धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट के फैसले, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और सामाजिक प्रभावों का गहन विश्लेषण धार की ऐतिहासिक भोजशाला पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का निर्णय केवल एक धार्मिक स्थल से जुड़ा कानूनी फैसला नहीं है, बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक चेतना, न्यायिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन की गंभीर परीक्षा भी है। सदियों से विवादों, दावों और भावनात्मक बहसों के केंद्र में रही भोजशाला अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां न्यायपालिका ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। इस फैसले ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम समाधान का मार्ग अदालतों और संविधान से होकर ही गुजरता है। भोजशाला का इतिहास केवल एक इमारत का इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जिसमें ज्ञान, शिक्षा और आस्था का गहरा समन्वय दिखाई देता है। माना जाता है कि परमार वंश के महान राजा भोज के काल में यह स्थान विद्या और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र था। समय के साथ राजनीतिक और ऐतिहासिक परिवर्तनों ने इसकी पहचान को विवादों में बदल...
Economic Survey 2025-26 Analysis: Global Uncertainty vs India’s Strong Domestic Economy | Hindi Editorial
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: मजबूत घरेलू नींव पर वैश्विक अनिश्चितताओं का मुकाबला भारत की अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में महज वृद्धि की गति नहीं दिखा रही, बल्कि स्थिरता, लचीलापन और आत्मविश्वास की एक नई कहानी भी गढ़ रही है। 29 जनवरी को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 इसी आत्मविश्वास का प्रमाण-पत्र है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के नेतृत्व में तैयार यह दस्तावेज घरेलू आर्थिक मजबूती को रेखांकित करता है, साथ ही वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के प्रति सतर्क रहने की जरूरत पर भी जोर देता है। सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2026-27 के लिए यह 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। भारत की संभावित वृद्धि दर को अब 7 प्रतिशत तक संशोधित किया गया है, जो तीन वर्ष पहले के 6.5 प्रतिशत के अनुमान से काफी बेहतर है। यह प्रदर्शन ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मौद्रिक नीतियों की सख्ती से जूझ रही है। भारत घरेलू मांग, निजी उपभोग और सार्वजनिक पूंजी...