हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
2025 में भारतीय नागरिकों का डिपोर्टेशन: सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमेरिका - एक तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य भूमिका अंतरराष्ट्रीय प्रवासन भारत की आर्थिक-सामाजिक संरचना का अभिन्न हिस्सा रहा है। खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्रों तक, लाखों भारतीय नागरिक रोजगार, शिक्षा और बेहतर अवसरों के उद्देश्य से विदेशों में काम करते हैं। लेकिन प्रवासन का एक कठोर पक्ष भी है — डिपोर्टेशन (निष्कासन) , जो प्रायः वीज़ा ओवरस्टे, अवैध रोजगार, दस्तावेज़ी कमी या कानूनी उल्लंघनों के कारण लागू किया जाता है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा संसद में 18 दिसंबर 2025 को प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 81 देशों से 24,600 से अधिक भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया । यह संख्या न केवल वैश्विक स्तर पर प्रवासन-विनियमन की कड़ाई को दर्शाती है, बल्कि अलग-अलग देशों की नीतिगत प्राथमिकताओं की भी झलक दिखाती है। सामान्य धारणा यह रही है कि डिपोर्टेशन के मामले अधिकतर पश्चिमी देशों—विशेषकर अमेरिका—से सामने आते हैं। किंतु 2025 के आंकड़े इस मिथक को तोड़ते हैं। सऊदी अरब ने इस वर्ष 11,000 से अधिक भारतीयों को ड...