2025–2026 ईरान विरोध प्रदर्शन: आर्थिक संकट से उपजी जन-आक्रोश की नई लहर
प्रस्तावना
दिसंबर 2025 के उत्तरार्ध में शुरू होकर जनवरी 2026 तक जारी रहने वाले ईरान के विरोध प्रदर्शन केवल कुछ दिनों की असंतोष-लहर नहीं थे, बल्कि वे उस गहरे आर्थिक और सामाजिक संघर्ष का विस्फोट थे जो वर्षों से भीतर-ही-भीतर पनप रहा था। राजधानी तेहरान के बाजारों में दुकानदारों द्वारा शुरू हुआ यह आंदोलन जल्द ही छात्रों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग तक फैल गया। यह उभार 2022 के महसा अमीनी विरोधों के बाद सबसे बड़ा और सबसे व्यापक जन-आंदोलन माना जा रहा है, जहाँ आर्थिक पीड़ा राजनीतिक अविश्वास में बदलती हुई दिखाई दी।
आर्थिक संकट: असंतोष की जड़
ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से प्रतिबंधों, सीमित निवेश, तेल-राजस्व की अनिश्चितता और संस्थागत अक्षमताओं का बोझ ढो रही है। 2025 में इज़रायल के साथ 12-दिवसीय संघर्ष, वैश्विक कूटनीतिक दबाव और ऊर्जा व्यापार में गिरावट ने स्थिति को और नाजुक बना दिया।
दिसंबर 2025 के अंत तक ईरानी रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से गिरकर लगभग 1.42–1.45 मिलियन रियाल प्रति डॉलर के स्तर पर पहुँच गया। यह उस दौर से कई गुना खराब स्थिति को दर्शाता है जब 2022 में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के कार्यभार संभालने के समय रियाल लगभग 4.30 लाख प्रति डॉलर के आसपास था।
तेज़ी से बढ़ती महँगाई ने आम लोगों की जिंदगी को गहराई से प्रभावित किया। दिसंबर 2025 में मुद्रास्फीति 42% के पार पहुँच गई — खाद्य पदार्थों, ईंधन, दवाई और आवश्यक वस्तुओं की लागत सामान्य परिवारों की पहुँच से बाहर जाने लगी। सरकार द्वारा प्रस्तुत 2026 के बजट में करों में 62% वृद्धि और सीमित तेल-राजस्व का अनुमान जनता के आक्रोश को और भड़काने वाला साबित हुआ।
यह स्पष्ट हो चुका था कि समस्या केवल आर्थिक नहीं रही — यह सामाजिक असमानता, प्रशासनिक अविश्वसनीयता और शासन-व्यवस्था से गहरे असंतोष का प्रश्न बन चुकी थी।
प्रदर्शन का विकास: बाज़ार से विश्वविद्यालय तक
28 दिसंबर 2025 को तेहरान के जुमहूरी क्षेत्र में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर विरोध की शुरुआत की। यह प्रतीकात्मक कदम जल्द ही सामूहिक स्वरूप ले बैठा। अगले ही दिन तेहरान के ग्रैंड बाज़ार के व्यापारी भी इसमें शामिल हो गए — वही बाज़ार जिसे कभी इस्लामी क्रांति का सामाजिक आधार माना जाता था।
सड़कों पर गूँजते नारे आंदोलन के चरित्र को स्पष्ट कर रहे थे —
“डरो मत, हम सब एक साथ हैं”
“आजादी”
“तानाशाह मुर्दाबाद”
चंद दिनों में यह उभार तेहरान की सीमाएँ लाँघकर इस्फहान, शिराज और मशहद जैसे प्रमुख शहरों तक फैल गया। विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रों ने विरोध-सभा आयोजित कीं, अभिव्यक्ति की मांग और आर्थिक सुधार की माँग को खुलकर सामने रखा।
कुछ स्थानों पर प्रदर्शन उग्र भी हुए — परन्तु अधिकांश जगहों पर यह आंदोलन संगठित, शांतिपूर्ण और प्रतिरोध-आधारित नागरिक भागीदारी का रूप लिए रहा।
