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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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Top 5 Decisions India Took After the Pahalgam Attack: A Strategic Overview

J&K Pahalgam Terror Attack 2025: भारत के 5 निर्णायक कदम और उनका रणनीतिक, कूटनीतिक व आंतरिक विश्लेषण

भूमिका: एक रणनीतिक चुनौती और भारत का दृढ़ संकल्प

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बाइसारन घाटी में हुए आतंकी हमले ने भारत की आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर चुनौती दी। इस हमले में 26 लोग, जिनमें 25 भारतीय पर्यटक और एक नेपाली नागरिक शामिल थे, मारे गए, और कई अन्य घायल हुए। यह हमला, जिसकी जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से संबद्ध द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली, न केवल पर्यटकों पर लक्षित था, बल्कि कश्मीर घाटी में जनसांख्यिकीय परिवर्तन और हाल के विधानसभा चुनावों की सफलता को चुनौती देने का प्रयास भी था।

इस हमले के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब की अपनी यात्रा को छोटा कर दिल्ली में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में पाँच प्रमुख निर्णय लिए गए, जो भारत की आतंकवाद विरोधी नीति, विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा रणनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देते हैं। यह लेख इन निर्णयों का विश्लेषण करता है और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति, और आंतरिक नीति पर प्रभाव का मूल्यांकन UPSC की दृष्टि से करता है।


भारत सरकार के पाँच प्रमुख निर्णय: एक नई रणनीति का आगाज

1-अटारी-वाघा बॉर्डर का तत्काल बंद होना

भारत ने अटारी-वाघा बॉर्डर को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्णय लिया, जो भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार और लोगों के आवागमन का एक महत्वपूर्ण मार्ग था। 2023-24 में इस मार्ग से 3,886.53 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ, जिसमें भारत से सोयाबीन, सब्जियाँ और प्लास्टिक उत्पाद, तथा पाकिस्तान से ड्राई फ्रूट्स, सीमेंट और जड़ी-बूटियाँ शामिल थीं। यह बंदी न केवल आर्थिक दबाव बनाएगी, बल्कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में प्रतीकात्मक तनाव को भी दर्शाती है।

2-सिंधु जल संधि का निलंबन

1960 की सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से निलंबित करना भारत का अब तक का सबसे साहसिक कदम है। यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों के बँटवारे को नियंत्रित करती है, जिसमें पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का 80% जल प्राप्त होता है। इस निलंबन से पाकिस्तान की कृषि और जल आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जो उसकी अर्थव्यवस्था का आधार है। यह कदम भारत की "पानी को हथियार" के रूप में उपयोग करने की रणनीति का हिस्सा है, जो कूटनीतिक और सामरिक दबाव को बढ़ाता है।

3-पाकिस्तानी नागरिकों के लिए SAARC वीजा रद्द और राजनयिक प्रतिबंध

भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए SAARC वीजा छूट योजना को समाप्त कर दिया और मौजूदा वीजा धारकों को 48 घंटों में देश छोड़ने का आदेश दिया। साथ ही, पाकिस्तानी उच्चायोग में रक्षा, सैन्य, नौसेना और वायु सलाहकारों को "पर्सोना नॉन ग्रेटा" घोषित कर एक सप्ताह में निष्कासित करने का निर्णय लिया गया। भारत ने अपने इस्लामाबाद उच्चायोग से भी समकक्ष सलाहकारों को वापस बुलाया। यह कदम भारत-पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंधों को न्यूनतम स्तर पर ले जाता है।

4-आतंकवाद विरोधी अभियानों का विस्तार

सरकार ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ-रोधी और आतंकवाद-विरोधी अभियानों को तेज करने का आदेश दिया। सेना, अर्धसैनिक बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से बाइसारन घाटी और पीर पंजाल रेंज में तलाशी अभियान शुरू किया। HAL ध्रुव हेलीकॉप्टरों को काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशनों के लिए सीमित मंजूरी दी गई। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को जांच सौंपी गई, जो हमले के पीछे सीमा पार के तार जोड़ने पर केंद्रित है।

