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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

India’s ₹3.25 Trillion Rafale Deal: Strategic Rationale, Security Imperatives and Defence Indigenisation

भारत का ₹3.25 लाख करोड़ का राफेल सौदा: रणनीतिक औचित्य का एक अकादमिक विश्लेषण परिचय 12 फरवरी 2026 को भारत की रक्षा नीति में एक निर्णायक मोड़ तब आया, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) ने फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल बहु-भूमिका लड़ाकू विमानों की खरीद को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की। अनुमानित ₹3.25 लाख करोड़ की लागत वाला यह सौदा न केवल भारत के अब तक के सबसे बड़े रक्षा सौदों में से एक है, बल्कि यह भारतीय वायु सेना (IAF) की दीर्घकालिक क्षमताओं, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता तथा क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को भी गहराई से प्रभावित करता है। इस सौदे के अंतर्गत 88 एकल-सीट और 26 दोहरी-सीट राफेल विमान शामिल हैं। इनमें से कुछ विमान पूर्णतः निर्मित अवस्था में भारत को प्राप्त होंगे, जबकि लगभग 90 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा, जिसमें स्वदेशी सामग्री, निजी क्षेत्र की भागीदारी और तकनीकी हस्तांतरण (ToT) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह लेख राफेल सौदे को केवल एक रक्षा खरीद के रूप में नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता, आर्...

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16th Finance Commission 2026–31: Continuity, Reforms and the Future of India’s Federal Fiscal Framework

16वाँ वित्त आयोग: संघीय वित्तीय ढाँचे में निरंतरता और सुधार की नई दिशा भूमिका भारतीय संघीय व्यवस्था में वित्त आयोग एक केंद्रीय संवैधानिक संस्था है, जो केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करती है। संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत गठित 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट (2026–27 से 2030–31) ऐसे समय में प्रस्तुत की गई है, जब भारत महामारी के बाद की आर्थिक पुनर्बहाली, जलवायु परिवर्तन, तीव्र शहरीकरण और बढ़ते राजकोषीय दबावों जैसी बहुआयामी चुनौतियों का सामना कर रहा है। डॉ. अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में गठित इस आयोग ने केवल वित्तीय हस्तांतरण तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि दक्षता, उत्तरदायित्व और सतत विकास को संघीय वित्त व्यवस्था के मूल स्तंभ के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। यह रिपोर्ट पूर्ववर्ती आयोगों की निरंतरता बनाए रखते हुए कुछ नवीन तत्वों को शामिल करती है, जो भारतीय संघवाद को अधिक परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कर हस्तांतरण में स्थिरता: ऊर्ध्वाधर वितरण 16वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में राज्यो...

Iran–US Nuclear Talks in Oman 2026: Diplomacy, Deadlock and the Risk of Middle East Conflict

ओमान में ईरान–अमेरिका परमाणु वार्ता: कूटनीति की सतर्क शुरुआत मध्य पूर्व की भू-राजनीति में स्थिरता एक दुर्लभ अतिथि रही है, किंतु ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे जब सामने आते हैं, तो क्षेत्रीय अस्थिरता वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन जाती है। 6 फरवरी 2026 को ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष उच्च-स्तरीय वार्ता का आयोजन इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यह वार्ता महज द्विपक्षीय संवाद नहीं थी, अपितु यह परीक्षा थी कि क्या गहन अविश्वास और हाल के सैन्य टकरावों के बावजूद कूटनीति अभी भी प्रभावी विकल्प बनी हुई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने वार्ता को “एक अच्छी शुरुआत” और “सकारात्मक” करार दिया, जबकि दोनों पक्षों ने आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। यह पहली ऐसी गंभीर कूटनीतिक पहल थी, जो 2025 में इजरायल-ईरान के बीच हुए 12-दिवसीय संघर्ष और अमेरिकी हमलों के बाद हुई। उस संघर्ष ने परमाणु स्थलों पर हमलों को जन्म दिया और क्षेत्र को युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया था। ऐसे में मस्कट वार्ता ने संवाद की प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने का संकेत दिया, यद्यप...

Civil–Military Relations in India: Security, Democracy and the Naravane Memoir Debate

जनरल एम.एम. नरवणे की आत्मकथा विवाद: सिविल–मिलिट्री संबंधों और भारतीय लोकतंत्र की कसौटी फरवरी 2026 में भारत की संसद से शुरू हुआ पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा “Four Stars of Destiny” से जुड़ा विवाद जल्द ही एक साधारण राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर सिविल–मिलिट्री संबंधों, राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे गहरे संवैधानिक प्रश्नों का प्रतीक बन गया। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि जब सेना, राजनीति और सार्वजनिक विमर्श एक-दूसरे से टकराते हैं, तो लोकतंत्र की संस्थागत परिपक्वता की वास्तविक परीक्षा होती है। विवाद की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम जनरल नरवणे (सेना प्रमुख: 2019–2022) की यह आत्मकथा उनके सैन्य जीवन के अनुभवों पर आधारित बताई जाती है, जिसमें 2020 का गलवान घाटी संघर्ष, चीन के साथ सीमा तनाव, अग्निपथ योजना जैसी सैन्य सुधार नीतियाँ और संकटकाल में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका का उल्लेख कथित रूप से किया गया है। चूँकि भारत में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों पर भी Official Secrets Act, 1923 और रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देश लागू ...