सरकारी प्रतिक्रिया: नियंत्रण और संवाद के बीच संतुलन
सरकार ने प्रारंभिक चरण में दंगा-नियंत्रण बल, आँसू गैस और गिरफ्तारियों का सहारा लिया, परंतु व्यापक दमन से बचने का प्रयास भी दिखाई दिया। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने विरोधियों के साथ संवाद की बात कही और मुद्रा-विनियोजन संकट के मद्देनज़र केंद्रीय बैंक के गवर्नर मोहम्मद रेज़ा फारजिन का इस्तीफ़ा स्वीकार करते हुए नए गवर्नर की नियुक्ति की।
31 दिसंबर को कई प्रांतों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया — उद्देश्य था भीड़ के जमाव को कम करना और तनाव घटाना।
फिर भी विरोध की धारा यह संकेत दे रही थी कि केवल प्रशासनिक कदम पर्याप्त नहीं होंगे; नागरिकों को विश्वसनीय आर्थिक रोडमैप और संरचनात्मक सुधारों का भरोसा चाहिए।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य: सत्ता-संरचना पर प्रश्नचिन्ह
शुरुआत आर्थिक दर्द से हुई, लेकिन आंदोलन धीरे-धीरे शासन-व्यवस्था के प्रति असंतोष के व्यापक विमर्श में बदल गया।
विशेषतः व्यापारी वर्ग की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण थी — वही वर्ग जो दशकों से स्थिरता और वैधता का आधार माना जाता था।
छात्र और युवा पीढ़ी, जिनकी भागीदारी 2022 के विरोधों का प्रमुख आधार रही, एक बार फिर सड़कों पर थी। इससे स्पष्ट संकेत गया कि:
- आर्थिक संकट ने राजनीतिक वैधता को चुनौती दी है
- सामाजिक अनुबंध (State–Citizen trust) दरक रहा है
- पीढ़ीगत आकांक्षाएँ बदल चुकी हैं
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और पश्चिमी देशों की प्रतिक्रियाएँ भी चर्चा में रहीं, हालांकि ईरानी नेतृत्व इसे बाहरी हस्तक्षेप के आख्यान के रूप में प्रस्तुत करता रहा।
भविष्य की दिशाएँ: संकट, संभावना और पुनर्निर्माण
जनवरी 2026 तक आंदोलन यह स्पष्ट संदेश दे चुका है कि ईरान की समस्या केवल मुद्रा अवमूल्यन या महँगाई का सांख्यिकीय प्रश्न नहीं — यह रोज़गार, गरिमा, समानता और राजनीतिक सहभागिता का प्रश्न है।
यदि सरकार:
- पारदर्शी आर्थिक सुधार
- सामाजिक सुरक्षा उपाय
- संस्थागत उत्तरदायित्व
- और वास्तविक संवाद
की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती, तो यह असंतोष लंबे समय तक simmering unrest के रूप में कायम रह सकता है।
यह स्थिति न केवल ईरान के आंतरिक स्थायित्व के लिए, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन और वैश्विक राजनीति के लिए भी गहरे निहितार्थ रखती है।
निष्कर्ष
2025–2026 के ईरानी विरोध प्रदर्शन उस ऐतिहासिक क्षण की तरह हैं, जहाँ आर्थिक दबाव सामाजिक पीड़ा में और सामाजिक पीड़ा राजनीतिक प्रश्नों में बदल जाती है। यह आंदोलन एक चेतावनी भी है — कि यदि शासन संरचनाएँ समय के साथ स्वयं को रूपांतरित नहीं करतीं, तो परिवर्तन सड़क से माँगा जाता है।
With Reuters Inputs
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