5-कश्मीर में नागरिक सुरक्षा और पर्यटन संरक्षण के लिए नई रणनीति

कश्मीर में पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक रणनीति लागू की गई है। इसमें स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम, ड्रोन निगरानी, और पर्यटक स्थलों पर स्थायी गश्त इकाइयाँ शामिल हैं। सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 2 लाख रुपये, और अन्य घायलों को 1 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की। यह कदम कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को पुनर्जनन और स्थानीय समुदायों में विश्वास बहाली के लिए महत्वपूर्ण है।


रणनीतिक और नीतिगत विश्लेषण: UPSC GS-2 और GS-3 के दृष्टिकोण से

राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव (GS-3: आंतरिक सुरक्षा और चुनौतियाँ)

आतंकवाद विरोधी नीति में बदलाव: पहलगाम हमला, जो 2008 के मुंबई हमलों के बाद नागरिकों पर सबसे घातक हमला है, भारत की "Zero Tolerance" नीति को और सख्त करने का अवसर प्रदान करता है। सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक और हवाई हमलों जैसे पिछले अनुभवों (उरी 2016, बालाकोट 2019) पर आधारित दृष्टिकोण अब और आक्रामक हो सकता है।

हाइब्रिड आतंकवाद का खतरा: द रेसिस्टेंस फ्रंट जैसे समूह, जो ऑनलाइन भर्ती और छोटे चक्र की रणनीति अपनाते हैं, पारंपरिक आतंकवाद से भिन्न हैं। इसके लिए मानव खुफिया (HUMINT), साइबर निगरानी, और सक्रिय काउंटर-इंसर्जेंसी ग्रिड की आवश्यकता है।

क्षेत्रीय स्थिरता: कश्मीर में पर्यटन, जो 2024 में 35 लाख पर्यटकों के साथ चरम पर था, इस हमले से प्रभावित होगा। सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपाय पर्यटकों के विश्वास को बहाल करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

विदेश नीति पर प्रभाव (GS-2: अंतरराष्ट्रीय संबंध)

पाकिस्तान के साथ संबंधों में ठहराव: सिंधु जल संधि का निलंबन और राजनयिक प्रतिबंध भारत की पारंपरिक "सहनशीलता" नीति से एक बड़े बदलाव का संकेत देते हैं। यह कदम पाकिस्तान को आर्थिक और कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति का हिस्सा है।

वैश्विक समर्थन: अमेरिका, रूस, इजरायल, फ्रांस, और नेपाल जैसे देशों ने हमले की निंदा की और भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की। यह भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करता है और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ प्रस्तावों को समर्थन दिलाने में सहायक हो सकता है।

चीन का रुख: चीनी राजदूत ने हमले की निंदा की, लेकिन भारत को चीन के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है, क्योंकि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) के कारण पाकिस्तान का समर्थन करता है।

आंतरिक नीति पर प्रभाव (GS-2: शासन और सामाजिक न्याय)

कश्मीर में सामुदायिक एकजुटता: हमले के बाद श्रीनगर और अन्य क्षेत्रों में स्थानीय लोगों और संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन और बंद का आयोजन किया गया, जो आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवाद विरोधी अभियान स्थानीय समुदायों को अलग-थलग न करें।

आर्थिक प्रभाव: कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था, जो 2023 में 2.1 करोड़ पर्यटकों के साथ फल-फूल रही थी, को गंभीर झटका लग सकता है। उड़ान रद्दीकरण और होटल बुकिंग में कमी पहले से ही शुरू हो चुकी है।

सामाजिक तनाव का जोखिम: हमले में धार्मिक आधार पर लक्ष्यीकरण की खबरें सामने आई हैं, जिससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। सरकार को सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए पारदर्शी जांच और संचार रणनीति अपनानी होगी।

मानवाधिकार और कूटनीतिक संतुलन (GS-2: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति)

हमले के बाद भारत को अपनी कार्रवाइयों को मानवाधिकार मानकों के अनुरूप रखना होगा, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र और अन्य मंचों पर। पाकिस्तान द्वारा कश्मीर को "अवैध रूप से कब्जा किया हुआ" क्षेत्र कहने का जवाब देने के लिए भारत को तथ्यपरक साक्ष्य और कूटनीतिक चातुर्य का उपयोग करना होगा।