Pariksha Pe Charcha 2026: PM Modi’s Motivational Message for Students on Exams, Skills, Balance & Success

परीक्षा पे चर्चा 2026: परीक्षा से आगे जीवन की तैयारी का राष्ट्रीय संवाद परीक्षा का समय आते ही देश के करोड़ों छात्रों के मन में एक ही सवाल गूंजने लगता है— क्या मैं सफल हो पाऊँगा? इसी प्रश्न, इसी तनाव और इसी अनिश्चितता को संवाद और आत्मविश्वास में बदलने का मंच है ‘परीक्षा पे चर्चा’ । 6 फरवरी 2026 को आयोजित परीक्षा पे चर्चा के 9वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधी बातचीत की। सुबह 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में दिल्ली, गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर और असम के गुवाहाटी से जुड़े छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण दूरदर्शन, पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किया गया। इस बार 4.5 करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन होना यह दर्शाता है कि आज का छात्र केवल परीक्षा टिप्स नहीं, बल्कि जीवन मार्गदर्शन चाहता है। 🌱 सपने देखें, लेकिन एक्शन के साथ प्रधानमंत्री मोदी का संदेश बेहद स्पष्ट और प्रेरक था— “सपने न देखना जुर्म है, लेकिन सिर्फ सपनों की गुनगुनाहट से काम नहीं चलता।” उन्हों...

Pakistan’s New Regional Strategy: Bangladesh–China–Myanmar Axis and India’s Strategic Challenges

पाकिस्तान का नया क्षेत्रीय दांव: बांग्लादेश–चीन–म्यांमार धुरी और भारत के लिए उभरती चुनौतियाँ भूमिका: बदलती भू-राजनीति का संकेत दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र इस समय गहन भू-राजनीतिक पुनर्संरचना के दौर से गुजर रहे हैं। 2020 के बाद वैश्विक शक्ति संतुलन में आए बदलाव—चीन का आक्रामक उदय, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, और क्षेत्रीय संगठनों की निष्क्रियता—ने छोटे और मध्यम देशों को नई रणनीतिक दिशाएँ तलाशने के लिए प्रेरित किया है। इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान द्वारा बांग्लादेश, चीन और म्यांमार के साथ एक नए क्षेत्रीय सहयोग तंत्र के निर्माण की कोशिश को देखा जाना चाहिए। यह पहल केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं है; इसके भीतर भारत को रणनीतिक रूप से सीमित करने, SAARC जैसी व्यवस्थाओं को अप्रासंगिक बनाने और चीन-केंद्रित क्षेत्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने का स्पष्ट संकेत निहित है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और क्षेत्रीय समीकरण 2024 में बांग्लादेश में छात्र-नेतृत्व वाले जनआंदोलन के बाद शेख हसीना सरकार का पतन और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन एक निर्णायक मोड़ साबि...

Bangladesh Election 2026: Gen Z Politics, Constitutional Referendum and the Future of Democracy

बांग्लादेश चुनाव 2026: लोकतंत्र की नई दिशा या पुरानी चुनौतियों का नया अध्याय? दक्षिण एशिया की राजनीति में बांग्लादेश एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव केवल 300-सदस्यीय जतीय संसद के गठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उस राजनीतिक प्रयोग की परीक्षा भी हैं, जिसे अंतरिम सरकार ‘दूसरे गणराज्य’ की संज्ञा दे रही है। जुलाई 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद यह पहला बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास है, जिसने 15 वर्षों से सत्ता में रही शेख हसीना की अवामी लीग सरकार का अंत कर दिया था। करीब 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं की भागीदारी वाला यह चुनाव इसलिए भी असाधारण है क्योंकि इसके साथ ही संवैधानिक जनमत संग्रह (रेफरेंडम) भी कराया जा रहा है, जो बांग्लादेश की शासन-व्यवस्था की संरचना को ही बदल सकता है। यह प्रश्न अब केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि यह तय करने का है कि क्या बांग्लादेश वास्तव में लोकतांत्रिक पुनर्जन्म की ओर बढ़ रहा है या फिर वह पुराने संघर्षों के नए संस्करण से रूबरू होने वाला है। विद्रोह के बाद की राजनीति: एक शून्य और कई दावेदार 2024 का छात्र आंदोलन केव...

