अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
स्वदेशी सैन्य युद्ध पैराशूट प्रणाली: डीआरडीओ की तकनीकी उपलब्धि और सामरिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक परिचय भारत ने हाल ही में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के माध्यम से स्वदेशी सैन्य युद्ध पैराशूट प्रणाली का 32,000 फीट की ऊँचाई पर सफल परीक्षण किया है। यह केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और सामरिक स्वावलंबन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह प्रणाली न केवल सैनिकों और उपकरणों की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करती है, बल्कि कठिनतम भौगोलिक परिस्थितियों में भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को भी नई ऊँचाइयाँ प्रदान करती है। तकनीकी विशेषताएँ: विज्ञान और विश्वसनीयता का संगम डीआरडीओ द्वारा विकसित यह पैराशूट प्रणाली उच्च-ऊँचाई वाले सैन्य अभियानों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई है। 32,000 फीट की ऊँचाई पर सफल परीक्षण इसकी अद्वितीय स्थिरता, नियंत्रण क्षमता और मजबूती को प्रमाणित करता है। इस ऊँचाई पर वायुदाब अत्यंत कम होता है और ऑक्सीजन की कमी के कारण पैराशूट सिस्टम का नियंत्रण जटिल हो जाता है। ऐसे में इस प्रणाली की कार्यक्षमता डीआरडीओ की तकनीकी परिपक्वता का सं...