करंट अफेयर्स में छिपे UPSC मेन्स के संभावित प्रश्न प्रस्तावना UPSC सिविल सेवा परीक्षा केवल तथ्यों का संग्रह नहीं है, बल्कि सोचने, समझने और विश्लेषण करने की क्षमता की परीक्षा है। प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) तथ्यों और अवधारणाओं पर केंद्रित होती है, लेकिन मुख्य परीक्षा (Mains) विश्लेषणात्मक क्षमता, उत्तर लेखन कौशल और समसामयिक घटनाओं की समझ को परखती है। यही कारण है कि करंट अफेयर्स UPSC मेन्स की आत्मा माने जाते हैं। अक्सर देखा गया है कि UPSC सीधे समाचारों से प्रश्न नहीं पूछता, बल्कि घटनाओं के पीछे छिपे गहरे मुद्दों, नीतिगत पहलुओं और नैतिक दुविधाओं को प्रश्न में बदल देता है। उदाहरण के लिए, अगर अंतरराष्ट्रीय मंच पर जलवायु परिवर्तन की चर्चा हो रही है, तो UPSC प्रश्न पूछ सकता है — “भारत की जलवायु नीति घरेलू प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करती है?” यानी, हर करंट इवेंट UPSC मेन्स के लिए एक संभावित प्रश्न छुपाए बैठा है। इस लेख में हम देखेंगे कि हाल के करंट अफेयर्स किन-किन तरीकों से UPSC मेन्स के प्रश्न बन सकते हैं, और विद्यार्थी इन्हें कैसे अपनी तै...
India Belongs to Everyone: An Analysis of Inclusive Nationalism in the Context of the Racial Discrimination and Killing of a Tripura Youth in Uttarakhand
“भारत सबका है" — नस्लीय भेदभाव, क्षेत्रीय पूर्वाग्रह और संवैधानिक भारतीयता का प्रश्न (त्रिपुरा के युवक की उत्तराखंड में हत्या की घटना के सन्दर्भ में) भूमिका हाल ही में उत्तराखंड में त्रिपुरा के एक युवक के साथ हुए नस्लीय भेदभाव और हिंसक हमले ने भारतीय समाज में मौजूद क्षेत्रीय-नस्लीय पूर्वाग्रहों की गहरी परतों को उजागर किया है। उत्तर-पूर्व से आने वाले लोगों के प्रति “अलग दिखने”, “भिन्न भाषा” या “सांस्कृतिक पहचान” के आधार पर बने पूर्वाग्रह, कई बार सामाजिक दूरी और हिंसा का रूप ले लेते हैं। इसी संदर्भ में जब RSS प्रमुख मोहन भागवत यह कहते हैं कि — “भारत सबका है, जाति–क्षेत्र–पहचान के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए” — तो यह कथन केवल नैतिक अपील नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रवाद, संवैधानिक नागरिकता और सामाजिक न्याय के प्रश्न को सीधे स्पर्श करता है। संवैधानिक दृष्टिकोण — समानता का आदर्श और सामाजिक यथार्थ भारतीय संविधान नागरिकों के बीच समानता, गरिमा और गैर-भेदभाव की गारंटी देता है— अनुच्छेद 14 — कानून के समक्ष समानता अनुच्छेद 15 — धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार...