अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
📰 सुप्रीम कोर्ट का वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर फैसला: आसान शब्दों में पृष्ठभूमि – वक्फ क्या होता है? वक्फ वह संपत्ति है जिसे मुस्लिम लोग धार्मिक, पवित्र या समाज-सेवा के काम के लिए स्थायी रूप से दान कर देते हैं। इसमें मस्जिदें, कब्रिस्तान, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल या गरीबों की मदद के लिए जमीन और इमारतें शामिल हो सकती हैं। भारत में लगभग 9.4 लाख वक्फ संपत्तियां और 6 लाख एकड़ जमीन वक्फ के अंतर्गत आती हैं। 1995 में वक्फ अधिनियम बना था, लेकिन समय के साथ इसमें कई समस्याएं आईं—जैसे भ्रष्टाचार, अतिक्रमण और संपत्तियों पर विवाद। इसीलिए सरकार ने 2025 में इस कानून में बदलाव किए। 2025 में क्या बड़े बदलाव हुए? बिना लिखित दस्तावेज वाली वक्फ संपत्ति (Waqf-by-user) मान्यता खत्म। जिला कलेक्टरों को वक्फ विवाद निपटाने की शक्ति देने का प्रस्ताव। वक्फ बोर्ड और परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल करना । वक्फ बनाने के लिए कम से कम 5 साल मुस्लिम होने की शर्त । सरकार का तर्क था कि इससे पारदर्शिता आएगी, गलत दावों पर रोक लगेगी और संपत्ति का सही उपयोग होगा। लेकिन कई लोगों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता (...