Crash and Rising Public Unrest

2025–2026 ईरान विरोध प्रदर्शन: आर्थिक संकट से उपजी जन-आक्रोश की नई लहर प्रस्तावना दिसंबर 2025 के उत्तरार्ध में शुरू होकर जनवरी 2026 तक जारी रहने वाले ईरान के विरोध प्रदर्शन केवल कुछ दिनों की असंतोष-लहर नहीं थे, बल्कि वे उस गहरे आर्थिक और सामाजिक संघर्ष का विस्फोट थे जो वर्षों से भीतर-ही-भीतर पनप रहा था। राजधानी तेहरान के बाजारों में दुकानदारों द्वारा शुरू हुआ यह आंदोलन जल्द ही छात्रों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग तक फैल गया। यह उभार 2022 के महसा अमीनी विरोधों के बाद सबसे बड़ा और सबसे व्यापक जन-आंदोलन माना जा रहा है, जहाँ आर्थिक पीड़ा राजनीतिक अविश्वास में बदलती हुई दिखाई दी। आर्थिक संकट: असंतोष की जड़ ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से प्रतिबंधों, सीमित निवेश, तेल-राजस्व की अनिश्चितता और संस्थागत अक्षमताओं का बोझ ढो रही है। 2025 में इज़रायल के साथ 12-दिवसीय संघर्ष, वैश्विक कूटनीतिक दबाव और ऊर्जा व्यापार में गिरावट ने स्थिति को और नाजुक बना दिया। दिसंबर 2025 के अंत तक ईरानी रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से गिरकर लगभग 1.42–1.45 मिलियन रियाल प्रति डॉलर के स्त...

US–Iran Tensions Rise After Trump’s Warning to ‘Protect Iranian Protesters’: A Geopolitical Analysis

ट्रंप की ‘प्रदर्शनकारियों को बचाने’ की चेतावनी और ईरानी प्रतिक्रिया: वैश्विक शक्ति-राजनीति के बीच उभरता तनाव जनवरी 2026 की शुरुआत में ही अमेरिका-ईरान संबंध नई तल्ख़ी में प्रवेश करते दिखाई दे रहे हैं। 2 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में सख्त लहजे में बयान देते हुए कहा कि यदि ईरानी शासन “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है”, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उन्हें “बचाने आएगा” और “हम लॉक्ड एंड लोडेड हैं” — यानी सैन्य प्रतिक्रिया के लिए तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान गहरे आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी और मुद्रा-संकट से गुजर रहा है, जिसके कारण देश-भर में असंतोष की लहर फैल चुकी है। आर्थिक संकट से उपजा असंतोष: विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए ये प्रदर्शन शुरुआत में महँगाई और गिरती क्रय-शक्ति के खिलाफ आर्थिक आक्रोश के रूप में उभरे। ईरानी रियाल ऐतिहासिक रूप से कमजोर हुआ, डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत 1.4–1.5 मिलियन रियाल प्रति डॉलर के स्तर तक पहुँच गई। इसके...

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Why India Needs a Shadow Cabinet: Strengthening the Role of Opposition in a Modern Democracy

वर्तमान में भारत में विपक्ष की आवाज़ को सशक्त बनाने हेतु छाया मंत्रिमंडल की आवश्यकता एक समग्र अकादमिक विश्लेषण परिचय लोकतंत्र की आत्मा सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन में निहित होती है। जहां सत्तारूढ़ दल शासन, नीति-निर्माण और प्रशासन का दायित्व निभाता है, वहीं विपक्ष का कार्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों की समीक्षा, आलोचना और वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना होता है। एक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष ‘नकारात्मक शक्ति’ नहीं, बल्कि रचनात्मक नियंत्रक (Constructive Watchdog) की भूमिका निभाता है। भारत, जो स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र घोषित करता है, आज एक ऐसे राजनीतिक चरण से गुजर रहा है जहाँ विपक्ष की भूमिका कमजोर, बिखरी हुई और प्रतिक्रियात्मक दिखाई देती है। संसद के भीतर विमर्श का स्तर गिरा है और नीति-आलोचना प्रायः नारेबाज़ी या वॉकआउट तक सीमित रह जाती है। ऐसे परिदृश्य में छाया मंत्रिमंडल (Shadow Cabinet) की अवधारणा भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ को संस्थागत, संगठित और प्रभावी बनाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकती है। यह लेख भारत में छाया मंत्रिमंडल की आवश्यकता, उसके संभा...

