अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
अबॉटाबाद का रहस्य: एक राष्ट्रीय अपमान की कहानी सन् 2011 की एक काली रात थी। आसमान में बादल छाए थे, और पाकिस्तान के अबॉटाबाद शहर में सन्नाटा पसरा था। यह छोटा-सा शहर, जो हरे-भरे पहाड़ों और सैन्य अकादमी की शान के लिए जाना जाता था, उस रात दुनिया की नजरों में आ गया। एक हवेली, जो बाहर से साधारण-सी दिखती थी, लेकिन अंदर छिपा था दुनिया का सबसे खूंखार आतंकवादी—ओसामा बिन लादेन। और उस रात, अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस के हेलीकॉप्टरों ने चुपके से पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश किया, बिना किसी को खबर दिए। कुछ ही घंटों में, बिन लादेन मारा गया, और उसका शव समुद्र की गहराइयों में दफन हो गया। लेकिन इस घटना ने पाकिस्तान को एक ऐसे तूफान में धकेल दिया, जिसे फरहतुल्लाह बाबर अपनी किताब ‘द ज़रदारी प्रेसीडेंसी: नाउ इट मस्ट बी टोल्ड’ में "राष्ट्रीय अपमान" कहते हैं। एक हवेली, एक रहस्य अबॉटाबाद कोई जंगल या गुफा नहीं था। यह एक शांत शहर था, जहां सैन्य अकादमी के जवान परेड करते थे और बच्चे स्कूल जाते थे। लेकिन उस हवेली में, जो सैन्य अकादमी से बस कुछ कदम दूर थी, बिन लादेन सालों से छिपा था। ऊंची दीवारें, कांटेदार तार, ...