धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट के फैसले, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और सामाजिक प्रभावों का गहन विश्लेषण धार की ऐतिहासिक भोजशाला पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का निर्णय केवल एक धार्मिक स्थल से जुड़ा कानूनी फैसला नहीं है, बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक चेतना, न्यायिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन की गंभीर परीक्षा भी है। सदियों से विवादों, दावों और भावनात्मक बहसों के केंद्र में रही भोजशाला अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां न्यायपालिका ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। इस फैसले ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम समाधान का मार्ग अदालतों और संविधान से होकर ही गुजरता है। भोजशाला का इतिहास केवल एक इमारत का इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जिसमें ज्ञान, शिक्षा और आस्था का गहरा समन्वय दिखाई देता है। माना जाता है कि परमार वंश के महान राजा भोज के काल में यह स्थान विद्या और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र था। समय के साथ राजनीतिक और ऐतिहासिक परिवर्तनों ने इसकी पहचान को विवादों में बदल...
भारत वैश्विक मंदी के दौर में सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, ऊँची ब्याज दरों, व्यापारिक प्रतिबंधों और नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच धीमी गति से आगे बढ़ रही है। ऐसे परिदृश्य में भारत न केवल अपनी मजबूत घरेलू मांग पर टिका हुआ है, बल्कि विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास दर बनाए रखकर वैश्विक आर्थिक स्थिरता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनता जा रहा है। विश्व बैंक की Global Economic Prospects रिपोर्ट (जनवरी 2026) के अनुसार, भारत वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने की राह पर है—यह अनुमान जून 2025 की पिछली भविष्यवाणी से 0.9 प्रतिशत अंक ऊपर है। विश्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि दक्षिण एशिया क्षेत्र की कुल वृद्धि 2026 में 6.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जिसमें भारत की निर्णायक भूमिका है। वैश्विक विकास दर मात्र 2.6 प्रतिशत रहने के बावजूद भारत की यह स्थिति घरेलू उपभोग, कर सुधारों और ग्रामीण आय में सुधार जैसे आंतरिक कारकों से संभव हुई है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि अमेरिकी आयात शुल्कों (50 प्रतिशत तक) के प्रभाव को घरेलू मांग की मज...