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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

New Labour Codes 2025 in India: Key Features, Benefits & UPSC-Oriented Analysis in Hindi

भारत में नई श्रम संहिताओं का लागू होना (21 नवंबर 2025): UPSC दृष्टिकोण से एक विश्लेषण

भारत ने 21 नवंबर 2025 से अपने श्रम-कानूनी ढाँचे में स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा संरचनात्मक परिवर्तन लागू किया है। लगभग 29 बिखरे हुए कानूनों को समन्वित करके चार श्रम-संहिताएँ—

  1. वेतन संहिता, 2019,
  2. औद्योगिक संबंध संहिता, 2020,
  3. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020,
  4. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य-दशा संहिता, 2020
    पूर्ण रूप से प्रभावी हो गई हैं। यह सुधार न केवल 4.5 करोड़ संगठित कर्मचारियों, बल्कि 40 करोड़ से अधिक असंगठित एवं गिग श्रमिकों को भी प्रभावित करता है।

UPSC के लिए यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संरचनात्मक सुधार, श्रम-बाजार आधुनिकीकरण, सामाजिक सुरक्षा, संघवाद, Ease of Doing Business, और Inclusive Growth जैसे मुख्य विषयों से जुड़ा है।


1. वेतन और मजदूरी व्यवस्था में मानकीकरण

राष्ट्रीय फ्लोर वेज, वेतन-परिभाषा का मानकीकरण, समयबद्ध भुगतान और बोनस की नई सीमा जैसी व्यवस्थाएँ मजदूरी-समानता की दिशा में बड़ा कदम हैं।

UPSC विश्लेषण

  • यह क्षेत्रीय असमानताओं को घटाने,
  • श्रम-प्रवासन और उत्पादकता सुधारने, तथा
  • समावेशी विकास सुनिश्चित करने का प्रयास है।
    रोजगार की गुणवत्ता (Quality of Work) के मानदंडों में यह सुधार महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

2. सामाजिक सुरक्षा का विस्तार और गिग अर्थव्यवस्था की मान्यता

पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को विधिक सुरक्षा प्रदान की गई है। ईएसआई, ईपीएफ जैसी सुविधाओं का दायरा बढ़ा है और ग्रेच्युटी व्यवस्था में एकरूपता आई है।

UPSC विश्लेषण

  • भारत के श्रम-बाजार के Informal to Formal Transition का संकेत।
  • SDG-1, SDG-8 और Social Protection Floors जैसे वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप।
  • तेजी से बढ़ती Gigification of Economy को नीतिगत स्वीकृति।

3. औद्योगिक संबंध: लचीलेपन और सुरक्षा के बीच संतुलन

छँटनी हेतु अनुमति सीमा 100 से बढ़ाकर 300 करना, फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट को वैधता देना, और ट्रेड यूनियन मान्यता का सरलीकरण—यह सब उद्योगों को बेहतर लचीलापन उपलब्ध कराता है।

UPSC विश्लेषण

  • यह सुधार Labour Market Flexibility को बढ़ाता है,
  • पर Job Security के प्रश्नों को भी उठाता है।
  • भारत के विनिर्माण-प्रतिस्पर्धा (Manufacturing Competitiveness) और ग्लोबल वैल्यू चेन में प्रवेश के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है।

4. कार्य-दशा, सुरक्षा और नियामकीय सुधार

महिलाओं का सभी शिफ्टों में रोजगार, निरीक्षक-सह-सुगमकर्ता मॉडल और फैक्ट्री परिभाषा का सरलीकरण—ये प्रशासनिक सुधार का बड़ा संकेत हैं।

UPSC विश्लेषण

  • Gender Mainstreaming,
  • Administrative Transparency,
  • Occupational Safety Standards,
  • और Ease of Regulation को एकीकृत करने का प्रयास।

5. नियोक्ता–श्रमिक संबंधों में नए आयाम

नियोक्ताओं को अनुपालन-सरलीकरण व स्थिर नियमों का लाभ मिलेगा, जबकि श्रमिकों को वेतन, ग्रेच्युटी, सामाजिक सुरक्षा और कानूनी संरक्षण बेहतर रूप में प्राप्त होगा।
गिग श्रमिकों के लिए दीर्घकालिक Social Security Fund कार्यान्वयन की दिशा में मुख्य आधार बनेगा।


6. प्रमुख चुनौतियाँ और आलोचनाएँ

  • 300-कर्मचारी सीमा बढ़ने से रोजगार-सुरक्षा कमजोर होने की आशंका।
  • सभी राज्यों द्वारा नियम अधिसूचित न होने से सहकारी-संघवाद (Cooperative Federalism) की परीक्षा।
  • गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा निधि की वित्तीय संरचना अभी अस्पष्ट।
  • निरीक्षक-सुगमकर्ता मॉडल की प्रभावशीलता को लेकर प्रश्न।

UPSC विश्लेषण

यह खंड भारतीय शासन-प्रणाली में
संघवाद,
नीतियों के क्रियान्वयन (Policy Implementation),
श्रम-राजनीति,
और राज्य क्षमता निर्माण (State Capacity Building)
की वास्तविक चुनौतियों को सामने लाता है।


निष्कर्ष (UPSC-उपयुक्त)

नई श्रम-संहिताएँ भारत के श्रम-कानूनों में एक आधुनिक, सरल, डिजिटल और समावेशी ढाँचे की ओर बढ़ने का मील का पत्थर हैं। इनका लक्ष्य चार प्रमुख उद्देश्यों के बीच संतुलन स्थापित करना है—
समानता,
उत्पादकता,
सामाजिक सुरक्षा,
और Ease of Doing Business

इन सुधारों की सफलता तीन स्तंभों पर निर्भर करेगी—

  1. केंद्र–राज्य के बीच नियामकीय समन्वय,
  2. पारदर्शी डिजिटल अनुपालन व्यवस्था,
  3. सभी श्रमिक वर्गों, विशेषकर गिग वर्कर्स, के लिए स्थायी सामाजिक सुरक्षा-वित्तपोषण

यदि क्रियान्वयन प्रभावी रहा, तो यह परिवर्तन भारत को एक दक्ष, समावेशी और आधुनिक श्रम-बाजार की दिशा में अग्रसर करने वाले ऐतिहासिक सुधार के रूप में स्थापित होंगे।



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