UPSC के लिए महत्वपूर्ण बिंदु: GS-2 और GS-3 के लिए नोट्स

GS-2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध):

भारत की आतंकवाद विरोधी कूटनीति: पाकिस्तान को वैश्विक मंचों पर अलग-थलग करने की रणनीति।

क्षेत्रीय संगठन (SAARC): SAARC वीजा रद्दीकरण से क्षेत्रीय सहयोग पर प्रभाव।

भारत की वैश्विक स्थिति: G7, रूस, और अन्य देशों का समर्थन भारत की कूटनीतिक जीत।

GS-3 (आंतरिक सुरक्षा):

हाइब्रिड आतंकवाद: TRF जैसे समूहों की नई रणनीति और इससे निपटने के लिए भारत की तैयारियाँ।

खुफिया तंत्र: HUMINT और साइबर खुफिया की भूमिका।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था: कश्मीर में पर्यटन पर आतंकवाद का प्रभाव और पुनर्जनन के उपाय।

नैतिकता (GS-4):

आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और मानवाधिकारों का संतुलन।

सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में नेतृत्व की भूमिका।


निष्कर्ष: एक नया रणनीतिक युग

पहलगाम आतंकी हमला भारत के लिए केवल एक सुरक्षा चुनौती नहीं, बल्कि उसकी रणनीतिक, कूटनीतिक और आंतरिक नीतियों की व्यापक परीक्षा है। सरकार के पाँच निर्णायक कदम—अटारी बॉर्डर बंदी, सिंधु जल संधि निलंबन, राजनयिक प्रतिबंध, आतंकवाद विरोधी अभियान, और नागरिक सुरक्षा रणनीति—दर्शाते हैं कि भारत अब निष्क्रिय प्रतिक्रिया के बजाय सक्रिय और आक्रामक रुख अपना रहा है। यह न केवल पाकिस्तान को कड़ा संदेश देता है, बल्कि कश्मीर में शांति और स्थिरता की बहाली के लिए भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

UPSC के दृष्टिकोण से, यह घटना राष्ट्रीय सुरक्षा, कूटनीति, और क्षेत्रीय स्थिरता के विभिन्न पहलुओं को समझने का एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है। भविष्य में, भारत को अपनी नीतियों में संतुलन, पारदर्शिता और वैश्विक सहयोग को प्राथमिकता देनी होगी ताकि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को और मजबूत कर सके।

हैशटैग्स:

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J&K Pahalgam Terror Attack 2025: भारत के 5 निर्णायक कदम और रणनीतिक विश्लेषण | Gynamic GK

J&K Pahalgam Terror Attack 2025: भारत के 5 निर्णायक कदम और उनका रणनीतिक, कूटनीतिक व आंतरिक विश्लेषण

भूमिका: एक रणनीतिक चुनौती और भारत का दृढ़ संकल्प

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बाइसारन घाटी में हुए आतंकी हमले ने भारत की आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर चुनौती दी। इस हमले में 26 लोग, जिनमें 25 भारतीय पर्यटक और एक नेपाली नागरिक शामिल थे, मारे गए। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से संबद्ध द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली। यह हमला कश्मीर घाटी में जनसांख्यिकीय परिवर्तन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास था।

हमले के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने अपनी सऊदी अरब यात्रा को रद्द कर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक बुलाई। इसमें भारत सरकार ने पाँच निर्णायक कदम उठाए, जो भारत की रणनीतिक नीति में एक परिवर्तन का संकेत देते हैं।

भारत सरकार के पाँच प्रमुख निर्णय

1. अटारी-वाघा बॉर्डर का तत्काल बंद होना

भारत ने पाकिस्तान के साथ व्यापार और आवाजाही का मुख्य मार्ग अटारी-वाघा बॉर्डर बंद कर दिया। यह कदम आर्थिक दबाव डालने और कूटनीतिक तनाव दर्शाने वाला है।