Yemen Crisis 2025: Saudi-UAE Rift Deepens with Mukalla Strike & UAE Withdrawal

यमन संकट का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: सऊदी–यूएई मतभेद और बदलता क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रस्तावना यमन का संघर्ष केवल समकालीन सत्ता-संघर्ष की कहानी नहीं है; यह औपनिवेशिक विरासत, जनजातीय राजनीति, वैचारिक ध्रुवीकरण, क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता और भू-राजनीतिक हस्तक्षेपों से उपजा एक दीर्घकालिक ऐतिहासिक संकट है। दिसंबर 2025 में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच उत्पन्न हालिया तनाव—जिसमें सऊदी-नीत गठबंधन ने मुकल्ला बंदरगाह पर यूएई से जुड़े हथियारों की शिपमेंट को लक्ष्य बनाकर हवाई हमला किया, और उसके बाद यूएई ने अपनी सेना की वापसी की घोषणा की—इस जटिल इतिहास की अगली कड़ी है। इस घटना ने यमन और खाड़ी क्षेत्र की राजनीति को नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां पूर्व सहयोगी अब प्रतिस्पर्धी बन चुके हैं। इस निबंध का उद्देश्य है—यमन संकट की ऐतिहासिक जड़ों, आंतरिक सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना, क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका और हालिया घटनाओं के व्यापक निहितार्थों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करना। हम ऐतिहासिक तथ्यों, हाल की घटनाओं और सांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर इस संकट को अधिक स्पष्ट रूप से समझेंगे, जिसमें क्...

India vs Reliance-BP: KG Basin Gas Production Dispute — Energy Policy, Arbitration and Resource Governance Analysis

भारत सरकार बनाम रिलायंस–बीपी: कृष्णा-गोदावरी बेसिन गैस उत्पादन विवाद का एक व्यापक विश्लेषण प्रस्तावना भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आयात-निर्भरता में कमी और स्वदेशी उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करने के संदर्भ में कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन का D6 ब्लॉक एक ऐतिहासिक परियोजना के रूप में देखा गया। वर्ष 2000 में इस ब्लॉक को उत्पादन-साझेदारी अनुबंध (PSC) के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज को आवंटित किया गया, जिसे भारत का पहला बड़ा गहरे समुद्री गैस-उत्पादन प्रोजेक्ट माना गया था। इससे न केवल घरेलू गैस आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद थी, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में निजी-सार्वजनिक भागीदारी की नई संभावनाएँ भी दिखाई दी थीं। लेकिन समय के साथ यह परियोजना तकनीकी, आर्थिक और संविदात्मक विवादों में घिरती चली गई। नवीनतम घटनाक्रम (दिसंबर 2025) में भारत सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी साझेदार कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम (BP) से कथित उत्पादन-कमी के लिए 30 अरब डॉलर से अधिक के मुआवजे की मांग की है। यह विवाद 2016 से एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित है, जिसकी अंतिम सुनवाई नवंबर 2025 में पूरी हुई, और निर्णय 2026 के ...

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वैश्विक सहभागिता और राष्ट्रीय हित: भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक जिम्मेदारी का संतुलन परिचय दिसंबर 2025 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की जर्मनी यात्रा ने भारतीय राजनीति में एक नए विमर्श को जन्म दिया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने प्रोग्रेसिव अलायंस की बैठक में भाग लिया — एक ऐसा वैश्विक मंच जो प्रगतिशील, समाजवादी और सामाजिक-लोकतांत्रिक दलों को जोड़ता है। भाजपा ने इस भागीदारी की तीखी आलोचना करते हुए इसे “भारत-विरोधी वैश्विक नेटवर्क” से जुड़ाव के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि कांग्रेस का तर्क है कि यह लोकतांत्रिक संवाद और वैश्विक सहयोग की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है। यह विवाद केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि व्यापक प्रश्न खड़ा करता है — क्या विपक्ष की वैश्विक भागीदारी लोकतांत्रिक विमर्श को मजबूत करती है, या यह राष्ट्रीय हितों एवं राजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच टकराव को और गहरा करती है? अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विपक्ष की भूमिका: सहयोग या ध्रुवीकरण? अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मंच विपक्षी दलों को अपने दृष्टिकोण को विश्व समुदाय के सामने रखने का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे संवाद— वैश्विक अर्थव्...

