अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
रूस-यूक्रेन युद्ध, ज़ेलेंस्की की चेतावनी और भारत की ऊर्जा-कूटनीति: चुनौतियाँ व संभावनाएँ भूमिका रूस-यूक्रेन युद्ध, जो फरवरी 2022 में शुरू हुआ, ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार, कूटनीति और रणनीतिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित किया है। इस संघर्ष ने न केवल यूरोप, बल्कि एशिया और अन्य क्षेत्रों में ऊर्जा व्यापार, व्यापार नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को झकझोरा है। हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अमेरिका से अपील की कि वह रूस के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई करे, विशेष रूप से उन देशों पर ध्यान दे जो रूस से तेल खरीदते हैं, जैसे भारत। 2024 में भारत ने रूस से 52.73 बिलियन डॉलर का क्रूड आयात किया, जो उसके कुल तेल आयात का 37% है। यह स्थिति भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, कूटनीतिक संतुलन और वैश्विक छवि की दृष्टि से जटिल चुनौतियाँ प्रस्तुत करती है, खासकर जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दी है। ज़ेलेंस्की के तर्क: क्यों देरी ख़तरनाक ज़ेलेंस्की का कहना है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन वैश्विक मंचों, जैसे हाल के ट्रंप-पुतिन अलाइवका शिखर सम्मेलन, में भाग ल...