2. सिंधु जल संधि का निलंबन

1960 की सिंधु जल संधि का अस्थायी निलंबन एक ऐतिहासिक कदम है। इससे पाकिस्तान की कृषि और जल आपूर्ति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, जो उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

3. पाकिस्तानी नागरिकों के लिए SAARC वीजा रद्द और राजनयिक प्रतिबंध

भारत ने SAARC वीजा छूट योजना समाप्त की और पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों को निष्कासित किया। भारत ने अपने इस्लामाबाद उच्चायोग से भी समकक्ष अधिकारियों को वापस बुलाया।

4. आतंकवाद विरोधी अभियानों का विस्तार

बाइसारन घाटी और पीर पंजाल में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू हुए। HAL ध्रुव हेलीकॉप्टर और NIA को कार्रवाई में शामिल किया गया।

5. नागरिक सुरक्षा और पर्यटन संरक्षण रणनीति

ड्रोन निगरानी, स्मार्ट सर्विलांस और पर्यटक स्थलों पर गश्त जैसी पहलें शुरू की गईं। पीड़ितों के परिजनों और घायलों को अनुग्रह राशि दी गई।

रणनीतिक और नीतिगत विश्लेषण (UPSC GS-2 और GS-3 के लिए)

राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव (GS-3)

  • Zero Tolerance नीति: हमले के बाद सख्त रुख।
  • हाइब्रिड आतंकवाद: नए प्रकार के खतरे, HUMINT और साइबर निगरानी की जरूरत।
  • पर्यटन और स्थिरता: घाटी में पर्यटकों की संख्या प्रभावित, भरोसा बहाली आवश्यक।

विदेश नीति पर प्रभाव (GS-2)

  • राजनयिक संबंधों में ठहराव: सिंधु जल संधि और वीजा रद्दीकरण का असर।
  • वैश्विक समर्थन: G7, इजरायल, नेपाल आदि देशों का भारत के साथ समर्थन।
  • चीन का रुख: सतर्क संतुलन की आवश्यकता।

आंतरिक नीति पर प्रभाव

  • सामुदायिक एकजुटता: स्थानीय विरोध आतंकवाद के खिलाफ जन समर्थन का संकेत।
  • आर्थिक झटका: पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव।
  • सांप्रदायिक तनाव: पारदर्शिता और संवाद आवश्यक।

मानवाधिकार और कूटनीतिक संतुलन

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को तथ्यों, पारदर्शिता और मानवाधिकारों का संतुलन बनाए रखना होगा।

UPSC के लिए प्रमुख बिंदु

GS-2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध):

  • भारत की आतंकवाद विरोधी कूटनीति
  • SAARC के भविष्य पर प्रभाव
  • वैश्विक मंचों पर भारत की स्थिति

GS-3 (आंतरिक सुरक्षा):

  • हाइब्रिड आतंकवाद से निपटने की रणनीति
  • HUMINT और साइबर इंटेलिजेंस
  • पर्यटन पर प्रभाव और पुनरुद्धार

GS-4 (नैतिकता):

  • मानवाधिकारों और सुरक्षा कार्रवाई में संतुलन
  • सामाजिक सौहार्द में नेतृत्व की भूमिका

निष्कर्ष: एक नया रणनीतिक युग

यह हमला भारत के लिए रणनीतिक, कूटनीतिक और आंतरिक दृष्टि से एक परीक्षा है। भारत ने अब सक्रिय और आक्रामक रुख अपनाया है, जो उसकी दृढ़ता का प्रतीक है। UPSC के दृष्टिकोण से, यह एक समग्र केस स्टडी के रूप में उभरता है।

