U.S. Military Intervention in Venezuela: Capture of President Nicolás Maduro — 2026 Crisis Explained
वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप: 3 जनवरी 2026 को निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी — एक ऐतिहासिक मोड़
3 जनवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेज़ुएला में एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को विशेष बलों ने पकड़ लिया। यह घटना लैटिन अमेरिका में 1989 में पनामा पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद सबसे प्रत्यक्ष सैन्य दख़ल के रूप में देखी जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी बलों ने “बड़े पैमाने पर सर्जिकल स्ट्राइक और विशेष ऑपरेशन” के माध्यम से मादुरो को हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया है। यह कार्रवाई न सिर्फ़ वेनेज़ुएला की राजनीति के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए भी एक निर्णायक क्षण बन गई है।
पृष्ठभूमि: बढ़ते तनाव से सैन्य कार्रवाई तक का सफर
अमेरिका और मादुरो सरकार के बीच तनाव कई वर्षों से चल रहा था।
- 2020 से मादुरो और उनके नज़दीकी सहयोगियों पर अमेरिकी अदालतों में नार्को-टेररिज़्म और ड्रग तस्करी से जुड़े आरोप लंबित थे।
- अमेरिका ने मादुरो शासन को भ्रष्ट, अलोकतांत्रिक और “नार्को-स्टेट” चलाने वाला करार दिया था।
- 2024 के वेनेज़ुएला चुनावों को वाशिंगटन ने धांधलीपूर्ण बताया और विपक्षी नेता एडमुंडो गोंज़ालेज़ उर्रुतिया को वास्तविक विजेता माना।
- 2025 के अंत तक अमेरिका ने ऑपरेशन साउदर्न स्पियर के तहत नौसैनिक तैनाती, प्रतिबंध और समुद्री इंटरसेप्शन बढ़ा दिए।
- नवंबर 2025 में ट्रंप ने मादुरो से सत्ता छोड़ने का अल्टीमेटम दिया — जो अस्वीकार कर दिया गया।
इन सबके बीच 3 जनवरी की कार्रवाई उस क्रमिक दबाव-नीति के चरम बिंदु के रूप में सामने आई।
कार्रवाई कैसे हुई: हवाई हमले से स्पेशल फोर्स रेड तक
स्थानीय समयानुसार रात लगभग 2 बजे कराकस और आसपास के इलाकों में विस्फोटों और हवाई गतिविधियों की रिपोर्ट सामने आई।
- लक्षित हमले मुख्य रूप से फुएर्ते तिउना सैन्य परिसर, ला कार्लोटा एयरबेस और बंदरगाह सुविधाओं के आसपास केंद्रित थे।
- कई क्षेत्रों में बिजली कटौती और आग लगने की घटनाएँ देखी गईं।
हवाई हमलों के बाद, अमेरिकी विशेष बलों ने एक सटीक और तेज़ रेड को अंजाम दिया, जिसमें मादुरो को कथित तौर पर उसी सैन्य परिसर के भीतर से पकड़ा गया।
उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से कैरिबियन सागर में तैनात यूएसएस इवो जीमा पर ले जाया गया, जहाँ से उन्हें मुक़दमे के लिए अमेरिका ले जाए जाने की जानकारी सामने आई।
ट्रंप ने इसे “अद्भुत और सफल ऑपरेशन” बताते हुए कहा कि अमेरिकी पक्ष को न्यूनतम चोटें आईं।
वेनेज़ुएला के भीतर प्रतिक्रिया और उथल-पुथल
घटना के तुरंत बाद वेनेज़ुएला सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की।
- रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रीनो लोपेज़ ने इसे विदेशी आक्रमण बताया और प्रतिरोध का संकल्प व्यक्त किया।
- उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज़ (जो उस समय विदेश में थीं) ने मादुरो की “प्रूफ ऑफ लाइफ” की मांग की और अमेरिका पर तेल-हितों के लिए आक्रमण का आरोप लगाया।
- समाज में प्रतिक्रियाएँ विभाजित रहीं —
- एक वर्ग ने भय और अस्थिरता पर चिंता जताई,
- जबकि विपक्षी समर्थकों ने इसे “नई शुरुआत का अवसर” कहा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ: समर्थन, निंदा और कूटनीतिक दरारें
कार्रवाई के तुरंत बाद विश्व स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं—
- रूस और चीन ने इसे वेनेज़ुएला की संप्रभुता का उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया।
- क्यूबा और ईरान ने भी कड़ी निंदा की।
- कई लैटिन अमेरिकी देशों ने क्षेत्रीय अस्थिरता और शरणार्थी संकट की आशंका जताई।
- यूरोपीय देशों से मिश्रित प्रतिक्रियाएँ आईं —
अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के सम्मान की अपील के साथ सावधानीपूर्ण रुख अपनाया गया। - अमेरिका के भीतर भी बहस छिड़ गई —
समर्थकों ने इसे नार्को-टैरर नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार बताया,
जबकि आलोचकों ने इसे कानूनी वैधता और दीर्घकालिक जोखिमों के संदर्भ में चुनौतीपूर्ण ठहराया।
कानूनी, मानवीय और भू-राजनीतिक निहितार्थ
एक सत्तारूढ़ राष्ट्रपति की विदेशी सेना द्वारा गिरफ्तारी ने कई संवैधानिक-कानूनी प्रश्न खड़े कर दिए हैं—
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बल-प्रयोग निषेध के संदर्भ में इस कार्रवाई को चुनौती मिल रही है।
- आलोचकों का तर्क है कि यह भविष्य में अन्य हस्तक्षेपों के लिए खतरनाक मिसाल बन सकती है।
मानवीय स्तर पर—
- नागरिक क्षेत्रों में शत्रुता का प्रभाव, बिजली-संचार बाधाएँ,
- और चावेज़ समर्थक गुटों द्वारा संभावित प्रतिरोध की आशंका बढ़ गई है।
आर्थिक रूप से—
- विश्व के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश में सत्ता-शून्य
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और क्षेत्रीय राजनीति दोनों को प्रभावित कर सकता है।
निष्कर्ष: लैटिन अमेरिका-अमेरिका संबंधों का निर्णायक अध्याय
3 जनवरी 2026 की यह कार्रवाई न केवल वेनेज़ुएला के राजनीतिक भविष्य,
बल्कि अमेरिकी हस्तक्षेप-नीति, अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और क्षेत्रीय संतुलन के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हो सकती है।
मादुरो के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया और वेनेज़ुएला के भीतर सत्ता संतुलन किस दिशा में जाएगा —
यह आने वाले सप्ताहों और महीनों में सामने आएगा। फिलहाल देश और क्षेत्र दोनों अनिश्चितता, शक्ति संघर्ष और संभावित पुनर्संतुलन के दौर में प्रवेश कर चुके हैं।
With Reuters Inputs
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