Sawalkot Hydropower Project: India’s Strategic Push After Indus Waters Treaty Suspension

सावलकोट हाइड्रो प्रोजेक्ट: जल-रणनीति, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय संकल्प का नया अध्याय भारत की जल-नीति और ऊर्जा रणनीति लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, कूटनीतिक आपत्तियों और सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन साधती रही है। किंतु सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद, मोदी सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अब विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता—तीनों पर कोई समझौता नहीं होगा। चिनाब नदी पर प्रस्तावित सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट इसी बदली हुई रणनीतिक सोच का सबसे सशक्त और ठोस प्रमाण बनकर उभरा है। सरकारी कंपनी एनएचपीसी (NHPC) द्वारा 5,129 करोड़ रुपये के प्रमुख सिविल वर्क पैकेज का टेंडर जारी होना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि दशकों से रुके एक राष्ट्रीय स्वप्न को गति देने का निर्णायक क्षण है। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के विकास, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति—तीनों को एक साथ प्रभावित करने की क्षमता रखती है। सिंधु जल संधि का निलंबन: सुरक्षा और संप्रभुता का संदेश 1960 में हुई सिंधु जल संधि को लंबे समय तक भारत-पाक संबंधों में स्थिरता का प्रतीक माना...

Pakistan–US Relations: “Used and Throw Like Toilet Paper” Remark, Historical Context, Strategic Mistakes and Future Policy

पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध: “टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया” – एक विश्लेषणात्मक लेख भूमिका अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन और शत्रुता प्रायः हितों पर आधारित होती हैं। पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध इसका स्पष्ट उदाहरण हैं। हाल के दिनों में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने अमेरिका के साथ संबंधों पर तीखी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को “used and threw us like toilet paper” यानी “टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया और फिर फेंक दिया।” यह बयान पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली या किसी सार्वजनिक मंच पर दिया गया, जहां उन्होंने अतीत के अनुभवों के आधार पर अमेरिका पर आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अमेरिका के लिए भारी कुर्बानियां दीं, लेकिन बदले में उसे धोखा और उपेक्षा ही मिली। यह बयान पाकिस्तान की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ की ओर संकेत करता है, जहां अब पाकिस्तान स्वयं को स्वतंत्र निर्णय लेने वाला देश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों की नींव 1950 के दशक में पड़ी, जब शीत युद्ध के दौर में पाकिस्तान ने अमे...

India–US Interim Trade Deal 2026: Tariff Cuts, Market Access and Strategic Balance in Bilateral Economic Ties

भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता: रणनीतिक संतुलन और आर्थिक यथार्थ का संगम भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से संभावनाओं और विवादों—दोनों से भरे रहे हैं। शुल्क युद्ध, बाज़ार पहुँच की मांगें और कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर मतभेद समय-समय पर इन रिश्तों में तनाव पैदा करते रहे हैं। ऐसे में 7 फरवरी 2026 को घोषित भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क केवल एक आर्थिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक भू-आर्थिक परिदृश्य में दोनों देशों की रणनीतिक समझ का संकेत है। यह समझौता एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) की दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि हालिया टैरिफ तनावों के बावजूद दोनों देशों ने टकराव की बजाय सहयोग का रास्ता चुना है। टैरिफ कटौती: भारतीय निर्यात के लिए नई राह इस अंतरिम समझौते की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ में भारी कटौती है। जहां पहले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा रहा था, वहीं अब इसे औसतन 18 प्रतिशत तक लाने पर सहमति बनी है। कुछ श्रे...

India Wins 6th ICC U-19 World Cup 2026, Defeats England by 100 Runs in Historic Final

भारत की छठी अंडर-19 विश्व कप जीत (2026): परीक्षा-दृष्टि से विश्लेषण 1. समाचार का महत्व (Why in News?) 6 फरवरी 2026 को भारत ने ICC अंडर-19 पुरुष क्रिकेट विश्व कप का खिताब जीतकर: छठी बार चैंपियन बनने का रिकॉर्ड बनाया ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ते हुए सबसे सफल टीम बनी लगातार दूसरा खिताब (2024–2026) जीतने वाली गिनी-चुनी टीमों में शामिल हुई ➡️ यह खबर खेल, युवा नीति, soft power और मानव संसाधन विकास से जुड़ी हुई है। 2. Prelims के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Direct Questions Ready) स्थान व तिथि फाइनल: 6 फरवरी 2026 स्थान: हरारे स्पोर्ट्स क्लब, जिम्बाब्वे मैच तथ्य भारत: 411/9 (50 ओवर) – फाइनल में सर्वोच्च स्कोर इंग्लैंड: 311/10 (40.2 ओवर) जीत का अंतर: 100 रन (U-19 WC फाइनल में सबसे बड़ी रन-जीत) रिकॉर्ड भारत का 6वां U-19 विश्व कप खिताब वैभव सूर्यवंशी (14 वर्ष): U-19 WC फाइनल का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर (175 रन) सबसे कम उम्र में फाइनल में शतक/रिकॉर्ड पारी प्लेयर ऑफ द मैच वैभव सूर्यवंशी 3. U-19 विश्व कप में भारत का इतिहास (Static + Current Linkage) वर्ष उपलब्धि ...