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✍️ARVIND SINGH PK REWA

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ट्रम्प की टैरिफ नीति: भारत के लिए नया आर्थिक संकट या केवल परीक्षा की घड़ी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने वैश्विक व्यापार को नया मोड़ दे दिया है। भारत, जो अमेरिका का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार माना जाता रहा है, अब 50 प्रतिशत टैरिफ की चपेट में फंस गया है। यह कदम न केवल द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालेगा। ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि भारत का रूस से सस्ता तेल खरीदना यूक्रेन युद्ध को 'ईंधन' दे रहा है, लेकिन यह दावा कई सवाल खड़े करता है—क्यों केवल भारत को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि चीन जैसे अन्य बड़े आयातक बच गए हैं? यह टैरिफ युद्ध भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के लिए एक कठिन परीक्षा है, जहां एक ओर निर्यात पर संकट मंडरा रहा है, वहीं दूसरी ओर आत्मनिर्भरता की राहें खुल रही हैं। ट्रम्प का यह फैसला अप्रत्याशित नहीं है। अप्रैल 2025 में उन्होंने 'मुक्ति दिवस' घोषित कर वैश्विक आयात पर 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में देश-विशेष दरों में बदल दिया ग...

Bypassing Hormuz: India’s Strategic Deep-Sea Oil Pipeline to Secure Gulf Energy Imports

MEIDP Project: क्या है भारत-यूएई की डीप-सी पाइपलाइन योजना, जिससे खत्म होगी होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता? पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक योजना पर काम शुरू कर दिया है। भारत और यूएई (UAE) के बीच अरब सागर के नीचे गहरे समुद्र में एक सीधी तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी चल रही है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी के बीच हुई बैठक के बाद इस महा-परियोजना को केंद्र सरकार ने अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया है। पहले इसे एक निजी प्रोजेक्ट माना जा रहा था, लेकिन अब यह भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति का मुख्य हिस्सा बन चुका है। परियोजना का नाम और मुख्य विशेषताएं: MEIDP इस महत्वाकांक्षी परियोजना को MEIDP (Middle East to India Deep-Water Pipeline) नाम दिया गया है।   रूट: यह पाइपलाइन यूएई और ओमान के तटों से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए सीधे भारत में गुजरात और महाराष्ट्र ...

09 April 2025 Current Affairs in Hindi

 UPSC Current Affairs : April 2025 1-"नमामि गंगे" परियोजना की शुरुआत के एक दशक बाद इसकी उपलब्धियों और चुनौतियों की समीक्षा करें। (Review the achievements and challenges of the Namami Gange Project a decade after its launch.) उत्तर का प्रारूप: परिचय: "नमामि गंगे" योजना वर्ष 2014 में प्रारंभ की गई थी। इसका उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ, अविरल और निर्मल बनाना है। यह भारत सरकार की एक फ्लैगशिप परियोजना है जो पर्यावरण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और अन्य निकायों के सहयोग से संचालित होती है। प्रमुख उपलब्धियाँ (Achievements): जल शुद्धिकरण संयंत्रों की स्थापना: अब तक 195 से अधिक STPs (Sewage Treatment Plants) स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से कई कार्यशील हैं। औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन: 1,100 से अधिक प्रदूषक उद्योगों की निगरानी की जा रही है और गंगा में अवैध अपशिष्ट छोड़े जाने की घटनाओं में गिरावट आई है। घाट विकास एवं सौंदर्यीकरण: हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर 150+ घाटों का निर्माण/पुनर्निर्माण किया गया है। नदी सतह की सफाई: रिवर स्किमर मशीनों द्व...

DRDO and Indian Army Successfully Conduct Four MRSAM Missile Tests in Odisha

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और कदम: DRDO व भारतीय सेना द्वारा MRSAM परीक्षण की सफलता हाल ही में DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और भारतीय सेना ने ओडिशा के समुद्र तटीय क्षेत्र से मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) के चार उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। यह न केवल देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक ठोस प्रगति भी है। MRSAM प्रणाली की विशेषताएँ: MRSAM, जिसे बाराक-8 के नाम से भी जाना जाता है, भारत-इज़राइल संयुक्त परियोजना का हिस्सा है। यह मिसाइल प्रणाली दुश्मन के विमानों, ड्रोन, हेलीकॉप्टरों और क्रूज़ मिसाइलों को 70-100 किमी तक की दूरी पर नष्ट करने में सक्षम है। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता। 360 डिग्री कवरेज व हाई रेस्पॉन्स टाइम। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के अनुकूल डिजाइन। रणनीतिक महत्व: यह परीक्षण भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में वायु सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करता है। भविष्य में स्वदेशी हथियार प्रणालियों ...