One China Policy & Strategic Ambiguity: The Taiwan Strait Crisis Explained

One China Policy, Strategic Ambiguity और ताइवान स्ट्रेट में उभरता संकट (अमेरिका–चीन–ताइवान संबंधों का एक एकीकृत भू-राजनीतिक विश्लेषण) भूमिका: एक द्वीप, अनेक वैश्विक तनाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ भू-क्षेत्र ऐसे होते हैं जो अपने भौगोलिक आकार से कहीं अधिक रणनीतिक भार वहन करते हैं। ताइवान ऐसा ही एक द्वीप है—जिसकी भौगोलिक स्थिति सीमित, किंतु राजनीतिक, आर्थिक और वैचारिक प्रासंगिकता वैश्विक है। 21वीं सदी में जब विश्व व्यवस्था बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है और अमेरिका–चीन प्रतिद्वंद्विता वैश्विक राजनीति की केंद्रीय धुरी बन चुकी है, तब ताइवान केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं रह जाता, बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन, तकनीकी प्रभुत्व और वैचारिक संघर्ष का प्रतीक बन जाता है। इस त्रिकोणीय संबंध को समझने के लिए दो अवधारणाएँ निर्णायक हैं— One China Policy और Strategic Ambiguity । दशकों तक इन दोनों ने युद्ध को टालने और Status Quo बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किंतु हालिया घटनाएँ, विशेषकर 18 दिसंबर 2025 को अमेरिका द्वारा ताइवान को 11.1 अरब डॉलर की हथियार बिक्री , यह संकेत देती हैं कि यह संतुलन...

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UPSC अभ्यर्थियों के लिए प्रेरक संदेश — 2026 की नई उड़ान, नई सोच, नया संकल्प UPSC की यात्रा किसी साधारण मंज़िल की यात्रा नहीं होती। यह वह मार्ग है जहाँ धैर्य, आत्मविश्वास, संघर्ष, त्याग, अनुशासन और निरंतरता—सबकी एक साथ परीक्षा होती है। कई बार यह रास्ता लंबा लगता है, कई बार ऐसा लगता है कि सब छूट रहा है, पर याद रखिए— जो रास्ता कठिन होता है, वही आपको असाधारण बनाता है। 2026 आपके लिए सिर्फ कैलेंडर का नया पन्ना नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत का अवसर है। 🔴 1️⃣ नकारात्मकता से मुक्ति — “Delete negative people & thoughts” UPSC की तैयारी के दौरान सबसे बड़ा संघर्ष बाहरी दुनिया से नहीं, बल्कि अपनी भीतरी शंकाओं से होता है। लोग कहेंगे — 👉 “बहुत मुश्किल है” 👉 “तुमसे नहीं होगा” 👉 “इतने लोग पास नहीं होते” लेकिन वे आपको नहीं जानते — वे आपकी मेहनत, जिद, संघर्ष और जुनून नहीं जानते। इसलिए — ✔ तुलना मत कीजिए ✔ आलोचनाओं को महत्व मत दीजिए ✔ अपनी यात्रा पर फोकस रखिए 🛑 नकारात्मक लोगों से दूरी ही नहीं, 💡 नकारात्मक विचारों को भी मन से निकालना सीखिए। याद रखें — आपका लक्ष्य आपका है...

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भारत की अर्थव्यवस्था: जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना प्रस्तावना 31 दिसंबर 2025 भारत की आर्थिक यात्रा के इतिहास में एक उल्लेखनीय पड़ाव के रूप में दर्ज हो गया। सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत की नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (Nominal GDP) $4.18 ट्रिलियन के स्तर पर पहुँच गई है, जिसके साथ ही भारत ने जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान प्राप्त कर लिया। यह उपलब्धि संयोग नहीं, बल्कि लगभग एक दशक से जारी नीतिगत सुधारों, मजबूत घरेलू मांग, स्थिर मैक्रो-प्रबंधन और उद्यमशील ऊर्जा का परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, विशेषकर IMF के पूर्वानुमानों ने भी संकेत दिया था कि संरचनात्मक सुस्ती और मुद्रा-दबाव से जूझ रही जापानी अर्थव्यवस्था की तुलना में भारत की वृद्धि तेज बनी रहेगी। इस संदर्भ में 2025 को वास्तव में एक “परिभाषित वर्ष” कहा जा सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की वर्तमान स्थिति 2025 के अंत तक नाममात्र GDP के आधार पर वैश्विक परिदृश्य broadly इस प्रकार उभरता है— संयुक्त राज्य अमेरिका — लगभग $30.5 ट्रिलियन चीन — लगभग $...

