हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
भारत-यूरोपीय संघ संबंध: व्यापार से रणनीतिक गठबंधन तक एक नया अध्याय वैश्विक व्यवस्था में बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ते कदमों के बीच भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के संबंध एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। जहां एक ओर अमेरिका की नीतिगत अनिश्चितताएँ, चीन की आक्रामक भू-राजनीति और रूस-यूक्रेन युद्ध ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को पुनर्गठित करने की मजबूरी पैदा की है, वहीं भारत और ईयू दोनों ही एक-दूसरे को रणनीतिक स्थिरता का विश्वसनीय स्रोत मान रहे हैं। जनवरी 2026 में ईयू के शीर्ष नेताओं—यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा—की भारत यात्रा, गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उनकी उपस्थिति और 27 जनवरी को होने वाला 16वाँ भारत-ईयू शिखर सम्मेलन इस परिवर्तन के सबसे ठोस प्रमाण हैं। यह यात्रा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं है। यह उस गुणात्मक उन्नयन का प्रतीक है, जिसमें द्विपक्षीय संबंध व्यापार-केंद्रित साझेदारी से आगे बढ़कर एक समग्र रणनीतिक गठबंधन में तब्दील हो रहे हैं। वर्षों से लंबित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अब “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स” के रूप में चर्चित ह...