हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
Economic Survey 2025-26 Analysis: Global Uncertainty vs India’s Strong Domestic Economy | Hindi Editorial
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: मजबूत घरेलू नींव पर वैश्विक अनिश्चितताओं का मुकाबला भारत की अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में महज वृद्धि की गति नहीं दिखा रही, बल्कि स्थिरता, लचीलापन और आत्मविश्वास की एक नई कहानी भी गढ़ रही है। 29 जनवरी को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 इसी आत्मविश्वास का प्रमाण-पत्र है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के नेतृत्व में तैयार यह दस्तावेज घरेलू आर्थिक मजबूती को रेखांकित करता है, साथ ही वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के प्रति सतर्क रहने की जरूरत पर भी जोर देता है। सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2026-27 के लिए यह 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। भारत की संभावित वृद्धि दर को अब 7 प्रतिशत तक संशोधित किया गया है, जो तीन वर्ष पहले के 6.5 प्रतिशत के अनुमान से काफी बेहतर है। यह प्रदर्शन ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मौद्रिक नीतियों की सख्ती से जूझ रही है। भारत घरेलू मांग, निजी उपभोग और सार्वजनिक पूंजी...