US–Iran Tensions Rise After Trump’s Warning to ‘Protect Iranian Protesters’: A Geopolitical Analysis

ट्रंप की ‘प्रदर्शनकारियों को बचाने’ की चेतावनी और ईरानी प्रतिक्रिया: वैश्विक शक्ति-राजनीति के बीच उभरता तनाव जनवरी 2026 की शुरुआत में ही अमेरिका-ईरान संबंध नई तल्ख़ी में प्रवेश करते दिखाई दे रहे हैं। 2 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में सख्त लहजे में बयान देते हुए कहा कि यदि ईरानी शासन “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है”, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उन्हें “बचाने आएगा” और “हम लॉक्ड एंड लोडेड हैं” — यानी सैन्य प्रतिक्रिया के लिए तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान गहरे आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी और मुद्रा-संकट से गुजर रहा है, जिसके कारण देश-भर में असंतोष की लहर फैल चुकी है। आर्थिक संकट से उपजा असंतोष: विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए ये प्रदर्शन शुरुआत में महँगाई और गिरती क्रय-शक्ति के खिलाफ आर्थिक आक्रोश के रूप में उभरे। ईरानी रियाल ऐतिहासिक रूप से कमजोर हुआ, डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत 1.4–1.5 मिलियन रियाल प्रति डॉलर के स्तर तक पहुँच गई। इसके...

India’s Need to Extend BrahMos Missile Range: Strategic Security and Power Balance Analysis

भारत को ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता क्यों बढ़ानी चाहिए: राष्ट्रीय सुरक्षा, शक्ति-संतुलन और भविष्य की रणनीति प्रस्तावना 21वीं सदी में युद्ध-कौशल केवल पारंपरिक सैन्य शक्ति का प्रश्न नहीं रह गया है; अब यह प्रौद्योगिकी, गति, सटीकता और रणनीतिक दूरी के संयोजन से निर्धारित होता है। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में, भारत जैसी उभरती शक्ति के लिए ऐसी मिसाइल प्रणालियाँ अनिवार्य हो जाती हैं, जो कम से कम प्रतिक्रिया समय , उच्च घातकता और लंबी दूरी तक असरदार मारक क्षमता प्रदान कर सकें। इसी क्रम में ब्रह्मोस मिसाइल, भारत-रूस के संयुक्त उद्यम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है—और इसकी रेंज में विस्तार, आज केवल तकनीकी उन्नयन नहीं बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है। ब्रह्मोस अपनी गति, स्थिरता और सटीकता के कारण पहले ही विश्व की सबसे भरोसेमंद सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है। अब जब इसका विस्तारित-रेंज संस्करण 450 से आगे बढ़कर 800 किलोमीटर तक परीक्षण की दिशा में अग्रसर है, तो यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से प्रासंगिक हो जाता है— भारत को इसकी मारक क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता क्यों है? ब्रह्मोस: तकनीक से ...

India–Pakistan Confidence Building Measures: Nuclear Sites & Prisoners List Exchange Amid Tensions

भारत–पाकिस्तान संबंधों में विश्वास-निर्माण की निरंतरता: परमाणु स्थापनाओं और बंदियों की सूचियों का आदान-प्रदान परिचय भारत और पाकिस्तान दक्षिण एशिया की सुरक्षा संरचना के केंद्र में स्थित दो परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। इतिहास गवाह है कि दोनों के संबंधों में युद्ध, संघर्ष, सीमा झड़पें और राजनीतिक अविश्वास की गहरी परतें रही हैं। 1947, 1965, 1971 और 1999 के युद्धों से लेकर समय-समय पर हुए सैन्य तनाव तक, द्विपक्षीय रिश्ते बार-बार टकराव के मोड़ पर पहुँचे हैं। इसके बावजूद कुछ ऐसे विश्वास-निर्माण उपाय (Confidence Building Measures – CBMs) हैं, जो राजनीतिक तनाव के चरम समय में भी जारी रहे हैं। 1 जनवरी 2026 को दोनों देशों द्वारा परमाणु स्थापनाओं तथा बंदियों की सूचियों के आदान-प्रदान का कदम इसी निरंतरता का प्रमाण है। यह आदान-प्रदान ऐसे समय हुआ है जब मई 2025 के चार दिवसीय सैन्य टकराव — जिसे भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया — ने संबंधों को अभूतपूर्व तलहटी तक पहुँचा दिया था। फिर भी, इस परिस्थिति में भी ऐसे तंत्रों का जारी रहना अपने-आप में महत्वपूर्ण संदेश देता है। परमाणु स्थापनाओं पर हमले न कर...