ग्रीनलैंड संकट 2026: अमेरिकी दबाव, डेनमार्क की संप्रभुता और आर्कटिक भू-राजनीति का ऐतिहासिक विश्लेषण
आर्कटिक के शांत और बर्फ़ीले भूभाग में चल रहा तनाव केवल वर्तमान घटनाओं का परिणाम नहीं है — इसकी जड़ें इतिहास, साम्राज्यवादी दावों और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में गहराई तक जमी हुई हैं। जनवरी 2026 में ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन का कठोर बयान इसी लंबे ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में उभरकर सामने आता है, जब उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बार-बार दिए जा रहे “ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने” के सुझावों और दबाव पर दो-टूक प्रतिक्रिया दी:
“अब काफी है। संवाद तभी संभव है, जब वह सम्मान, वैधता और अंतरराष्ट्रीय कानून की सीमाओं के भीतर हो।”
यह वक्तव्य उस समय आया, जब अमेरिका ने हाल ही में वेनेज़ुएला में सैन्य अभियान चलाकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया — और इसी के साथ यह आशंका बढ़ी कि वाशिंगटन अब रणनीतिक क्षेत्रों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण की ओर कदम बढ़ा सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ: ग्रीनलैंड पर दावों का लंबा सिलसिला
ग्रीनलैंड का प्रश्न नया नहीं है — यह औपनिवेशिक इतिहास, शीत युद्ध और आधुनिक भू-राजनीति का संगम है।
- मध्यकाल में यह द्वीप नॉर्डिक बसाहटों का हिस्सा रहा
- 18वीं सदी में डेनमार्क-नॉर्वे के नियंत्रण में आया
- द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने यहाँ सैन्य उपस्थिति स्थापित की
- 1946 में अमेरिका ने ग्रीनलैंड को खरीदने का औपचारिक प्रस्ताव दिया, जिसे डेनमार्क ने अस्वीकार कर दिया
- शीत युद्ध के दौरान अमेरिका का थूल एयर बेस आर्कटिक सुरक्षा का मुख्य केंद्र बना
- 2009 में Self-Government Act के बाद ग्रीनलैंड को व्यापक स्वायत्तता और संसाधन-प्रबंधन का अधिकार मिला
यह इतिहास बताता है कि ग्रीनलैंड हमेशा से केवल एक द्वीप नहीं, बल्कि रणनीतिक संपत्ति और शक्तियों के द्वंद्व का क्षेत्र रहा है।
आधुनिक संदर्भ: ट्रंप-काल में फिर उभरा “ग्रीनलैंड प्रश्न”
2019 में पहली बार डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को “खरीदने” का विचार सार्वजनिक रूप से रखा था।
उस समय डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने इसे “बेतुका” कहा — लेकिन 2025-26 में इस विचार की आक्रामक पुनरावृत्ति ने बहस को फिर जिंदा कर दिया।
वेनेज़ुएला अभियान के बाद जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड को “अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक संपत्ति” बताया, तो यह केवल बयान नहीं, बल्कि संभावित भू-रणनीतिक इशारा माना गया।
ग्रीनलैंड की रणनीतिक अहमियत — इतिहास से वर्तमान तक
आज ग्रीनलैंड तीन स्तरों पर वैश्विक शक्ति-प्रतिस्पर्धा का केंद्र है:
-
संसाधन और खनिज
रेयर अर्थ एलिमेंट्स, यूरेनियम, जिंक और सोना — जो आधुनिक तकनीक और रक्षा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हैं। -
आर्कटिक समुद्री मार्ग
जलवायु परिवर्तन के साथ उभरते नॉर्थ-अटलांटिक रूट्स भविष्य के वैश्विक व्यापार का नया आधार बन सकते हैं। -
सैन्य व मिसाइल-रक्षा महत्व
थूल एयर बेस शीत युद्ध से लेकर वर्तमान तक अमेरिकी सुरक्षा वास्तुकला का मुख्य स्तंभ है।
इतिहास से लेकर आज तक, ग्रीनलैंड पर नियंत्रण का अर्थ है —
आर्कटिक संतुलन पर नियंत्रण।
संप्रभुता, कानून और लोकतांत्रिक अधिकार
यहीं पर आधुनिक अंतरराष्ट्रीय कानून ऐतिहासिक राजनीति से टकराता है।
- ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है
- भविष्य का कोई भी निर्णय ग्रीनलैंड की जनता के जनमत-संग्रह से ही संभव
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर बल-प्रयोग या उसकी धमकी पर रोक लगाता है
इस पृष्ठभूमि में नील्सन का “That’s enough now” केवल प्रतिक्रिया नहीं —
संप्रभुता का ऐतिहासिक-कानूनी दावा है।
वैश्विक प्रतिक्रिया: आर्कटिक शीत-युद्ध की वापसी?
- डेनमार्क ने स्पष्ट कहा — “ग्रीनलैंड न अमेरिका का था, न होगा।”
- नॉर्डिक देशों ने लोकतांत्रिक अधिकारों का समर्थन किया
- रूस और चीन ने इसे “साम्राज्यवादी दबाव” कहा और आर्कटिक उपस्थिति बढ़ाने का संकेत दिया
इस प्रकार यह विवाद द्विपक्षीय नहीं, बल्कि
उभरते बहुध्रुवीय शक्ति-संघर्ष का हिस्सा बन गया है।
क्या ट्रंप-युग 2.0 नई भू-रणनीतिक नीति का संकेत है?
2026 का ग्रीनलैंड संकट बताता है कि अमेरिकी विदेश नीति में
संसाधन-केंद्रित आक्रामक यथार्थवाद मजबूत होता दिख रहा है।
वेनेज़ुएला, आर्कटिक और यूरोपीय सहयोगी —
तीनों ही उदाहरण दर्शाते हैं कि स्थिर गठबंधन के स्थान पर
सीधे शक्ति-प्रयोग और रणनीतिक नियंत्रण को तरजीह दी जा रही है।
लेकिन इतिहास यह भी दर्शाता है —
लोकतांत्रिक समाजों की राजनीतिक आकांक्षा को दबाव से नहीं मोड़ा जा सकता।
समापन
ग्रीनलैंड का यह संकट हमें याद दिलाता है कि
भू-राजनीति केवल वर्तमान की नहीं, इतिहास की निरंतरता भी है।
यह संघर्ष केवल बर्फ़ीली भूमि का नहीं,
बल्कि संप्रभुता, आत्मनिर्णय और शक्ति-राजनीति के टकराव का प्रतीक है।
आने वाले समय में दुनिया देखेगी —
क्या यह विवाद संवाद और सहयोग की ओर मुड़ेगा,
या आर्कटिक में नए शीत-युद्ध की भूमिका-पटकथा लिखी जा रही है।
With Reuters and The Guardian Inputs
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